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मुंबई 2011 ब्लास्ट: सीमा पार बैठे दहशतगर्द हर वक्त भारत को चोट पहुंचने की साजिश रचते रहते हैं. आजादी के बाद से अब तक भारत ने कई आतंकी हमले सहे हैं और सैंकड़ों लोगों को खोया है. 2011 का मुंबई सीरियल ब्लास्ट भी उसी कड़ी का एक डरावना अध्याय था, जिसने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं. धमाकों में 20 से ज्यादा लोगों की जान चली गई और लगभग 130 लोग घायल हुए थे. मुंबई के लोग आज भी उस खौफनाक दिन को नहीं भूल पाए हैं. हमलों के 15 साल बाद भी, धमाकों की गूंज, चीखें और अपनों को खोने का दर्द हजारों लोगों के दिलों में ताजा है. उस शाम असल में क्या हुआ था, आतंकवादियों ने पूरी साजिश कैसे रची और जांच एजेंसियां मामले की तह तक कैसे पहुंचीं? यहां पढ़ें 2011 मुंबई सीरियल ब्लास्ट की दर्दनाक कहानी.
12 मिनट में हुए तीन धमाके
13 जुलाई 2011 का दिन मुंबई के लिए एक काला दिन था. मुंबई में उस बारिश वाली शाम को शायद ही किसी ने सोचा होगा कि शहर कुछ ही मिनटों में खून से लथपथ हो जाएगा. लोग काम से घर भाग रहे थे, बाजारों में हमेशा की तरह भीड़ थी और सड़कों पर जिंदगी अपनी नॉर्मल रफ्तार से चल रही थी. लेकिन शाम को हुए तीन धमाकों ने मुंबई को हिलाकर रख दिया था. धमाका इतना भयानक था कि पूरा मार्केट तबाह हो गया. हमलावरों ने एक गली में स्कूटर पर विस्फोटक रखा था. इससे पहले कोई कुछ समझ पाता, अगले ही मिनट 6:55 बजे, दूसरा धमाका ओपेरा हाउस में हुआ. ओपेरा हाउस शहर के दक्षिणी हिस्से में है और एक व्यस्त इलाका है. यहां बम को प्रसाद चैंबर्स और पंचरत्न बिल्डिंग के बाहर एक टिफिन बॉक्स में छुपाकर में रखा गया था. तीसरा धमाका शाम 7:06 बजे दादर में हुआ. दादर मुंबई के बीचों-बीच है. यहां डॉ. एंटोनियो डा सिल्वा हाई स्कूल बेस्ट बस स्टैंड के पास एक बिजली के खंभे पर विस्फोटक रखे थे.
महज 12 मिनट में एक के बाद एक हुए धमाकों से दहशत फैल गई. तीनों जगहों पर अफरा-तफरी मच गई, लोग डर के मारे भागने लगे. ब्लास्ट वाली जगहों पर मरने वालों के चिथड़े मिले. मुंबई का इंजन मानों रुक सा गया. विस्फोटों के बाद, फोन लाइनें जाम हो गईं और कुछ घंटों के लिए संचार बंद हो गया. दिल्ली, चेन्नई, हैदराबाद और बैंगलोर सहित अन्य महानगरीय शहरों को भी हाई अलर्ट पर रखा गया था. विस्फोटों के तुरंत बाद, मुंबई पुलिस ने मुंबई में कुछ मोबाइल फोन उपयोगकर्ताओं को एक एसएमएस भेजा, जिसमें सावधान और घर के अंदर रहने के लिए कहा गया था. अधिकांश घायलों को मुंबई के विभिन्न अस्पतालों में ले जाया गया.
इस आतंकवादी संगठन ने ली हमले की जिम्मेदारी
मुंबई हमले की जिम्मेदारी इंडियन मुजाहिदीन (आईएम) ने ली थी. हमलों के मास्टरमाइंड यासीन भटकल उर्फ सैयद मोहम्मद अहमद जरार सिद्दीबप्पा ने कहा था कि उसे इन धमाकों पर गर्व है और उसने ही इस पूरे टेरर ऑपरेशन की निगरानी की थी. उसी ने बम बनाने के लिए विस्फोटक खरीदा और उसे इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) बनाने में अपने स्लीपर सेल्स की मदद की. सुरक्षा एजेंसियों की जांच में सामने आया कि मुंबई पर हुए 26/11 हमले के आतंकी आजमल कसाब को फांसी की सजा सुनाए जाने का बदला लेने के लिए आंतकियों ने मुंबई में हमले किए.
