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Strait of Hormuz: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का एक ऐसा रास्ता है, जिस पर इन दिनों हर किसी की नज़रें टिकी हुई हैं. हालांकि, ये सस्पेंस खत्म होने का नाम ही नहीं ले रहा कि, ये रास्ता खुला है या बंद!
20 अप्रैल, 2026
दुनिया के नक्शे पर एक ऐसा छोटा सा समुद्री रास्ता है, जो अगर बंद हो जाए तो पूरी दुनिया की रफ्तार थम सकती है. हम बात कर रहे हैं स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की. पिछले कुछ दिनों से इस रास्ते को लेकर भारी कन्फ्यूजन बना हुआ है. कभी खबर आती है कि रास्ता खुल गया है, तो कभी गोलियों की गूंज इसे फिर से बंद कर देती है. फिलहाल आलम ये है कि ये इलाका जंग के मुहाने पर खड़ा है और दुनिया का सबसे अहम तेल मार्ग पूरी तरह से अधर में लटका है.
जब लगा सब ठीक है
हॉर्मुज में सस्पेंस का सिलसिला शनिवार, 18 अप्रैल से शुरू हुआ. ईरान के विदेश मंत्री ने अचानक ऐलान किया कि ये समुद्री रास्ता पूरी तरह खुला है. इस खबर के आते ही खाड़ी में फंसे जहाजों के बीच वहां से निकलने की होड़ मच गई. कुछ घंटों के लिए ऐसा लगा भी कि हालात सुधर रहे हैं. शनिवार को करीब 20 जहाजों ने इस रास्ते को पार किया, जो मार्च के बाद सबसे बड़ी संख्या थी. लेकिन ये राहत बहुत कम टाइम के लिए थी. जैसे ही अमेरिका ने अपनी घेराबंदी जारी रखने की बात कही, ईरान ने तुरंत अपना रुख बदल लिया और फिर से पाबंदियां लगा दीं. ईरान का सीधा मैसेज है कि, अगर हमारा तेल नहीं बिकेगा, तो किसी और का जहाज भी यहां से नहीं गुजरेगा.
भारतीय जहाजों पर हमला
इस पूरे ड्रामे के बीच सबसे डराने वाली बात भारतीय जहाजों पर हुआ हमला है. ट्रांजिट के दौरान दो भारतीय जहाजों पर गोलीबारी की गई, जिसके बाद उन्हें मजबूरन वापस मुड़ना पड़ा. खबर है कि ईरान के पास हथियारबंद नावों ने एक टैंकर को घेरकर फायरिंग शुरू कर दी. रेडियो पर गोलियों की आवाज सुनकर आसपास के बाकी जहाजों ने भी अपने रास्ते बदल लिए. ब्रिटिश सेना ने भी इस बात की कन्फर्म किया है कि ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड की नावों ने टैंकरों को निशाना बनाया है. इस हिंसा का नतीजा ये हुआ कि रविवार तक जहाजों का आना-जाना पूरी तरह से बंद हो गया. कम से कम 13 बड़े तेल टैंकरों ने रिस्क लेने के बजाय वापस लौटना या, वहीं पर लंगर डालना बेहतर समझा.
हॉर्मुज क्यों है जरूरी?
अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस छोटे से रास्ते के लिए इतनी मारामारी क्यों है? दरअसल, दुनिया की कुल तेल सप्लाई का लगभग 5वां हिस्सा यानी 20% इसी रास्ते से होकर गुजरता है. फिलहाल, लगभग 13.5 करोड़ बैरल कच्चा तेल और बड़े लेवल पर LNG टैंकर खाड़ी के अंदर ही फंसा है. अगर ये रास्ता ज्यादा टाइम तक बंद रहा, तो पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं.
डिप्लोमेसी वर्सेस धमकी
एक तरफ अमेरिका इस घेराबंदी के जरिए ईरान की इकोनॉमी को तोड़कर उसे परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए मजबूर करना चाहता है. दूसरी तरफ ईरान इस रास्ते को एक हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हिंट दिए हैं कि बातचीत के लिए उनके प्रतिनिधि पाकिस्तान जाएंगे, लेकिन ईरान ने क्लियर कह दिया है कि अमेरिका की शर्तें अवास्तविक हैं और वो अपने यूरेनियम भंडार को नहीं छोड़ेगा. ट्रंप ने तो यहां तक वॉर्निंग दी है कि अगर कोई समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के बुनियादी ढांचे पर सीधे हमले किए जा सकते हैं.
रास्ता खुला माना जाए?
टेक्निकली देखें तो किसी भी पक्ष ने इसे स्थायी रूप से बंद घोषित नहीं किया है. लेकिन जमीनी हकीकत ये है कि लगातार हो रहे हमले, धमकियां और अमेरिकी घेराबंदी ने इस रास्ते को व्यापारिक जहाजों के लिए मौत का कुआं बना दिया है. कोई भी शिपिंग कंपनी अपने क्रू मेंबर्स और महंगे जहाजों की जान जोखिम में नहीं डालना चाहती. इसलिए, ऑफिशियली न सही, पर हॉर्मुज फिलहाल बंद ही है.
आगे क्या होगा?
ईरान और अमेरिका के बीच सीजफायर की टाइम लिमिट खत्म होने वाली है. अगर बातचीत में कोई मैजिक होता है, तो रास्ता रातों-रात खुल सकता है. लेकिन अगर समुद्र में इसी तरह हमले जारी रहे, तो ये तनाव एक बड़ी वॉर की शक्ल ले सकता है. फिलहाल तो दुनिया सांसें थामकर देख रही है कि इस चोकपॉइंट का सस्पेंस कब खत्म होगा.
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