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भारत रूस से तेल आयात करता है: पश्चिम एशिया में ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव ने एनर्जी सप्लाई के लिए अहम समुद्री रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बाधित कर दिया है. खाड़ी देशों से कच्चे तेल के आयात के लिए भारत इस रास्ते का काफी उपयोग करते रहा है लेकिन ईरान और अमेरिकी संघर्ष ने इसको बाधित कर दिया है.
होर्मुज संकट के बीच भारत ने रूस से तेल की खरीदारी को काफी बढ़ा दी है. इस बीच मई महीने के आंकड़े आएं हैं, जो यह बताते हैं कि भारत ने रूस से कच्चे तेल की केवल खरीदारी ही नहीं की है बल्कि इसने इसमें जबरदस्त बढ़ोतरी भी की है.
रिपोर्ट के अनुसार, भारत रूस से पहले के मुकाबले अभी काफी अधिक मात्रा में तेल की खरीदारी कर रहा है. बता दें कि यूक्रेन युद्ध को लेकर ट्रंप ने भारत को रूस से तेल खरीदने पर 25 फीसदी का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया था, लेकिन इस साल की शुरुआत में भारत-अमेरिकी मीटिंग में टैरिफ को हटा दिया गया था और पश्चिम एशिया संकट को देखते हुए ट्रंप ने भारत को रूस से तेल की खरीदारी करने की भी बात कह दी थी. बहरहाल, रूस से तेल की खरीदारी करने वाले मई के आंकड़े चौंकाने वाले हैं.
मई में कच्चे तेल की खरीदारी में 8% की बढ़ोतरी
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, यूरोपीय थिंक टैंक सेंटर फॉर रिसर्च ऑन एनर्जी एंड क्लीन एयर (सीआरईए) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मई में भारत रूसी जीवाश्म ईंधन (Russian fossil fuels) का दुनिया का दूसरा (पहले स्थान पर चीन) सबसे बड़ा खरीदार बना रहा. इसने अनुमानित 5.8 बिलियन यूरो (6.7 बिलियन अमेरिकी डॉलर) मूल्य के रूसी हाइड्रोकार्बन का आयात किया, क्योंकि रिफाइनर ने मॉस्को से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा दी थी.
इस महीने के दौरान रूस से भारत के आयात में कच्चे तेल का हिस्सा लगभग 83 प्रतिशत था, जिसका मूल्य 4.8 अरब यूरो था. वहीं, तेल उत्पादों और कोयले का आयात क्रमशः 550 मिलियन यूरो और 429 मिलियन यूरो रहा. सीआरईए ने कहा, “भारत के कुल कच्चे तेल आयात की मात्रा में मई में महीने-दर-महीने 8% की बढ़त दर्ज की गई. इसका आंशिक कारण रूस के आयात में महीने-दर-महीने 21 प्रतिशत की वृद्धि है.”
भारत के रिफाइनिंग हब ने बढ़ाई कच्चे तेल की खरीदारी
जानकारी के अनुसार, भारत के कुछ सबसे बड़े रिफाइनिंग हब में रूसी कच्चे तेल का आयात में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है. गुजरात के वडीनार रिफाइनरी में उतारे गए कच्चे तेल की मात्रा अप्रैल के स्तर से 36 प्रतिशत बढ़ गई, जबकि राज्य के जामनगर रिफाइनिंग कॉम्प्लेक्स में आपूर्ति 14 प्रतिशत बढ़ गई.
सीआरईए के अनुसार, सरकारी स्वामित्व वाली रिफाइनरियों ने इस वर्ष की शुरुआत में आयात फिर से शुरू करने के बाद खरीदारी भी बढ़ा दी. न्यू मैंगलोर और विशाखापत्तनम रिफाइनरियों ने, जिन्होंने नवंबर 2025 के अंत में रूसी कच्चे तेल का आयात रोक दिया था, मार्च में खरीदारी फिर से शुरू करने के बाद रूसी तेल खरीदना जारी रखा.
रिपोर्ट में कहा गया है कि मई में न्यू मैंगलोर को रूसी कच्चे तेल की आपूर्ति में महीने-दर-महीने 13 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि विशाखापत्तनम में आयात में 42 प्रतिशत की वृद्धि हुई.
प्रतिबंध लगाने वाले देशों को भी तेल उत्पादों का निर्यात
सीआरईए ने कहा कि 21 जनवरी 2026 को रूसी कच्चे तेल से बने तेल उत्पादों के आयात पर यूरोपीय संघ द्वारा प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद, मई में रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों से तेल उत्पादों की 10 खेप यूरोपीय संघ के बंदरगाहों पर उतारी गईं. रिपोर्ट में कहा गया, “भारत, तुर्की, ब्रुनेई और जॉर्जिया में रूसी कच्चे तेल का उपयोग करने वाली रिफाइनरियों ने मई 2026 में प्रतिबंध लगाने वाले देशों को 641 मिलियन यूरो मूल्य के तेल उत्पादों का निर्यात किया. “
इसमें आगे कहा गया, “आयातकों में यूरोपीय संघ (174 मिलियन यूरो), ऑस्ट्रेलिया (275 मिलियन यूरो), अमेरिका (147 मिलियन यूरो) और न्यूजीलैंड (45 मिलियन यूरो) शामिल थे. अनुमान है कि इन उत्पादों में से 214 मिलियन यूरो मूल्य के उत्पाद रूसी कच्चे तेल से रिफाइंड किए गए थे.”
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