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सायोनी घोष: ‘अच्छा सिला दिया तूने मेरे प्यार का‘- यह गाना आज ममता बनर्जी के ऊपर पूरी तरह से सही बैठता है. देश के सबसे दिग्गज नेताओं में से एक ममता बनर्जी आज अकेले पड़ गई हैं, क्योंकि पश्चिम बंगाल में 15 सालों तक सत्ता में रही उनकी पार्टी टीएमसी इस समय अपने सबसे बड़े संकट से जूझ रही है. विधानसभा चुनाव हारने के बाद जनता तो क्या खुद नेता भी ममता बनर्जी का हाथ छोड़ रहे हैं. हर दिन एक नई बगावत देखने को मिल रही है और इस्तीफों का सिलसिला जारी है. आलम ये है कि ममता बनर्जी के सबसे करीबी नेता तक दीदी को छोड़कर जाने की धमकी दे रहे हैं. वो नेता जो कल तक दूसरे बागियों को गालियां दे रहे थे और उनके जैसा न बनने की कसम खा रहे थे, उन्होंने भी पलटी मार ली.
चुनावी हार के एक महीने के अंदर ही पार्टी का इतनी बुरी तरह से टूटना ममता बनर्जी के लिए पैरों तले जमीन खिसकने जैसा है. टीएमसी का यह संकट बंगाल से दिल्ली तक फैल गया है. पहले 80 में से 58 विधायकों ने ममता बनर्जी से बगावत कर अपना अलग विंग बना लिया और अब सांसद भी उनसे रिश्ता तोड़ रहे हैं. 28 लोकसभा सांसदों में से 20 ने टीएमसी से अलग होकर बीजेपी को समर्थन देने का ऐलान किया है. हैरान करने वाली बात यह है कि बागी सांसदों की लिस्ट में सायोनी घोष का भी नाम है, जो कुछ दिन पहले टीएमसी के लिए जोर-शोर से प्रचार कर रही थी और सीएम सुवेंदु अधिकारी की जमकर आलोचना कर रही थीं.

“मैं चड्ढा नहीं हूं”
सायोनी घोष ने चुनाव प्रचार के दौरान दल बदलने वाले नेताओं पर जमकर हमला बोला. इतना ही नहीं, उन्होंने राघव चड्ढा के आम आदमी पार्टी को छोड़कर बीजेपी में शामिल होने पर कहा था कि “मैं चड्ढा नहीं हूं, जो पलट जाऊंगी, मैं सायोनी घोष हूं”. हालांकि आज कौन क्या है, यह कहना मुश्किल है. सायोनी घोष बंगाल की वो सांसद हैं, जिन्होंने फिल्मी दुनिया से राजनीति में कदम रखा. बुहत कम लोग जानते हैं कि सायोनी पहले एक्टर थी और कुछ सालों पहले ही ममता ने उन्हें टीएमसी के लिए चुना. इस लेख में आप सायोनी घोष के बारे में जानेंगे कि उनका हिरोइन से सांसद बनने का सफर कैसा रहा और इस दौरान वे किन-किन विवादों में फंसी.
छोटी उम्र से की एक्टिंग
सायोनी घोष का जन्म 27 जनवरी, 1993 को कोलकाता में हुआ था. उन्होंने पॉइंट हाई स्कूल से पढ़ाई की. स्कूल कॉलेज के दिनों में ही वे सांस्कृतिक कार्यक्रम और नाटकों में हिस्सा लेती रही. एक्टिंग और सिंगिंग में एक्टिव होने के कारण उन्हें टीवी में रोल मिला और उन्होंने अपने करियर की शुरुआत की. सायोनी ने साल 2010 में 17 साल की उम्र में टेलीफिल्म ‘इच्छे दाना’ से बंगाली फिल्मों में कदम रखा. उनकी पहली बड़ी पर्दे की फिल्म ‘नोटोबोर नोटआउट’ थी. धीरे-धीरे उन्होंने एक्टिंग और सिंगिंग से बंगाल में अपनी अलग पहचान बना ली, जिससे वे पॉलिटिक्स में आने से पहले ही फेमस हो गई थीं. बचपन से स्टेज पर भाषण देना और लोगों से संवाद करने वाली कला ने उन्हें राजनीति में भी अलग पहचान दिलाई. सायोनी ने राजकहिनी, अपराजितो, कानामाछी, ब्योमकेश ओ चिड़ियाखाना, मेघनाद बध रहस्य समेत अन्य फिल्मों में काम किया है. इसके अलावा उन्होंने चरित्रहीन और आबार प्रलय जैसी फेमस वेब सीरीज में काम किया है.

राजनीति में एंट्री
2021 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में ममता बनर्जी कुछ युवा चेहरों की तलाश कर रही थीं, जो उनकी विचारधारा के साथ चलें और बीजेपी को टक्कर दे पाए. सायोनी घोष उसमें पूरी तरह फिट हुईं. वे पहले से फेमस भी थीं, धाकड़ भी थीं और युवा भी. फरवरी 2021 में सायोनी घोष टीएमसी में शामिल हो गईं. मार्च 2021 में उन्हें 2021 पश्चिम बंगाल विधान सभा चुनाव में आसनसोल दक्षिण निर्वाचन क्षेत्र से तृणमूल कांग्रेस का उम्मीदवार घोषित किया गया. लेकिन, वह भाजपा उम्मीदवार अग्निमित्रा पॉल से हार गईं. हालांकि उन्हें इसके बाद भी राजनीतिक मौके मिलते रहे. जून, 2021 में अभिषेक बनर्जी को तृणमूल कांग्रेस की यूथ विंग के अध्यक्ष के पद से हटा दिया गया और सायोनी घोष को नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने टीएमसी के टिकट पर जाधवपुर से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की. उन्होंने 2,58,201 वोटों के अंतर से बीजेपी के अनिर्बन गांगुली को हराया.

