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जंगल समीक्षा में आपका स्वागत है: अगर आपको ऐसी फिल्में पसंद हैं, जिनमें हर दो मिनट बाद कोई नया स्टार एंट्री मारता है, हर पांच मिनट में गोली चलती है, हर दस मिनट में कोई पुरानी फिल्म याद दिलाई जाती है और कहानी बार-बार रास्ता बदलती है, तो ‘वेलकम टू द जंगल’ आपके लिए ही है. लेकिन अगर आप दमदार कहानी, तगड़ी कॉमेडी और यादगार स्क्रीनप्ले की उम्मीद लेकर थिएटर पहुंच रहे हैं, तो मामला थोड़ा उल्टा भी पड़ सकता है. करीब तीन घंटे लंबी ये फिल्म शुरू से आखिर तक ऑडियन्स को हंसाने की पूरी कोशिश करती है. फर्क सिर्फ इतना है कि कई बार फिल्म खुद पर ही हंसती हुई नजर आती है. कई बार ऑडियन्स सोच में पड़ जाती है, कि आखिर ये चल क्या रहा है.
गजब की शुरुआत!
फिल्म की कहानी एक करप्ट बिजनेसमैन से शुरू होती है, जिसे टैक्स बचाने के लिए अपने करोड़ों रुपये डुबाने हैं. इसका सबसे ईजी तरीका निकलता है एक ऐसी फिल्म बनाना, जो सुपर फ्लॉप हो जाए. इसी फ्लॉप फिल्म को बनाने के लिए बुलाया जाता है दो अजीबोगरीब डायरेक्टर, एक फालतू कैमरामैन और एक ऐसे हीरो को, जिसकी फिल्मों की किस्मत लंबे टाइम से खराब चल रही है. यहीं से शुरू होता है ‘वेलकम टू द जंगल’ के कैरेक्टर्स का ऐसा सिलसिला कि, गिनती करना भी मुश्किल हो जाता है. कोई गैंगस्टर है, कोई स्ट्रगल करता एक्टर है, कोई फ्लॉप हीरोइन है, कोई कॉमेडियन है, कोई विलेन और कोई ऐसा कैरेक्टर है, जो सिर्फ दो-तीन सीन के लिए आता है और फिर गायब हो जाता है. यानी फिल्म का पहला घंटा कहानी कम और एक्टर्स की परेड ज्यादा लगता है.

पुराने अंदाज में अक्की भैया
एक टाइम था, जब फैंस अक्षय कुमार की कॉमेडी फिल्मों का बेसब्री से इतज़ार किया करते थे. यानी कॉमेडी की बात में अक्षय कुमार का नाम जरूर लिया जाता था. ‘वेलकम टू द जंगल’ में भी वो अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से कई जगह जान डालते हैं. भोजपुरी फिल्मों में काम करने वाले स्ट्रगलर एक्टर के कैरेक्टर में अक्षय कुमार पूरी एनर्जी के साथ नजर आते हैं. उनकी कई पंचलाइन और एक्सप्रेशन हंसी जरूर दिलाते हैं. खासकर जब वो खुद को बचाने के लिए अजीबोगरीब हरकतें करते हैं. कभी वो बाकी एक्टर्स के साथ उलझते हैं, तब फिल्म थोड़ी देर के लिए ट्रैक पर लौटती हुई दिखती है. देखा जाए तो, अक्षय कुमार इस फिल्म में अपने पुराने अंदाज़ में लौटे हैं.
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कॉमेडियन्स की फौज
‘वेलकम टू द जंगल’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी स्टारकास्ट है. अरशद वारसी, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, सुनील शेट्टी, अनिल कपूर, संजय दत्त, कृष्णा अभिषेक और कीकू शारदा जैसे कलाकार जब एक साथ स्क्रीन पर आते हैं तो, लोगों की उम्मीदें अपने आप बढ़ जाती हैं. अरशद वारसी का बेफिक्र अंदाज कई जगह मजेदार लगता है. परेश रावल और राजपाल यादव की जोड़ी हमेशा की तरह अपनी शानदार कॉमिक टाइमिंग से लोगों को इम्प्रेस करती है. वहीं, जॉनी लीवर का एक्सपीरियंस कई सीन में क्लियर नजर आता है. इसके अलावा सुनील शेट्टी इस बार सबसे बड़ा सरप्राइज बनकर सामने आए हैं. उनका येडा अन्ना वाला कैरेक्टर कई बार पूरी फिल्म पर भारी पड़ता हुआ दिखाई देता है.
