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बदल रही है देश की जनसांख्यिकीय संरचना

by Live India
बदल रही है देश की जनसांख्यिकीय संरचना

जनसांख्यिकी: केंद्रीय गृह मंत्रालय ने अवैध प्रवास के कारण हो रहे जनसांख्यिकीय बदलावों पर गहरी चिंता व्यक्त की है. मंत्रालय के अनुसार, अवैध अप्रवासन का प्रभाव अब केवल सीमावर्ती क्षेत्रों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों और आदिवासी क्षेत्रों समेत अन्य सामाजिक-आर्थिक रूप से संवेदनशील इलाकों में भी फैल चुका है. इस गंभीर संकट और इससे उत्पन्न व्यापक चुनौतियों से निपटने के लिए सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नाओलेकर के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय समिति (HLCDC) का गठन किया है, जो इस बदलाव के प्रभावों की विस्तृत जांच करेगी.

आकलन के लिए समिति का गठन

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अवैध अप्रवासन और अन्य अप्राकृतिक कारणों के कारण पूरे भारत में जनसांख्यिकीय परिवर्तन का आकलन करने के लिए समिति के गठन की घोषणा की थी. नई दिल्ली में मुख्यालय वाली इस समिति में जनगणना आयुक्त के साथ-साथ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, पूर्व आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि भी सदस्य के रूप में शामिल होंगे और एक साल में अपनी रिपोर्ट सौंपेंगे.शाह ने मंगलवार को कहा था कि गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी एल) इस समिति के सदस्य सचिव के रूप में काम करेंगे.

अधिसूचना में कहा गया है कि देश के कुछ क्षेत्रों में जनसांख्यिकीय परिवर्तन देखे गए हैं, जो सामान्य प्रजनन या मृत्यु दर के रुझान के लिए जिम्मेदार नहीं हैं बल्कि अवैध अप्रवासन, अनियमित जनसंख्या गतिशीलता और प्रशासनिक ढिलाई जैसे बाहरी असामान्य कारकों के कारण उभर रहे हैं. हालांकि ये परिवर्तन सीमावर्ती जिलों में सबसे अधिक केंद्रित हैं, लेकिन उनका प्रभाव उन क्षेत्रों से आगे बढ़ गया है, जो अब शहरी केंद्रों, औद्योगिक गलियारों, आदिवासी क्षेत्रों और अन्य सामाजिक व आर्थिक रूप से संवेदनशील क्षेत्रों को प्रभावित कर रहा है, जिससे सार्वजनिक सेवा वितरण, स्थानीय प्रशासन, संसाधन वितरण और सामाजिक सामंजस्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है.

एक वर्ष के भीतर सौंपेगी अपनी रिपोर्ट

अधिसूचना में कहा गया है कि मौजूदा संस्थागत ढांचा ऐसे जनसांख्यिकीय बदलावों के समन्वित, साक्ष्य आधारित और समयबद्ध मूल्यांकन और प्रतिक्रिया के लिए पर्याप्त रूप से सुसज्जित नहीं है. इसलिए, भारत सरकार ने देश भर में होने वाले ऐसे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की प्रकृति, कारणों और परिणामों का वैज्ञानिक अध्ययन करने और उचित नीति, प्रशासनिक और कानूनी उपायों की सिफारिश करने के लिए गृह मंत्रालय के तहत जनसांख्यिकीय परिवर्तन पर एक उच्च स्तरीय समिति (एचएलसीडीसी) गठित किया है. समिति को अवैध अप्रवासन सहित जनसांख्यिकीय परिवर्तनों से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों पर व्यापक विचार करने के बाद एक वर्ष के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा गया है.

पैनल ऐसे जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के संभावित कारणों का अध्ययन करेगा, जैसे प्रजनन क्षमता में भिन्नता, सीमा पार आंदोलन (अवैध अप्रवासन सहित), आर्थिक अवसर और अन्य सामाजिक पर्यावरणीय कारक और परिवर्तनों के पीछे अंतर्निहित कारक, जिनमें अवैध अप्रवासन, असामान्य निपटान पैटर्न और नियोजित प्रवासन शामिल है. यह धार्मिक या सामाजिक समुदायों के स्तर पर संरचनात्मक जनसंख्या परिवर्तनों का विश्लेषण करेगा,

सीमा प्रबंधन की भी सिफारिश

विशेष रूप से समान प्रवृत्तियों से अलग होने वाले परिवर्तनों का और देश में पहले से ही रह रहे अवैध अप्रवासियों की कानूनी, निष्पक्ष और समयबद्ध पहचान, हिरासत और निर्वासन के लिए भी एक सुव्यवस्थित और स्थायी परिचालन प्रणाली की सिफारिश करेगा. इसमें कहा गया है कि पैनल ऐसे मामलों में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय बढ़ाने के लिए एक व्यापक नीति ढांचे का प्रस्ताव करने के अलावा ऐसे रुझानों की निरंतर निगरानी के लिए सीमा प्रबंधन, जनसंख्या स्थिरीकरण और पहचान प्रणालियों को मजबूत करने के लिए एक संस्थागत तंत्र की भी सिफारिश करेगा.

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समाचार स्रोत: पीटीआई

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