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West Bengal Elections:पश्चिम बंगाल के चुनाव में भाजपा कई रणनीति पर काम कर रही है. इनमें से सबसे प्रभावशाली साबित हो रही है ‘खूंटा गाड़ प्लान’ और रात्रि विश्राम की रणनीति.
पश्चिम बंगाल चुनाव: पश्चिम बंगाल के चुनाव में भाजपा कई रणनीति पर काम कर रही है. इनमें से सबसे प्रभावशाली साबित हो रही है ‘खूंटा गाड़ प्लान’ और रात्रि विश्राम की रणनीति. पश्चिम बंगाल के चुनाव में बीजेपी साम, दाम, दंड और भेद तमाम तरह की राजनीति अख्तियार कर रही है. मिशन है 180 प्लस सीट पाना. इसके तहत भाजपा का सबसे प्रमुख प्लान जो कारगर साबित हो रहा है वो है अमित शाह का बंगाल में ‘खूंटा गाड़ प्लान’. यह रणनीति बीजेपी के चुनावी अभियानों में बेहद प्रभावी मानी जाती रही है. इसी मॉडल की बदौलत अमित शाह ने 2014 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में ऐतिहासिक सफलता हासिल की थी. तो अब भाजपा इसी फार्मूले को पश्चिम बंगाल में लागू कर सत्ता परिवर्तन करने की फिराक में है.
देर रात तक बैठकें कर रहे शाह
भाजपा के चाणक्य कहे जाने वाले अमित शाह बंगाल चुनाव को लेकर पूरी तरह एक्टिव मोड में हैं. देर रात तक शाह अलग-अलग क्षेत्रों में बैठकें ले रहे हैं. इन बैठकों में अलग-अलग पार्टी के कार्यकर्ताओं से मिलकर हर दिन की जानकारी ले रहे हैं. कोशिश है कि लोगों में भाजपा के प्रंति विश्वास दिलाना और भय के माहौल को खत्म करना. इस रणनीति के तहत पार्टी के कार्यकर्ता हर रोज़ पार्टी के नेताओं को अलग अलग क्षेत्रों में रह रहे या एक्टिव असमाजिक तत्त्वों की जानकारी देते हैं जो चुनाव में माहौल खराब कर सकते हैं. पार्टी नेताओं के फीड बैक के आधार पर चुनाव आयोग और प्रशासन आगे की कारवाई करती है.
पार्टी का 180+ का मिशन
गौरतलब है कि खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भवानीपुर में ऐलान किया था कि वे पूरे 15 दिन बंगाल में कैंप करेंगे. इस रणनीति के तहत केंद्रीय गृह मंत्री 28 अप्रैल तक बंगाल में टिकने वाले हैं. इसी बूथ स्तर की रणनीति से भाजपा जीत दर्ज करने का सपना देख रही है. अब बंगाल में भी यही तरीका अपनाकर पार्टी 180 सीटों का सपना देख रही है. यह रणनीति तृणमूल कांग्रेस के लिए बड़ी चुनौती बन गई है.
खूंटा गाड़ना क्या है ?
अब समझते हैं खूंटा गाड़ना क्या है ? दरअलस खूंटा गाड़ना’ एक प्रतीकात्मक मुहावरा है, जिसका अर्थ है कि किसी स्थान पर स्थायी रूप से डेरा डालना और वहीं से पूरे अभियान का संचालन करना. राजनीतिक संदर्भ में इसका मतलब है कि कोई शीर्ष नेता चुनावी राज्य में लगातार मौजूद रहकर जमीनी स्तर तक संगठन को मजबूत करे, कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद स्थापित करे और चुनावी रणनीति की व्यक्तिगत रूप से निगरानी करे. ऐसे में केंद्रीय नेतृत्व के निदेश पर भाजपा नेता रात्रि विश्राम भी कर रहे हैं और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के प्लान को आगे भी बढ़ा रहे है.
7 केंद्रीय मंत्री समेत 100 से ज़्यादा सांसद मौजूद
भाजपा के इस समय 7 केंद्रीय मंत्री समेत 100 से ज़्यादा सांसद विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों की कमान सभाल रहे हैं. ये नेता सीधे बूथ कार्यकर्ताओं, पन्ना प्रमुखों और जिला पदाधिकारियों से संवाद करते हैं, जिससे संगठनात्मक कमियां तुरंत दूर होती हैं. लंबे समय तक राज्य में प्रवास करने से एक तो पार्टी कार्यकर्ताओं में आत्मविश्वास का संचार होता है, दूसरी तरफ रात्रि विश्राम से जनता में दूसरी पार्टियों के द्वारा बनाए जा रहे भय का भी खात्मा होता है. अमित शाह खुद बंगाल में 15 दिनों तक डेरा डालने के मूड में हैं.
क्षेत्रों में रात्रि प्रवास कर रहे नेता
वहीं दूसरी तरफ़ भाजपा के कई केंद्रीय स्तर के नेता बिहार चुनाव के तुरंत बाद से ही बंगाल में कैंप कर रहे हैं. ये नेता विभिन्न क्षेत्रों में रात्रि प्रवास कर रहे हैं और कार्यकर्ताओं से हर रोज फीड बैक ले रहे हैं. इसके साथ ही भाजपा उन 40 सीटों पर ख़ास फोकस कर रही है जहां भाजपा कम अंतर से सीट हारी है. बंगाल में 40 ऐसी सीटें हैं जिसपर , जहां जीत का अंतर 5% से कम रहा था. टिकट वितरण या संगठनात्मक मतभेदों को दूर किय्या गया है. प्रभावशाली व्यक्तियों से संपर्क की योजना के तहत सामाजिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक वर्ग के प्रभावशाली लोगों से भी मुलाकात की गई है, जिससे पार्टी का जनाधार व्यापक हो सके.
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