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नालंदा से सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश,

by Live India
नालंदा से सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश,

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NEET- 2026: बिहार में NEET 2026 परीक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बिहार में आयोजित NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है.

12 मई 2026

नीट- 2026: बिहार में NEET 2026 परीक्षा को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है. नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने बिहार में आयोजित NEET 2026 परीक्षा को रद्द कर दिया है. केंद्र सरकार की मंजूरी के बाद यह फैसला लिया गया. NTA ने कहा है कि परीक्षा की नई तारीखों की घोषणा जल्द की जाएगी. इसी बीच नालंदा जिले से एक संगठित सॉल्वर गैंग का पर्दाफाश होने से पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है. नालंदा पुलिस ने NEET परीक्षा में फर्जीवाड़ा करने वाले सात लोगों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तार आरोपियों में एक MBBS सेकेंड ईयर का छात्र भी शामिल है.

मुख्य आरोपी विम्स मेडिकल कॉलेज का छात्र

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कराने के नाम पर प्रत्येक अभ्यर्थी से 50 से 60 लाख रुपये तक की डील करता था. गिरोह असली परीक्षार्थी की जगह सॉल्वर को परीक्षा में बैठाने की तैयारी में था. मामले का खुलासा उस समय हुआ जब पावापुरी थाना पुलिस वाहन जांच अभियान चला रही थी. इसी दौरान दो लग्जरी गाड़ियां स्कॉर्पियो और ब्रेजा संदिग्ध अवस्था में पकड़ी गईं. तलाशी लेने पर पुलिस ने तीन युवकों को हिरासत में लिया. पूछताछ के दौरान पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ. गिरफ्तार मुख्य आरोपी की पहचान अवधेश कुमार के रूप में हुई है, जो विम्स मेडिकल कॉलेज का MBBS सेकेंड ईयर का छात्र बताया जा रहा है. पुलिस ने जब उसका मोबाइल फोन खंगाला तो उसमें कई अहम जानकारी और चैट मिले, जिसके आधार पर गिरोह के अन्य सदस्यों तक पुलिस पहुंच सकी.

गिरोह का मास्टरमाइंड फरार

राजगीर के डीएसपी सुनील कुमार सिंह ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में अवधेश कुमार के अलावा मोतिहारी निवासी अमन कुमार सिंह और मुजफ्फरपुर निवासी पंकज कुमार साह शामिल हैं. पूछताछ में यह भी सामने आया कि गिरोह का मास्टरमाइंड उज्जवल उर्फ राजा बाबू है, जो पावापुरी मेडिकल कॉलेज के 2022 बैच का छात्र है. फिलहाल वह फरार है और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है.

पुलिस कर रही पूरे नेटवर्क की जांच

पुलिस के अनुसार, गिरोह पहले अभ्यर्थियों से डेढ़ से दो लाख रुपये एडवांस के रूप में लेता था. इसके बाद परीक्षा में सॉल्वर बैठाने और सीट सुनिश्चित कराने के नाम पर मोटी रकम वसूली जाती थी. गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और इसके तार बिहार के कई जिलों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है. इस खुलासे के बाद शिक्षा व्यवस्था और प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता पर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं. पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क के आर्थिक लेन-देन, अन्य सहयोगियों और संभावित अभ्यर्थियों की भी जांच कर रही है.

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