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क्या अंकारा बनने जा रहा नया वैश्विक डिफेंस हब?

by Live India
क्या अंकारा बनने जा रहा नया वैश्विक डिफेंस हब?

नाटो शिखर सम्मेलन: तुर्किये की राजधानी अंकारा में 7-8 जुलाई 2026 को नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन आयोजित हो रहा है. गठबंधन में अक्सर अलग-थलग दिखने वाला तुर्किये इस वैश्विक मंच के जरिए सैन्य गुट के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और सामरिक ताकत का प्रदर्शन करना चाहता है. इस सम्मेलन की मेजबानी कर तुर्किये खुद को पश्चिमी देशों और मध्य-पूर्व के बीच एक महत्वपूर्ण सुरक्षा पुल के रूप में स्थापित कर रहा है.

सुरक्षा और जिम्मेदारी: तुर्किये यूरोपीय सुरक्षा योजनाओं में अपनी भागीदारी बढ़ाना चाहता है और सहयोगियों के बीच रक्षा खर्च (5% लक्ष्य) के बोझ को साझा करने पर जोर दे रहा है.

रक्षा उद्योग: एक बड़ा हथियार निर्यातक होने के नाते, तुर्किये शिखर सम्मेलन के दौरान ‘डिफेंस इंडस्ट्री फोरम’ की सह-मेजबानी कर अपने सैन्य-औद्योगिक तालमेल को बढ़ाएगा.

रणनीतिक मध्यस्थता: यूक्रेन युद्ध और क्षेत्रीय संघर्षों के बीच वह नाटो के पुनर्गठन और सामूहिक सुरक्षा प्राथमिकताओं को तय करने में मुख्य सूत्रधार बनेगा.

सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध

तुर्किये अगले महीने के नाटो शिखर सम्मेलन के लिए व्यापक सुरक्षा उपाय कर रहा है. हजारों पुलिसकर्मी तैनात कर रहा है. हवाई सुरक्षा को हाई अलर्ट पर रख रहा है, जबकि सार्वजनिक समारोहों पर प्रतिबंध लगा रहा है. तुर्किये सरकार अभिव्यक्ति और सभा की स्वतंत्रता पर भी विवादास्पद प्रतिबंध लगा रहा है. इसका उद्देश्य शिखर सम्मेलन की रक्षा करना है, लेकिन ताकत प्रदर्शित करना और नाटो के प्रति तुर्किये की प्रतिबद्धता को भी दिखाना है.

7-8 जुलाई को आएंगे 32 देशों के नेता

7-8 जुलाई को तुर्की की राजधानी में सभी 32 सदस्य देशों के नेताओं के एकत्र होने की उम्मीद है, जिसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी शामिल हैं, जिनकी नाटो से हटने और अमेरिकी सेना के स्तर को कम करने की धमकियों ने गठबंधन के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा कर दी है. तुर्किये ने एक नए वीआईपी हवाई अड्डे का भी अनावरण किया है, जिसे विशेष रूप से नाटो नेताओं की मेजबानी के लिए एक पूर्व सैन्य हवाई क्षेत्र से परिवर्तित किया गया है.

सहयोगी एकता का रखेंगे लक्ष्य

अंकारा समिट में, NATO सदस्य देशों के बीच रक्षा खर्च और गठबंधन में अमेरिका की बदलती भूमिका से जुड़े सवालों पर चर्चा होने की उम्मीद है. बैठक का मुख्य एजेंडा एकजुटता पर केंद्रित होगा, क्योंकि ट्रंप ने ईरान के खिलाफ अमेरिका के नेतृत्व वाली लड़ाई और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने की कोशिशों में सहयोग न करने के लिए सहयोगी देशों की आलोचना की है. NATO में तुर्की के पूर्व राजदूत और अंकारा पॉलिसी सेंटर के सुरक्षा विश्लेषक फातिह सीलन ने कहा कि इस बैठक का अहम पहलू यह है कि समिट के दौरान अमेरिका और यूरोप के बीच की दरार को किस हद तक भरा या कम किया जा सकता है.