राष्ट्रीय जांच एजेंसी को इन बम धमाकों की जांच सौंपी गई. घटनास्थल समेत सभी चीजों की जांच में एनआईए को कई सुराग मिले. अधिकारियों ने एक संदिग्ध चोर को गिरफ्तार किया, जिसने धमाकों के लिए बाइक चोरी की थी. इसी बाइक पर विस्फोटक रखा गया था. सीसीटीवी फुटेज में दिखा कि एक लंबे बालों वाला व्यक्ति चोरी की लाल होंडा एक्टिवा चलाते हुए एक भीड़ भरी गली में घुसता है, दो बार बाएं मुड़ता है और स्कूटर को ब्लास्ट वाली जगह पर छोड़कर चला जाता है.
मुख्य आरोपी
23 जनवरी 2012 को, मुंबई पुलिस ने बिहार के दरभंगा जिले से दो संदिग्धों- नकी अहमद वासी अहमद शेख (22) और नदीम अख्तर अशफाक शेख (23) को गिरफ्तार किया. मुंबई पुलिस के एटीएस ने दावा किया कि दोनों ने विस्फोटों में इस्तेमाल किए गए दो स्कूटर चुराए थे, जो विस्फोट के मास्टरमाइंड यासीन भटकल द्वारा रची गई योजना का हिस्सा था.
बाद में पता चला कि नकी अहमद दो अन्य अपराधियों की मदद कर रहा था. आगे की जांच से पता चला कि दो पाकिस्तानी हमलावरों, वकास और तबरेज ने 18 सिम कार्ड और छह हैंडसेट का इस्तेमाल किया था. दोनों को नकी अहमद से सिम कार्ड मिले हुए थे. नकी को जनवरी 2012 में एटीएस ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से प्राप्त सिम कार्ड रखने के लिए गिरफ्तार किया था. इसके बाद नकी ने विस्फोटों में अपनी भूमिका कबूल की और हमलावरों के लिए रहने की व्यवस्था करने में इंडियन मुजाहिदीन के संस्थापक सदस्य यासीन भटकल के साथ काम करने की बात भी कबूल की.
बचने के लिए यह तरीका इस्तेमाल करते थे आतंकी
चार्जशीट के मुताबिक, ब्लास्ट करने से कुछ महीने पहले यासीन भटकल ने इमरान नाम से एक नकली पहचान पत्र का इस्तेमाल करके मुंबई के भायखला इलाके में एक कमरा किराए पर लिया और उसे अपना ठिकाना बना लिया. वहां से वह धमाकों की जगह की रेकी करता था. जांच एजेंसियों से बचने के लिए उसने एक अनोखा तरीका अपनाया. ट्रेस होने से बचने के लिए भटकल ने मोबाइल फोन को बिल्कुल इस्तेमाल नहीं किया. वो सिर्फ पब्लिक PC (साइबर कैफे) और एन्क्रिप्टेड चैट टूल के जरिए अपने साथियों से बात करता था. वे ईमेल के ड्राफ्ट फोल्डर में मैसेज लिखकर छोड़ देते थे और सेम अकाउंट को लॉग-इन करके मैसेज पढ़ते थे. ब्लास्ट से कुछ दिन पहले भायखला में उसी किराए के कमरे में बम बनाए गए थे. अमोनियम नाइट्रेट को पेट्रोल-डीजल के साथ मिलाकर IED बनाए गए थे.
