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सोनम वांगचुक पत्र: शिक्षाविद् और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक अभी सफदरजंग अस्पताल में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है. नीट परीक्षा पेपर लीक मामले और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर वे बीते करीब 20 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे थे. उनके अनशन के 21वें दिन दिल्ली पुलिस उन्हें जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल लेकर चली गई. पुलिस ने बताया कि लगातार भूख हड़ताल से वांगचुक की तबीयत बिगड़ती जा रही थी, इसलिए उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है.
सोनम को इस तरीके से अस्पताल ले जाने पर जंतर-मंतर पर धरने पर बैठी कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) समेत देश के कई विपक्षी नेताओं ने आलोचना की. इस बीच सोनम वांगचुक ने अस्पताल से एक पत्र लिखा है, जिसे उन्होंने अपनी पत्नी गीतांजलि के द्वारा लोगों तक पहुंचाया है. इस पत्र को सोनम वांगचुक के आधिकारिक एक्स हैंडल पर शेयर किया गया है.
सोनम का संदेश:
20 जुलाई
आज़ादी का दूसरा आन्दोलन
भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारतअन्याय से मुक्ति (पेपर लीक की तरह)
भय से मुक्ति (मेरी अवैध हिरासत)भारत का दूसरा स्वतंत्रता आंदोलन
संसद तक मार्च
कृपया इसे बड़ी सफलता बनायेंके माध्यम से भेजा गया… pic.twitter.com/XYeUXgUxJH
– सोनम वांगचुक (@वांगचुक66) 19 जुलाई, 2026
20 जुलाई को शांतिपूर्वक संसद मार्च
बता दें कि सोनम वांगचुक ने बीते दिनों 20 जुलाई को शांतिपूर्वक संसद मार्च का ऐलान किया था. इसी दिन से संसद में मानसून सत्र की भी शुरुआत हो रही है. लेकिन, 20 जुलाई से पहले ही वांगचुक को पुलिस जंतर-मंतर से उठाकर अस्पताल लेते गई. अब वांगचुक ने इस शांतिपूर्ण संसद मार्च के लिए अस्पताल से ही पत्र लिखा है और उन्होंने इसे आजादी का दूसरा आंदोलन बताया है.
मालूम हो कि यह मार्च सोनम वांगचुक और सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में होने वाला था, लेकिन अभी वांगचुक अस्पताल में हैं, तो वे इस मार्च में शामिल नहीं हो सकते है. वहीं, इससे पहले उन्होंने एक पत्र लिखकर अपनी बात कही है.
आजादी का दूसरा आंदोलन- वांगचुक
वांगचुक ने पत्र में लिखा, “20 जुलाई, आजादी का दूसरा आंदोलन. भय मुक्त भारत, अन्याय मुक्त भारत.” उन्होंने आगे कहा, “अन्याय से आजादी (जैसे पेपर लीक). डर से आजादी (मेरी गैर-कानूनी हिरासत).” उन्होंने अपने समर्थकों और इस मार्च को समर्थन दे रहे लोगों ने कहा, ” भारत का दूसरा आजादी का आंदोलन. संसद तक मार्च…कृपया इसे बड़ी कामयाबी बनाएं.”
वांगचुक ने इस पत्र ने नीचले हिस्से में बताया, “सफदरजंग में मेरी गैर-कानूनी हिरासत के दौरान गीतांजलि के जरिए भेजा गया.”
मेरा सफदरजंग सरकारी अस्पताल से भरोसा उठ गया है.
अस्पताल ने हमें बताया कि @वांगचुक66 का पोटेशियम घटकर 2.9 हो गया है, इसे चिंताजनक और जीवन के लिए खतरा बताया। फिर भी, अपने सार्वजनिक स्वास्थ्य बुलेटिन में, इसने वास्तविक संख्या को आसानी से छोड़ दिया, केवल “घटती हुई …” का जिक्र किया।– गीतांजलि जे एंग्मो (@GitanjaliAngmo) 19 जुलाई, 2026
अस्पताल में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी – गीतांजलि
वहीं, सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि ने कहा है कि उन्हें सफदरजंग सरकारी अस्पताल पर भरोसा नहीं है. उन्होंने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर कहा, “मेरा सफदरजंग सरकारी अस्पताल से भरोसा उठ गया है.अस्पताल ने हमें बताया कि @Wangchuk66 (वांगचुक) का पोटैशियम लेवल गिरकर 2.9 हो गया है, जिसे उन्होंने चिंताजनक और जानलेवा बताया.”
उन्होंने आगे कहा, ” फिर भी, अपने पब्लिक हेल्थ बुलेटिन में उन्होंने जान-बूझकर असली आंकड़ा नहीं बताया और सिर्फ “पोटैशियम लेवल कम होने” की बात कही. जब 10 घंटे और बार-बार कहने के बाद उन्होंने हमें रात 10:30 बजे उनके खून के सैंपल लेने की इजाजत दी, तो एक स्वतंत्र लैब टेस्ट में लेवल 3.5 आया, जो नॉर्मल रेंज में था.”
गीतांजलि ने बताया, “बार-बार कहने के बावजूद, अस्पताल ने उन्हें डिस्चार्ज करने या हमारी पसंद के प्राइवेट अस्पताल में शिफ्ट करने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. हमारे फ्लोर पर लगभग 30 पुलिसकर्मी और पूरे अस्पताल में 100 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात हैं, जिससे हमारी आवाजाही पर बहुत ज्यादा रोक लगी हुई है. यह मेडिकल केयर नहीं है. यह गैर-कानूनी हिरासत है.”
अगर सोनम को कुछ भी होता है- गीतांजलि
गीतांजलि ने अपनी पोस्ट में कहा, “अगर सोनम को कुछ भी होता है, तो अस्पताल प्रशासन और सरकार को पूरी जिम्मेदारी लेनी होगी. इसलिए मैंने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आज ही अर्जेंट सुनवाई की मांग की है, ताकि सोनम की सेहत और बिगड़ने से पहले उन्हें कहीं और शिफ्ट करने की इजाजत मिल सके.” गीतांजलि ने कहा, “किसी भी परिवार को सिर्फ इसलिए सिस्टम से नहीं लड़ना पड़ना चाहिए कि वे तय कर सकें कि उनके अपने का इलाज कहां हो.”
‘अगर सोनम को कुछ हुआ…’, पत्नी को सफदरजंग अस्पताल पर भरोसा नहीं; दिल्ली HC का किया रुख
