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मुश्किल में व्यापारी, बाजार में माल की किल्लत

by Live India
काम बंद होने से रोजी-रोटी का संकट, दिल्ली से घर लौटने को मजबूर हुए लाखों श्रमिक

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LPG Crisis: दिल्ली में LPG संकट के कारण कई फैक्ट्रियों के बंद होने से मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया है. जिससे श्रमिक पलायन करने को मजबूर हो गए हैं.

  • दिल्ली से प्रशांत त्रिपाठी की रिपोर्ट

26 मार्च 2026

एलपीजी संकट: दिल्ली में LPG संकट के कारण कई फैक्ट्रियों के बंद होने से मजदूरों को काम मिलना बंद हो गया है. जिससे श्रमिक पलायन करने को मजबूर हो गए हैं. कामगारों की कमी से व्यापारियों को काफी दिक्कतें हो रही हैं. एशिया के सबसे बड़े मार्केट में सदर बाजार की गिनती होती है. सदर बाजार से खिलौने, घरेलू उत्पाद, क्राकरी के बर्तन सहित तमाम प्रोडक्ट विदेशों में भी भेजे जाते हैं. इजरायल अमेरिका का ईरान के साथ युद्ध के बाद से एलपीजी गैस की समस्या सर्वविदित है. गैस सिलेंडर नहीं मिलने की वजह से कई छोटी-छोटी फैक्ट्रियों के माल, जो सदर बाजार में आकर बिकते हैं और यहीं से विदेश भेजे जाते हैं उनका उत्पादन ठप होने के कगार पर पहुंच गया है. अब ऐसे में उत्पादन नहीं होने से मजदूरों को काम भी मिलना बंद हो गया है. ऊपर से 300 से 400 रुपए प्रति किलो के हिसाब से गैस सिलेंडर खरीद पाना उनके लिए संभव नहीं है.

सदर बाजार में श्रमिकों की कमी

गैस नहीं मिलने से इनके सामने भोजन की समस्या आ गई है. जिससे मजदूरों को सदर बाजार छोड़कर अपने पैतृक निवास जाना आसान विकल्प दिख रहा है. ऐसे में दिल्ली के सदर बाजार से मजदूरों का पलायन जारी है. मजदूरों के पलायन की वजह से व्यापारियों को भी दिक्कतें आने लगी हैं. हालत यह है कि व्यापारियों को मजदूर काम करने के लिए मिल ही नहीं रहे हैं और जो मिल रहे हैं वह एलपीजी गैस का हवाला देकर ज्यादा पैसे मांग रहे हैं. ऐसे में मजदूरों के साथ-साथ व्यापारियों को भी एलपीजी गैस की वजह से दिक्कत आने लगी है. सदर बाजार के अध्यक्ष परमजीत सिंह पम्मा का कहना है कि पहले जो मजदूर माल की ढुलाई 300 से 400 रुपए में करता था अब वह 600 रुपए मांग रहा है. जिससे ढुलाई का खर्चा बढ़ गया है. ऐसे में खरीदार तक पहुंचने में लागत काफी बढ़ जा रही है.

सदर बाजार पर छाया संकट

सदर बाजार और आसपास के क्षेत्रों में छोटे ढाबों, होटलों और घरेलू रसोई पर निर्भर प्रवासी मजदूर काम और गैस सिलेंडर न मिलने की वजह से घर लौटने को मजबूर हैं. इधर व्यापारियों की मानें तो लॉकडाउन जैसे हालात बन चुके हैं. बहुत सारे मजदूरों के साथी चले गए हैं हालांकि कुछ मजदूर जो बचे हैं वह अपनी समस्याएं खुलकर बता भी रहे हैं. गैस की कमी के कारण कामकाज रुक गया है, जिससे कई मजदूर ‘लापता’ हो गए हैं यानी अपना काम छोड़कर गांव लौट रहे हैं. मजदूरों के सामने “खाली पेट-खाली हाथ” की स्थिति बन गई है. मजदूरों का कहना है कि जो खाना ठेले और ढाबे पर 50 रुपए में मिलता था अब 120 रुपए में मिलने लगा है. ऐसे में इतनी मजदूरी नहीं होती है कि जीवन यापन कर सकें. आपको बता दें कि 2019 में कोरोना की वजह से सदर बाजार के मजदूर पलायन करने को मजबूर हुए थे, लेकिन वर्तमान स्थिति (2026) का मुख्य कारण एलपीजी संकट है.

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