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जानें मोहिनी अवतार की कथा

by Live India
जानें मोहिनी अवतार की कथा

Mohini Ekadashi Katha: मोहिनी अवतार की कथा बहुत ही अद्भुत है. भगवान विष्णु ने संसार के कल्याण के लिए मोहिनी अवतार लिया था. जानें क्या है कथा और कब है मोहिनी एकादशी.

16 अप्रैल, 2026

एकादशी का हिंदू धर्म में बहुत महत्व है. हर महीने में दो एकादशी आती है- एक शुक्ल पक्ष की और एक कृष्ण पक्ष की. यानी कुल मिलाकर साल में 24 एकादशी आती है. एकादशी के दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से पापों से मुक्ति मिलती है. हर एकादशी का अलह महत्व होता है. इसी तरह वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी कहा जाता है. मोहिनी एकादशी भगवान विष्णु के मोहिनी अवतार से जुड़ी है. मोहिनी अवतार की कथा भी बहुत अद्भुत है. चलिए जानते हैं कि मोहिनी एकादशी कब है, इसका शुभ मुहूर्त कौन सा है और इसकी कथा क्या है.

मोहिनी एकादशी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, जब देवताओं और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया था, तब समुद्र से अमृत का दिव्य कलश निकला था. देवताओं और असुरों में अमृत को लेकर विवाद होने लगा. भगवान विष्णु जानते थे कि यदि असुरों ने अमृत पी लिया तो वे संसार में त्राहिमाम मचा देंगे. भगवान विष्णु ने असुरों के छल करने के लिए मोहिनी अवतार यानी बहुत ही सुंदरी स्त्री का रूप धारण कर लिया. उनकी आभा ऐसी थी कि असुर उन्हें देखकर मंत्रमुग्ध हो गए. मोहिनी ने चतुराई से असुरों से अमृत छीन लिया और सारा अमृत देवताओं को पिला दिया.

कब है मोहिनी एकादशी

साल 2026 में वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 26 अप्रैल शाम 6:06 बजे से शुरू होकर 27 अप्रैल को शाम 6:15 बजे खत्म होगी. उदया तिथि के अनुसार 27 अप्रैल को मोहिनी एकादशी का व्रत रखा जाएगा.

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:12 बजे से 04:55 बजे तक
अमृत काल (पूजा के लिए श्रेष्ठ): दोपहर 02:41 बजे से 04:20 बजे तक
अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:49 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:28 बजे से 03:21 बजे तक

मोहिनी एकादशी पूजा विधि

सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठें और अपने घर की सफाई करें. इसके बाद, नहाने के पानी में कुछ तिल डालकर नहा लें. पूजा की जगह पर पीला कपड़ा बिछाएं. अब उस पर भगवान विष्णु की मूर्ति रखें. भगवान हरि को पीला चंदन, साबुत चावल, पीले फूल और तुलसी के पत्ते चढ़ाएं. इसके बाद, भगवान को पंचामृत और पीली मिठाई का भोग लगाएं. मोहिनी एकादशी व्रत कथा पढ़ें. पूजा के आखिर में, घी के दीपक से भगवान की आरती करें. इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, धन और वस्त्र दान करने से पुण्य मिलता है.

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