तिहाड़ में बंद है यासीन भटकल
मई 2012 में चार्जशीट दाखिल की गई और एटीएस ने नकी अहमद, नदीम अख्तर, कफील अहमद, और हारून राशिद नाइक को गिरफ्तार किया. 2013 में मास्टरमाइंड यासीन भटकल को भारत-नेपाल सीमा से खुफिया एजेंसियों की मदद से गिरफ्तार किया गया. जमीन पर धमाका करने वाले दो मुख्य पाकिस्तानी बम हैंडलर वक्कास और तबरेज जांच एजेंसियों की पकड़ में नहीं आ सके. इसके अलावा, इंडियन मुजाहिदीन के टॉप कमांडर रियाज भटकल और इकबाल भटकल पाकिस्तान में छिपे हुए हैं.
2011 के मुंबई ट्रिपल धमाके का ट्रायल अभी भी स्पेशल मकोका (MCOCA) कोर्ट में चल रहा है और किसी को भी अभी तक दोषी करार नहीं दिया गया है. हालांकि यासीन भटकल को 2013 हैदराबाद ब्लास्ट केस में फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है और वह अभी तिहाड़ जेल में बंद है. ट्रायल की धीमी रफ्तार के चलते स्पेशल मकोका कोर्ट ने नवंबर 2025 को कफील अहमद और अप्रैल 2026 को नकी अहमद और हारून राशिद को जमानत दे दी.
मुंबई पर अब तक हुए इतने हमले
1993 मुंबई सीरियल ब्लास्ट: 12 मार्च 1993 को अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम ने मुंबई को दहला दिया था. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज और एयर इंडिया बिल्डिंग समेत 12 खास जगहों पर RDX ब्लास्ट हुए. इस भयानक आतंकी हादसे में 257 बेगुनाह लोग मारे गए और 713 लोग बुरी तरह घायल हुए.
विले पार्ले साइकिल ब्लास्ट (2003): 27 जनवरी 2003 को विले पार्ले रेलवे स्टेशन के ठीक बाहर एक बिजी मार्केट कॉम्प्लेक्स को निशाना बनाया गया था. आतंकी एक साइकिल पर बंधा हुआ क्रूड बम छोड़ गए थे. इस ब्लास्ट में 30 से ज्यादा लोग घायल हुए थे और आस-पास की दुकानों को बहुत नुकसान हुआ था.
मुलुंड लोकल ट्रेन ब्लास्ट (2003): 13 मार्च 2003 को शाम के व्यस्त समय में मुलुंड स्टेशन पर पहुंच रही ‘लेडीज स्पेशल’ लोकल ट्रेन के एक डिब्बे में जोरदार धमाका हुआ. प्रतिबंधित संगठन सिमी द्वारा प्रायोजित इस कायरतापूर्ण हमले में 11 यात्रियों की दुखद मौत हो गई और 65 अन्य घायल हो गए.
गेटवे ऑफ इंडिया और जवेरी बाजार ब्लास्ट (2003): 25 अगस्त 2003 को आतंकवादियों ने मुंबई के दो सबसे बिजी जगहों को निशाना बनाया. दो अलग-अलग टैक्सियों में RDX रखकर गेटवे ऑफ इंडिया और जवेरी बाजार में दोहरे धमाके किए गए. इस दोहरे बम धमाके में 46 नागरिकों की जान चली गई.
लोकल ट्रेनों में सीरियल ब्लास्ट (2006): 11 जुलाई 2006 को मुंबई की लाइफलाइन लोकल ट्रेनों पर सबसे बड़ा हमला हुआ. शाम को सिर्फ 11 मिनट के अंदर अलग-अलग स्टेशनों पर फर्स्ट क्लास ट्रेन के डिब्बों में सात RDX धमाके हुए. इस भयानक और दुखद घटना में 189 आम यात्रियों की मौत हो गई.
26/11 मुंबई हमले (2008): 26 नवंबर, 2008 को पाकिस्तान से आए लश्कर-ए-तैयबा के दस आत्मघाती हमलावरों ने मुंबई को बंधक बना लिया. उन्होंने ताज होटल, CST स्टेशन और नरीमन हाउस पर अंधाधुंध गोलियां चलाईं. इसके बाद 60 घंटे तक चले एनकाउंटर में 166 लोग मारे गए और सिर्फ एक आतंकवादी, अजमल कसाब, जिंदा पकड़ा गया.
’17 साल पुराने घाव आज भी ताजा है’, 26/11 हमले को नहीं भूला देश, जब दहशत में थी मुंबई
