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80 से अधिक मौत, ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित

by Live India
Ebola Virus

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Ebola Virus: WHO के अनुसार, इबोला के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं और इनमें बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं. इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते और गुर्दे और यकृत के कार्य में गड़बड़ी के लक्षण दिखाई देते हैं.

17 मई 2026

इबोला वायरस: युगांडा और कांगो में इबोला वायरस का प्रकोप जारी है. इस खतरनाक वायरस से अभी तक 80 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 300 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं. वायरस से बढ़ते खतरे को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी का ऐलान किया है. इस घोषणा का उद्देश्य डोनर एजेंसियों और देशों को कार्रवाई करने के लिए प्रेरित करना है.

न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस (Tedros Adhanom Ghebreyesus) ने आज रविवार को कांगो और युगांडा में इबोला रोग के प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया, जिसमें 300 से अधिक संदिग्ध मामले और 88 मौतें दर्ज की गई हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर एक पोस्ट करके कहा कि यह प्रकोप कोविड-19 महामारी जैसी महामारी आपातकाल की परिभाषा को पूरा नहीं करता है और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं को बंद करने के खिलाफ सलाह दी.

इबोला अत्यधिक फैलने वाला वायरस- हेल्थ ऑफिसर्स

इबोला अत्यधिक फैलने वाला वायरस है. यह उल्टी, खून या वीर्य जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के माध्यम से फैल सकता है. इससे होने वाली बीमारी दुर्लभ है, लेकिन गंभीर और अक्सर जानलेवा होती है. स्वास्थ्य अधिकारियों ने पुष्टि की है कि मौजूदा प्रकोप बुंडीबुग्यो वायरस के कारण हुआ है, जो इबोला रोग का एक दुर्लभ प्रकार है और जिसके लिए अभी तक कोई स्वीकृत इलाज या टीका (वैक्सीन) उपलब्ध नहीं है. हालांकि, कांगो और युगांडा में इबोला के 20 से अधिक प्रकोप हो चुके हैं, लेकिन बुंडीबुग्यो वायरस की रिपोर्ट केवल तीसरी बार सामने आई है.

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा कि कांगो में दो मामलों को छोड़कर बाकी सभी मामले दर्ज किए गए हैं और वे दोनों मामले पड़ोसी देश युगांडा में सामने आए हैं. शुक्रवार को अधिकारियों ने सबसे पहले युगांडा और दक्षिण सूडान के निकट स्थित कांगो के पूर्वी प्रांत इटुरी में इस बीमारी के फैलने की सूचना दी. शनिवार को अफ्रीका रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र द्वारा 336 संदिग्ध मामले और 87 मौतें दर्ज की गईं.

WHO के महानिदेशक डॉ. टेड्रोस ने कहा, “इस घटना से जुड़े संक्रमित व्यक्तियों की वास्तविक संख्या और भौगोलिक प्रसार के बारे में फिलहाल काफी अनिश्चितताएं हैं. इसके अलावा, ज्ञात या संदिग्ध मामलों के साथ महामारी विज्ञान संबंधी संबंधों की भी सीमित समझ है.”

युगांडा में पहली बार आया बुंडीबुग्यो वायरस

बता दें कि बुंडीबुग्यो वायरस का पहली बार पता युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में 2007-2008 के प्रकोप के दौरान चला था. तब इसकी वजह से 149 लोग संक्रमित हुए थे और 37 लोगों की जान चली गई थी. दूसरी बार इसका प्रकोप 2012 में कांगो के इसिरो में हुआ, जहां 57 मामले और 29 मौतें दर्ज की गईं थी.

इबोला के लक्षण, इलाज और रोकथाम

WHO की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, इबोला मनुष्यों और अन्य प्राइमेट्स को प्रभावित करने वाली एक गंभीर और अकसर घातक बीमारी है. यह वायरस जंगली जानवरों (जैसे फल खाने वाले चमगादड़, साही और गैर-मानव प्राइमेट) से मनुष्यों में फैलता है और फिर संक्रमित लोगों के रक्त, स्राव, अंगों या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क के माध्यम से और इन तरल पदार्थों से दूषित सतहों और सामग्रियों (जैसे बिस्तर, कपड़े) के संपर्क के माध्यम से मानव आबादी में फैलता है. इबोला से मृत्यु दर औसतन लगभग 50% है. पिछले प्रकोपों ​​में मृत्यु दर 25 से 90% तक रही है.

इबोला वायरस का प्रकोप पश्चिम अफ्रीका में 2014-2016 के दौरान देखा गया था. यह 1976 में वायरस की पहली बार खोज के बाद से सबसे बड़ा और सबसे जटिल प्रकोप था. इस प्रकोप में अन्य सभी प्रकोपों ​​की तुलना में कहीं अधिक मामले और मौतें हुईं.

WHO के अनुसार, इबोला के लक्षण अचानक प्रकट हो सकते हैं और इनमें बुखार, थकान, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द और गले में खराश शामिल हैं. इसके बाद उल्टी, दस्त, पेट दर्द, त्वचा पर चकत्ते और गुर्दे और यकृत के कार्य में गड़बड़ी के लक्षण दिखाई देते हैं. कम मामलों में, आंतरिक और बाहरी रक्तस्राव (जैसे मसूड़ों से रिसाव, मल में खून आना) हो सकता है.

इबोला वायरस के लिए, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) मोनोक्लोनल एंटीबॉडी mAb114 (ansuvimabTM) या REGN-EB3 (InmazebTM) से इलाज की सलाह देता है. इबोला वायरस के लिए दो टीकों को मंजूरी दी गई है: Ervebo® और Zabdeno and Mvabea®. प्रकोप से निपटने के लिए एर्वेबो टीके की सिफारिश की जाती है.

समाचार स्रोत: पीटीआई

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