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कहा कि हमें किसी चमत्कार की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, लेकिन फिर भी अगर NATO के महत्व पर जोर देने वाले विचारों में सहमति बनती है, तो इसे सफलता माना जाना चाहिए. मेजबान के तौर पर तुर्की की भूमिका ने ट्रंप की मौजूदगी सुनिश्चित करने में मदद की है, जिनके तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ करीबी संबंध हैं. व्हाइट हाउस में NATO महासचिव मार्क रुटे के साथ बैठक के बाद उन्होंने पत्रकारों से कहा कि अगर यह बैठक राष्ट्रपति एर्दोगन द्वारा तुर्की में आयोजित नहीं की जा रही होती, तो मुझे नहीं लगता कि मैं इसमें शामिल होता.

गठबंधन में तुर्की की अहम भूमिका

सम्मेलन से पहले, एर्दोगन ने तुर्की को एक भरोसेमंद सहयोगी बताया है जो NATO के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में लगातार ज़िम्मेदारी निभाता है. कहा कि तुर्की गठबंधन में अहम भूमिका निभाता रहेगा. उन्होंने कहा कि उनका देश यह पक्का करने के लिए काम कर रहा है कि अंकारा सम्मेलन NATO के इतिहास में एक अहम पड़ाव साबित हो. 1952 से NATO का सदस्य रहा तुर्की, अमेरिका के बाद गठबंधन की दूसरी सबसे बड़ी सेना वाला देश है. इसकी डिफेंस इंडस्ट्री तेज़ी से बढ़ रही है और यह यूरोप, मध्य पूर्व, काला सागर और काकेशस के चौराहे पर एक रणनीतिक जगह पर स्थित है. फिर भी, इसने अक्सर आज़ाद तौर पर काम किया है, जिससे सहयोगी देश नाराज़ हुए हैं. जैसे कि रूस पर प्रतिबंधों में शामिल होने से इनकार करना, ग्रीस के साथ विवाद और रूसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम खरीदना. इसी कदम की वजह से इसे 2019 में अमेरिका के नेतृत्व वाले F-35 प्रोग्राम से बाहर कर दिया गया था.

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मांगें पूरी होने तक अड़ा रहा तुर्की

NATO सहयोगियों से नाराज रहा है अंकारा

अंकारा भी कई बार अपने NATO सहयोगियों से नाराज़ रहा है, खासकर 2016 में तख्तापलट की नाकाम कोशिश के दौरान गठबंधन की एकजुटता की कमी और सीरिया में दखल के बाद तुर्की पर हथियारों की बिक्री पर लगी पाबंदियों को लेकर. अंकारा स्थित SETA थिंक टैंक के विश्लेषक मुरात असलान ने कहा कि अमेरिका और यूरोप के साथ उतार-चढ़ाव भरे रिश्तों की वजह से तुर्की ने अकेले काम करना सीख लिया है. उन्होंने यह भी कहा कि अब यूरोप भी अमेरिका से रणनीतिक स्वायत्तता (strategic autonomy) की बात कर रहा है. उन्होंने कहा कि तुर्की यह दिखाकर कि कैसे आज़ादी और गठबंधन के वादों के बीच संतुलन बनाया जाए, अमेरिका-यूरोप के तनाव को कम करने में NATO की मदद कर सकता है.

फिर से पश्चिम की ओर झुक रहा है अंकारा

हालांकि, हाल ही में तुर्की NATO के और करीब आया है. ईरान युद्ध के दौरान NATO की अहमियत तब और साफ़ हो गई थी, जब गठबंधन के मिसाइल डिफेंस सिस्टम ने ईरान से तुर्की के इलाके में दागी गई चार मिसाइलों को रोक दिया था. समिट से कुछ हफ़्ते पहले, इटली और जर्मनी ने बढ़ते खतरों का सामना करने में तुर्की की मदद के लिए एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए थे. रिस्क इंटेलिजेंस कंपनी ‘वेरिस्क मेपलक्रॉफ्ट’ में मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका के मुख्य एनालिस्ट हैमिश किनियर ने एक नोट में लिखा कि तुर्की खुद को एक ऐसे विदेश नीति वाले देश के तौर पर दिखाना चाहता है जो NATO और पश्चिम से स्वतंत्र हो. उन्होंने आगे कहा कि हालांकि तुर्की अपना संतुलन बनाए रखने का तरीका नहीं छोड़ रहा है, लेकिन वह पश्चिम के और करीब आ रहा है, और इसकी मुख्य वजह NATO है.