इतने सारे स्टार… पर कहानी कहां है?
‘वेलकम टू द जंगल’ की सबसे बड़ी ताकत अगर इसकी स्टारकास्ट है, तो फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी भी इसकी भीड़ ही है. लगता है जैसे बॉलीवुड के जितने भी आर्टिस्ट अवेलेबल थे, सभी को एक साथ फिल्म में ले लिया गया. रिजल्ट ये निकला कि किसी भी कैरेक्टर को ठीक से डेवलप होने का मौका ही नहीं मिला. दिशा पटानी, जैकलीन फर्नांडिस, तुषार कपूर, श्रेयस तलपड़े, कृष्णा अभिषेक, किकू शारदा, मुकेश तिवारी, यशपाल शर्मा और कई और एक्टर्स फिल्म का हिस्सा तो हैं, लेकिन उनके हिस्से में ज्यादा अच्छे सीन आए ही नहीं. यानी फिल्म में कई कैरेक्टर्स सिर्फ आते हैं, दो-चार डायलॉग बोलते हैं और फिर भीड़ में खो जाते हैं.

पुरानी वेलकम वाला मैजिक!
2007 में रिलीज़ हुई अक्षय कुमार की ‘वेलकम’ की सबसे बड़ी ताकत थी उसकी सिंपल कहानी और मजेदार कैरेक्टर्स. उदय भाई और मजनू भाई की जोड़ी आज भी लोगों को याद है. हर सीन में फ्रेशनेस थी और कॉमेडी अपने आप निकलकर आती थी. लेकिन ‘वेलकम टू द जंगल’ में पुरानी फिल्मों की यादें तो खूब दिलाई जाती हैं, मगर वही मैजिक क्रिएट नहीं हो पाया. यानी कई जगह ये फिल्म सिर्फ नॉस्टैल्जिया के भरोसे ही आगे बढ़ती हुई नजर आती है. पहली वाली ‘वेलकम’ में अक्षय कुमार, अनिल कपूर, कैटरीना कैफ, नाना पाटेकर, फिरोज़ खान और परेश रावल जैसे स्टार्स ने ऐसा मैजिक क्रिएट किया, जिसका असर आज भी लोगों पर दिखता है.
रेफरेंस की भरमार
‘वेलकम टू द जंगल’ में वेलकम, हेरा फेरी, मोहरा, आवारा पागल दीवाना, खिलाड़ी, OMG 2, पुष्पा के साथ-साथ कई और दूसरी फिल्मों के रेफरेंस भी भर-भर कर देखने को मिलते हैं. कुछ जगह ये मजेदार लगते हैं, लेकिन कई बार ऐसा फील होता है कि नई कॉमेडी बनाने की बजाय पुरानी यादों का सहारा ज्यादा लिया गया है. अगर आपने पुरानी बॉलीवुड फिल्में खूब देखी हैं तो इन रेफरेंस को समझकर मुस्कुराएंगे, वरना कई मजाक सिर के ऊपर से निकल सकते हैं.
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एक्शन ज्यादा, कॉमेडी कम
‘वेलकम टू द जंगल’ का सेकेंड हॉफ पूरी तरह बदल जाता है. जहां शुरुआत में कॉमेडी दिखाई जाती है, वहीं बाद में फिल्म एक्शन, गोलीबारी, गांव, बॉर्डर, आतंकवाद और बड़े-बड़े वॉर वाले सीन में खो जाती है. ऐसा लगता है जैसे अचानक किसी दूसरी फिल्म की कहानी शुरू हो गई हो. यानी कॉमेडी धीरे-धीरे पीछे छूट जाती है और एक्शन स्क्रीन पर कब्जा कर लेता है. हालांकि, एक बात है कि, इस फिल्म को काफी बड़े लेवल पर बनाया गया है. बड़ा सेट, एक्शन सीक्वेंस, हेलीकॉप्टर, ब्लास्ट और वीएफएक्स देखकर साफ समझ आता है कि मेकर्स ने बजट यानी पैसा खर्च करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. हालांकि, कई जगह कंप्यूटर ग्राफिक्स काफी ज्यादा वीक लगते हैं. तब आपको लगता है कि, बजट शायद एक्टर्स की फीस में ही चला गया है. खासकर वीएफएक्स गोरिल्ला वाला पार्ट जरूरत से ज्यादा नकली लगता है.

