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Mohan Bhagwat: RSS प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि संघ का मुख्य मकसद राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लिए समाज को संगठित करना है. केरल के त्रिशूर में RSS के शताब्दी संपर्क कार्यक्रम के तहत एक सभा को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि संघ की स्थापना राजनीतिक सत्ता या लोकप्रियता के लिए नहीं की गई थी. उन्होंने कहा कि संघ की शुरुआत किसी समुदाय के विरोध में नहीं की गई थी. इसे एक बड़े राष्ट्रीय उद्देश्य को पूरा करने और देश के कल्याण व पुनरुत्थान के लिए ज़रूरी हर चीज़ में योगदान देने के लिए शुरू किया गया था.
संगठित और अनुशासित समाज की जरूरत
RSS की शुरुआत के बारे में बताते हुए भागवत ने कहा कि इसके संस्थापक केबी हेडगेवार ने यह निष्कर्ष निकाला था कि विदेशी ताकतों द्वारा भारत को बार-बार गुलाम बनाने का कारण समाज के भीतर की कमज़ोरियां और विभाजन थे. उनका मानना था कि स्थायी समाधान के लिए एक एकजुट, संगठित और अनुशासित समाज की ज़रूरत है.
उन्होंने कहा कि समाज को संगठित करना था. उसे मज़बूत बनाना था. तमाम विविधताओं के बावजूद लोगों को एक-दूसरे से जोड़ना था. भागवत ने कहा कि RSS की स्थापना इस सोच के साथ की गई थी कि भारत की सभ्यता और संस्कृति से जुड़ी पहचान ही राष्ट्रीय एकता का आधार है. उन्होंने कहा कि हम सभी एक जैसी सभ्यता और मूल्यों से जुड़े हैं.
संघ प्रमुख ने दुनिया को बताया परिवार
संघ का मानना है कि यही सांस्कृतिक एकता राष्ट्रीय जीवन की नींव है. हिंदुत्व के बारे में संगठन की सोच को समझाते हुए भागवत ने कहा कि यह किसी धार्मिक समुदाय के खिलाफ नहीं है. उन्होंने कहा कि इसका मतलब हिंदू बनाम मुस्लिम या ईसाई नहीं है. यह सोच इस विचार पर आधारित है कि दुनिया एक परिवार है और सभी तरह की विविधताएं मिल-जुलकर रह सकती हैं. RSS प्रमुख ने कहा कि संगठन का मुख्य काम चरित्र निर्माण और देश सेवा के लिए समर्पित लोगों को तैयार करना है. उन्होंने कहा कि संघ असल में एक ही काम करता है. वह ऐसे लोगों को तैयार करना चाहता है जो ईमानदार, निस्वार्थ, अनुशासित और समाज के प्रति समर्पित हों.
देश भर में 1.30 लाख से ज्यादा स्वयंसेवक
भागवत ने बताया कि संगठन से जुड़े स्वयंसेवक देश भर में 1.30 लाख से ज़्यादा सेवा कार्यों में लगे हुए हैं. उन्होंने कहा कि सामाजिक जीवन के लगभग हर क्षेत्र में स्वयंसेवक अलग-अलग संस्थाओं और पहलों के ज़रिए काम कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि RSS का काम ऐसे लोगों को तैयार करना है जो देश की सेवा के लिए समर्पित हों, न कि उनकी उपलब्धियों का श्रेय लेना. उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में काम करते हैं. वे जो कुछ भी हासिल करते हैं, वह उनकी अपनी उपलब्धि होती है. संघ इसके लिए श्रेय नहीं चाहता.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का उदाहरण देते हुए भागवत ने कहा कि जो स्वयंसेवक अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने गए, उन्होंने अपनी क्षमताओं और ज़िम्मेदारियों के ज़रिए योगदान दिया और RSS ने उनकी उपलब्धियों के लिए कोई पहचान या श्रेय नहीं मांगा. भागवत ने कहा कि RSS का मुख्य मकसद राजनीतिक सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि समाज को संगठित करना है.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
