6
अमेरिका-इजरायल ईरान युद्ध: पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भारत सहित दुनिया के कई देशों को काफी प्रभावित किया है. ईरान और अमेरिका के बीच इस तनातनी ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को करीब ढाई महीनों से बाधित कर दिया है. इन दोनों देशों के बीच जारी इस तनाव के केंद्र में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज ही है. यह पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है. इसकी वजह यह है कि इस समुद्री रास्ते से विश्व की करीब 20 फीसदी एनर्जी सेक्टर की चीजों जैसे तेल, गैस आदि की सप्लाई की जाती है. ईरान और अमेरिका के बीच जारी युद्ध और तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बाधित हो गया है. ईरान ने इस रास्ते को बंद कर दिया है और यहां से जाने की कोशिश करने वाले जहाजों पर हमला भी कर रहा है. इस वजह से समुद्री मार्ग पर जहाजों का ट्रैफिग लगा हुआ है और एनर्जी सप्लाई चैन बाधित हो चुका है. वहीं, इसके जवाब में अमेरिका ने ईरान के सभी बंदरगाहों पर नाकेबंदी कर दी और ईरान से होर्मुज को खोलने की बात कहने लगा.
हालांकि, अमेरिका और ईरान के बीच जारी इस तनाव को खत्म करने की घड़ी अब बहुत नजदीक आ गई है. इसकी जानकारी खुद अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने दी है. उन्होंने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा,”… डील के आखिरी पहलुओं और डिटेल्स पर अभी बात हो रही है, और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी. एग्रीमेंट के कई दूसरे एलिमेंट्स के अलावा, होर्मुज स्ट्रेट को भी खोला जाएगा.”
बता दें कि बीते 28 फरवरी 2026 को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला बोल दिया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली हुसैनी खामनेई की मौत हो गई थी. अपने सुप्रीम लीडर की मौत से बौखलाए ईरान ने इजरायल सहित दुनिया के कई देशों में बनाए गए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया. उसने मिसाइल और ड्रोन की मदद से यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान समेत अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला किया. इसके बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध शुरू हो गया. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच इस जंग में ऑपरेशन एपिक फ्यूरी से लेकर ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस तक चलाया गया. इन्होंने दोनों पक्षों पर ताबड़तोड़ हमला कर काफी तबाही मचाई. आइए जानते हैं कि अमेरिका, इजरायल और ईरान ने अपने बीच जारी संघर्ष और युद्ध में कौन-कौन से ऑपरेशन लॉन्च किए. इसकी शुरुआत हम ईरान पर अमेरिकी-इजरायली हमले के साथ करेंगे…
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
ईरान पर हमले के लिए अमेरिका ने 28 फरवरी 2026 को ऑपरेशन एपिक फ्यूरी की शुरुआत की थी. इसके जरिए यूएस ने ईरान के कई ठिकानों पर हमले किए, जिसमें मिसाइल निर्माण, परमाणु ठिकाना और कई सैन्य ठिकाने शामिल थे. इस ऑपरेशन को अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप की देखरेख में शुरू किया गया था. हालांकि, ईरान पर काफी हमलों के बाद इसे 5 मई को खत्म कर देने की घोषणा कर दी गई थी. अमेरिका ने यह कहते हुए ऑपरेशन को बंद करने का फैसला किया था कि उसने अपने सभी टारगेट को प्राप्त कर लिया है. इस ऑपरेशन के बाद एक रिपोर्ट के जरिए यह खुलासा हुआ कि इसमें अमेरिका को काफी नुकसान हुआ.
जी हां, न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, अमेरिका में एक आधिकारिक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान को निशाना बनाकर 28 फरवरी को शुरू किए गए ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के दौरान लड़ाकू विमानों और ड्रोनों सहित कम से कम 42 अमेरिकी विमान नष्ट हो गए या क्षतिग्रस्त हो गए. बीते दिनों Congressional Research Service (CRS) की एक रिपोर्ट में कहा गया कि क्लासिफिकेशन, चल रही युद्ध गतिविधि और आरोपण (attribution) सहित कई वजहों से क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए विमानों की संख्या में संशोधन हो सकता है. मतलब कि इनकी संख्या घट या बढ़ सकती है.