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सुरक्षा के कड़े इंतजाम

अंकारा में शहर की कई मुख्य सड़कों, एयरपोर्ट के आस-पास, राष्ट्रपति भवन (जहां समिट होगी) और डेलीगेशन (प्रतिनिधिमंडलों) के ठहरने वाले होटलों के आस-पास आने-जाने पर सख़्त पाबंदियां लगाई जाएंगी. इससे लगभग 60 लाख की आबादी वाले शहर में लोगों की ज़िंदगी पर काफ़ी असर पड़ेगा. समिट की तैयारियों के बीच, एर्दोगन ने एक नए एयरपोर्ट का उद्घाटन किया. इसे पहले के मिलिट्री एयरफ़ील्ड से बदलकर बड़े रनवे वाली एक आधुनिक सुविधा में बदला गया है. अधिकारियों का कहना है कि समिट के बाद भी नया अंकारा एयरपोर्ट VIP एयरपोर्ट ही बना रहेगा और आम जनता के लिए इसका इस्तेमाल नहीं होगा. अख़बार ‘कुमहुरीयेत’ की रिपोर्ट के मुताबिक, शहर को सुंदर बनाने की कोशिश के तहत नए एयरपोर्ट से आने वाले रास्ते पर पड़ने वाले घरों के बाहरी हिस्सों को पेंट किया गया है.

प्रदर्शनों, कॉन्सर्ट पर रोक

आतंकवादी हमलों के इतिहास को देखते हुए तुर्की की राजधानी के लिए कड़ी सुरक्षा कोई नई बात नहीं है, लेकिन NATO से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था सामान्य से कहीं ज़्यादा कड़ी की गई है. अधिकारियों ने समिट के दौरान प्रदर्शनों, कॉन्सर्ट और ग्रेजुएशन सेरेमनी पर भी रोक लगा दी है, साथ ही भीड़ कम करने के लिए गैर-ज़रूरी सरकारी कर्मचारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया है. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षा बलों ने इस्लामिक स्टेट जैसे चरमपंथी समूहों से जुड़े होने के शक में 200 से ज़्यादा लोगों को हिरासत में लिया है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस कार्रवाई में कई एक्टिविस्ट, वकील और एक एकेडमिक भी शामिल थे.

कई वेबसाइटें ब्लाक

इस बीच, तुर्की में बैन की गई वेबसाइटों पर नज़र रखने वाली वेबसाइट ‘एन्गेली वेब’ के अनुसार, तुर्की की एक अदालत ने NATO और समिट की आलोचना करने वाली वेबसाइटों को ब्लॉक कर दिया. सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था का हवाला देते हुए यह कदम उठाया गया. समिट को कवर करने के लिए तुर्की के विपक्षी झुकाव वाले मीडिया संगठनों के कई पत्रकारों को मान्यता नहीं दी गई, जिससे मीडिया अधिकार समूहों में नाराज़गी फैल गई.

तुर्की के पूर्व राजदूत और मुख्य विपक्षी पार्टी के सांसद नामिक तान ने लिखा कि संगठन के इतिहास में, हमने समिट के लिए मेज़बान शहर में कभी भी इतने कड़े और दमघोंटू सुरक्षा इंतज़ाम नहीं देखे, जितने इस बार अंकारा में देखने को मिल रहे हैं. पर्सनल ट्रेनर सेलिन काराकोच ने कहा कि उन्हें तब राहत मिली जब उन्हें बताया गया कि 5 जुलाई को होने वाली उनकी शादी पाबंदियां शुरू होने से ठीक पहले है. उन्होंने मज़ाक में कहा कि उस हफ़्ते अंकारा में होने वाली आखिरी शादियों में से एक हमारी शादी हो सकती है.

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