विवादों में घिरी रहती हैं घोष
राजनीति में आने के बाद से ही सायोनी घोष विवादों में घिरी रही हैं. कभी अपने बयानों को लेकर तो कभी पुराने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर. साल 2021 में त्रिपुरा में गिरफ्तार किया गया था. उन पर स्थानीय चुनावों में हिंसा भड़काने का आरोप था. सायोनी ने बीजेपी की एक नुक्कड़ सभा के पास से गुजरते हुए नारा लगाया था- “खेला होबे”. त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब की रैली में बीजेपी के समर्थकों की भीड़ में अपनी गाड़ी घुसाने की कोशिश करने के आरोप में उन पर हत्या की कोशिश और दुश्मनी भड़काने का आरोप लगाया गया था. FIR के मुताबिक, घोष और उनके साथियों ने कथित तौर पर गलत भाषा का इस्तेमाल किया, भीड़ पर पत्थर फेंके और वहां मौजूद लोगों में दहशत फैलाई, जिससे कुछ बीजेपी कार्यकर्ताओं को मामूली चोटें आईं.
शिवलिंग पोस्ट- साल 2021 में सायोनी घोष के ट्विटर अकाउंट से एक पुराना फरवरी 2015 का पोस्ट वायरल हुआ. इसमें सायोनी ने एक कार्टून पोस्ट किया था, जिसमें शिवलिंग के ऊपर कंडोम रखते हुए दिखाया गया था. यह पोस्ट वायरल होने के बाद सायोनी को कड़े विरोध का सामना करना पड़ा. त्रिपुरा के पूर्व गवर्नर तथागत रॉय ने कोलकाता में घोष के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसमें आरोप लगाया गया कि ट्वीट से सायोनी ने हिंदुओं की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का काम किया है. घोष ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि उस समय उनका अकाउंट हैक हो गया था और उन्होंने कंटेंट के लिए माफी भी मांगी. हालांकि इस विवाद ने उनका पीछा नहीं छोड़ा. आज भी सायोनी घोष पर हमला करने के लिए बीजेपी और उनके विरोधी इस पोस्ट का इस्तेमाल करते हैं. चुनाव के दौरान भी सायोनी को इस विवादित पोस्ट के बारे में सवालों का सामना करना पड़ा और हर बार उन्होंने यही बात कही कि उनका अकाउंट हैक था.
ईडी की पूछताछ- इसके अलावा जब 2022 जब वे यूथ विंग की अध्यक्ष थी, तब उनपर पश्चिम बंगाल स्कूल सेवा आयोग भर्ती घोटाले में मिले होने का आरोप लगा. 30 जून, 2023 को इसी सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने उनसे 11 घंटे की लंबी पूछताछ की थी.
आंखों में काबा
हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान सायोनी घोष ने खूब सुर्खियों बटोरी और सबसे ज्यादा चर्चा में रहा उनका गाना. दरअसल, पश्चिम बंगाल में मुसलमानों को टीएमसी का कोर वोटर माना जाता है. चुनाव प्रचार के दौरान सायोनी घोष ने मुस्लिम बहुल इलाके में मंच से लोगों से जुड़ने के लिए एक इस्लामिक गीत गाया. उन्होंने बंगाली भाषा में “दिल में काबा और आंखों में मदीना” गाना गाया था.

इस गाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बीजेपी ने जमकर इस मुद्दे को भुनाया. भाजपा नेताओं ने इसे टीएमसी की मुस्लिम तुष्टिकरण और वोट बैंक की राजनीतिक का सबसे बड़ा उदाहरण बताया. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विवाद पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बंगाल हमेशा काली, दुर्गा और वंदे मातरम की धरती रहेगी. इसे काबा की धरती नहीं बनने दिया जाएगा. इसी दौरान एक बार फिर से उनका पुराना शिवलिंग वाला पोस्ट भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और बीजेपी कार्यकर्ताओं ने उन्हें हिंदू विरोधी होने का आरोप लगाया. बढ़ते विवाद और हिंदू वोटरों में फैली नाराजगी को भांपते हुए, सायोनी घोष ने डैमेज कंट्रोल की कोशिश की। बाद के चुनाव प्रचार के दौरान, उन्होंने मंच से हनुमान चालीसा भी पढ़कर सुनाया.
शायराना अंदाज
सायोनी घोष अक्सर चुनावी भाषणों में शायराना तंज करती हैं. एक अन्य रैली में उन्होंने कलमा पढ़ा और फिर हनुमान चालीसा का पाठ किया. इसके बाद उन्होंने कहा “बहती गंगा भी पानी है, आबे जम-जम भी पानी है , पंडित पिए मुल्ला पिए , पानी का मजहब क्या होगा?” सोशल मीडिया पर अक्सर उनके बयान वायरल होते हैं. वो बांग्ला, हिंदी और अंग्रेजी अग्रेसिव स्टाइल से बीजेपी पर हमला करती हुई दिखती रही हैं. हालांकि अब वे किस पर हमला करेंगी, यह अभी कहा नहीं जा सकता.
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