एक्ट्रेस को लेने का मतलब?
फिल्म की एक और सबसे बड़ी कमी ये भी है कि फीमेल कैरेक्टर्स को ज्यादा स्ट्रॉन्ग नहीं दिखाया गया. जैकलीन फर्नांडिस और दिशा पटानी जैसी एक्ट्रेसेस स्क्रीन पर खूबसूरत जरूर लगती हैं, लेकिन उनके हिस्से में ऐसा कोई दमदार सीन या डायलॉग नहीं आता जो लंबे टाइम तक किसी को भी याद रहे. रवीना टंडन का फिल्म में होने ऑडियन्स को खुश जरूर करता है, लेकिन उनका रोल भी कुछ खास नहीं है. इसके अलावा कई सीन्स में कॉमेडी लिमिट क्रॉस करती हुई भी लगती है. फिल्म में हंसाने के लिए कई ऐसे मजाक किए गए हैं जो आज के टाइम में पुराने और वीक लगते हैं. यानी जिनपर हंसी बिल्कुल नहीं आती. सबसे खराब बात, ‘वेलकम टू द जंगल’ में किसी की उम्र, किसी के बोलने का तरीका, किसी की बॉडी और किसी की कमजोरी का बार-बार मजाक बनाया गया है. आज की ऑडियन्स ऐसी कॉमेडी को पहले जितना पसंद नहीं करती. यही वजह है कि फिल्म के कई सीन्स हंसाने की बजाय अनकंफर्टेबल फील कराते हैं.
क्यों देख सकते हैं फिल्म?
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सबसे मजेदार सीन
पूरी फिल्म में एक सीन सबसे ज्यादा ध्यान खींचता है, जब अक्षय कुमार डर और अफरा-तफरी के बीच कहते हैं, ‘हम सब भांड हैं.’ यही एक पल ऐसा लगता है जहां फिल्म खुद अपनी बेवकूफियों को एक्सेप्ट करती है. काश, पूरी फिल्म इसी तरह खुद पर हंसने की हिम्मत दिखाती तो, रिजल्ट शायद और बेहतर होता. खैर, डायरेक्टर अहमद खान ने ‘वेलकम टू द जंगल’ को बहुत बड़े लेवल पर बनाने की कोशिश की है. स्क्रीन पर हर टाइम कुछ न कुछ होता रहता है. लेकिन इतने सारे कैरेक्टर्स के बीच फिल्म की कहानी बिखर जाती है. कई बार ऐसा लगता है कि डायरेक्टर ये डिसाइड ही नहीं कर पाए कि उन्हें कॉमेडी बनानी है, एक्शन फिल्म बनानी है या फिर दोनों का कॉम्बिनेशन.

देखें या नहीं?
अगर आप ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी के पुराने फैन हैं, अक्षय कुमार की कॉमिक टाइमिंग पसंद करते हैं और मल्टीस्टारर मसाला फिल्मों का मज़ा लेते हैं, तो ये फिल्म आपको कुछ-कुछ जगह पर जरूर एंटरटेन करेगी. लेकिन अगर आप स्ट्रॉन्ग कहानी, बढ़िया कॉमेडी और शानदार स्क्रीनप्ले ढूंढ़ रहे हैं, तो ये फिल्म आपकी उम्मीदों पर पूरी तरह खरी नहीं उतरती. देखा जाए तो ‘वेलकम टू द जंगल’ एक ऐसी फिल्म है जिसमें स्टार्स की पूरी बारात है, एक्शन का तूफान है, पुराने बॉलीवुड की यादें हैं और खूब हलचल है. इसमें हंसी के कुछ शानदार मूमेंट्स जरूर मिलते हैं, लेकिन वीक स्टोरी और जरूरत से ज्यादा भीड़ इसे अच्छी मूवी बनने से रोक देती है. ये फिल्म कम, गांव का मेला और शहर की मार्केट का कॉम्बो लगती है. अगर बिना दिमाग लगाए सिर्फ टाइमपास करना चाहते हैं, तो इस जंगल की सैर एक बार की जा सकती है.
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