विमानों के नुकसान और क्षति में चार एफ-15ई स्ट्राइक ईगल लड़ाकू जेट, एक एफ-35ए लाइटनिंग II लड़ाकू विमान, एक ए-10 थंडरबोल्ट II ग्राउंड अटैक एयरक्राफ्ट, सात केसी-135 स्ट्रैटोटैंकर हवाई ईंधन भरने वाले विमान, एक ई-3 सेंट्री एडब्ल्यूएसीएस विमान, दो एमसी-130जे कमांडो II स्पेशल ऑपरेशन एयरक्राफ्ट, एक एचएच-60डब्ल्यू जॉली ग्रीन II हेलीकॉप्टर, 24 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन और एक एमक्यू-4सी ट्राइटन ड्रोन शामिल हैं.
कभी जहर देने का प्रयास, तो कभी मारी गोली; डोनाल्ड ट्रंप पर 8 से ज्यादा बार हुई हमले की कोशिश, हर बार ऐसे बचे
इजरायल का ऑपरेशन लायंस रोअर
28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूस से ईरान पर हमला किया था. उस अटैक को अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के जरिए अंजाम दिया था, वहीं इजरायल ने उसे ऑपरेशन लायंस रोअर का नाम दिया था. इजरायल के द्वारा जारी किए गए इस सैन्य अभियान का मुख्य उद्देश्य ईरान के परमाणु प्रोग्राम को तबाह करना था. इसके साथ ही ईरान की मिसाइल क्षमताओं को कम व खत्म करना और वहां की सरकार के खतरों का मुंहतोड़ जवाब देना था. रिपोर्ट के अनुसार, इस ऑपरेशन का नाम खुद इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने तय किया था. इसके जरिए ईरान पर कई हवाई और मिसाइल हमले किए गए थे.
ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम
अमेरिका ने ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के बाद ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम चलाया. यूएसए ने इसे स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज में चलाया. इसका मुख्य उद्देश्य स्ट्रेट ऑफ होमुर्ज से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों को ईरान के हमलों से बचाना था. इसे 2 से 4 मई के बीच लॉन्च किया गया था, लेकिन सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने एयरबेस और एयरस्पेस का इस्तेमाल करने से मना कर दिया. उसके बाद अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने प्रोजेक्ट फ्रीडम को रोक दिया था.
हालांकि, होमुर्ज में सबकुछ ठीक नहीं हुआ तो अमेरिका प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस भी शुरू कर सकता है. प्रेसिडेंट ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि यदि वह शांति समझौता और परमाणु डील नहीं करता है तो स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अपने पहले के ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम को और अधिक तेज व आक्रामक कर दिया जाएगा और उसका नाम ऑपरेशन प्रोजेक्ट फ्रीडम प्लस होगा.
पाकिस्तान में ट्रेन में भीषण विस्फोट, 23 की मौत, 70 घायल, बलूच लिबरेशन आर्मी ने ली जिम्मेदारी
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस की 4 सीरीज
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस की बात करें तो यह ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के द्वारा चलाया जाने वाला एक सैन्य अभियान की पूरी सीरीज है. इसकी शुरुआत साल 2024 में की गई थी. विभिन्न रिपोर्ट्स के मुताबिक, सीरिया में ईरानी राजनयिक परिसर पर हमला हुआ था. इसका जवाब देने के लिए तब ईरान ने ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के जरिए इजरायल पर 250 से 300 तक ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया था. ईरान के द्वारा इसे अप्रैल के मीड में साल 2024 में इजरायल के खिलाफ लांन्च किया गया था. बताया जाता है कि सीरिया की राजधानी दमिश्क में ईरान के वाणिज्य दूतावास पर हुए हमले का IRGC ने इजरायल पर अटैक करके बदला लिया था. उसके बाद ईरान के द्वारा ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस की सीरीज शुरू कर दी गई.
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 2
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस के अभी तक कुल चार सीरीज लॉन्च हो चुकी है. ईरान के द्वारा ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 2 साल 2024 में तब लॉन्च किया गया था, जब हिजबुल्लाह चीफ हसन नसरल्लाह और हमास नेता इस्माइल हानिया की हत्या कर दी गई थी. इस ऑपरेशन के जरिए ईरान ने इजरायल पर करीब 200 से अधिक मिसाइलों के साथ हमला बोल दिया था.
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 3 की शुरुआत ईरान ने जून 2025 में की थी. जानकारी के अनुसार, ईरान के परमाणु और सैन्य ठिकानों पर एक और हमले के बाद इसकी शुरुआत इजरायल के खिलाफ की गई थी. इस ऑपरेशन के जरिए ईरान ने इजरायल के खिलाफ तेज और लंबा सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी थी.
ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4
मालूम हो कि बीते 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमला कर दिया था. इस हमले में ईरान के सुप्रीम लीडर सैयद अली हुसैनी खामनेई की मौत हो गई थी. अपने सुप्रीम लीडर की मौत से बौखलाए ईरान ने इजरायल सहित दुनिया के कई देशों में बनाए गए अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमला शुरू कर दिया. उसने मिसाइल और ड्रोन की मदद से यूएई, सऊदी अरब, बहरीन, कुवैत, ओमान समेत अन्य देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जोरदार हमला किया. ईरान ने इजरायल और अमेरिका के खिलाफ यह कार्रवाई ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4 के द्वारा की.
जल्द खत्म होगी जंग और खुलेगा स्ट्रेट होर्मुज, काफी हद तक हो चुकी बात, ट्रंप ने दिया बड़ा अपडेट
अमेरिका ने ईरान पर क्यों किया था अटैक?
अमेरिका और इजरायल यह कभी नहीं चाहते हैं कि ईरान के पास अपना परमाणु हथियार हो. ईरान कई सशस्त्र समूहों और संगठनों का सहयोग करता है, जो अमेरिका और इजरायल समेत दुनिया के कई देशों के लिए आतंकी संगठन हैं. इनमें हिजबुल्लाह, हूती, हमास समेत अन्य ग्रुप हैं. अमेरिका इन्हें दुनिया के लिए खतरा बताता रहा है. अगर ईरान के पास परमाणु हथियार हो गया तो यह इजरायल, अमेरिका के साथ-साथ उसके सहयोगियों के लिए भी खतरनाक हो सकता है. अमेरिका ने ईरान को कुछ घातक मिसाइलों को भी न बनाने की सलाह दी थी, लेकिन ईरान परमाणु बम और मिसाइल बनाने की अपनी बात पर अड़ा रहा. इसके अलावा, ईरान में सत्ता परिवर्तन कराने को लेकर भी अमेरिका ने हमला किया था. अमेरिका ने ईरान में प्रदर्शनकारियों के ऊपर हमले, दमन और क्षेत्रीय अशांति को देखते हुए भी तेहरान पर अटैक किया था. वहीं, मध्य पूर्व एशिया में ईरान की बढ़ते ताकत को कम करना भी इस हमले की एक वजह बताई जा रही है.
होर्मुज स्ट्रेट को भी खोला जाएगा- ट्रंप
अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ संघर्ष को जल्द ही खत्म करने के संकेत दिए हैं. इससे पश्चिम एशिया में जारी तनाव को खत्म होने में मदद मिलेगी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से पहले की तरह खुल जाएगा. आज अमेरिकी प्रेसिडेंट ट्रंप ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर लिखा, “मैं व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हूं, जहां हमारी अभी सऊदी अरब के प्रेसिडेंट मोहम्मद बिन सलमान अल सऊद, यूनाइटेड अरब अमीरात के मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, अमीर तमीम बिन हमद बिन खलीफा अल थानी, कतर के प्राइम मिनिस्टर मोहम्मद बिन अब्दुलरहमान बिन जसीम बिन जाबेर अल थानी और मिनिस्टर अली अल-थवाडी, पाकिस्तान के फील्ड मार्शल सैयद असीम मुनीर अहमद शाह, तुर्की के प्रेसिडेंट रेसेप तैयप एर्दोगन, मिस्र के प्रेसिडेंट अब्देल फत्ताह अल-सिसी, जॉर्डन के किंग अब्दुल्ला II और बहरीन के किंग हमद बिन ईसा अल खलीफा के साथ इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और PEACE से जुड़े एक मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग से जुड़ी सभी चीजों के बारे में बहुत अच्छी बातचीत हुई.”
उन्होंने आगे कहा, “एक एग्रीमेंट पर काफी हद तक बातचीत हो चुकी है, जो यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ अमेरिका, इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान और लिस्टेड दूसरे देशों के बीच फाइनल होने पर निर्भर है. इसके अलावा, मेरी इजरायल के प्राइम मिनिस्टर बीबी नेतन्याहू से भी बात हुई, जो भी बहुत अच्छी रही. डील के आखिरी पहलुओं और डिटेल्स पर अभी बात हो रही है, और जल्द ही इसकी घोषणा की जाएगी. एग्रीमेंट के कई दूसरे एलिमेंट्स के अलावा, होर्मुज स्ट्रेट को भी खोला जाएगा.”
