Home Top News अजीत डोभाल-चीनी विदेश मंत्री की मीटिंग

अजीत डोभाल-चीनी विदेश मंत्री की मीटिंग

by Live India
अजीत डोभाल-चीनी विदेश मंत्री की मीटिंग

10

भारत चीन संबंध: भारत और चीन के रिश्ते कभी खट्टे तो कभी मित्रता वाले रहे हैं. हालांकि, बीते कई वर्षों से दोनों देशों के बीच ये रिश्ते मित्रता व एक-दूसरे के साथ देने वाले देखे गए हैं. आपने देखा होगा, जब अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 50 फीसदी का टैरिफ थोपा था तब चीन ने भारत का साथ दिया था. अब भारत और चीन के रिश्ते को और भी मजबूत बनाने के लिए दोनों देशों के बीच नई दिल्ली में एक खास और बड़ी मीटिंग हुई है.

जी हां, राजधानी नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के सुरक्षा अधिकारियों के सम्मेलन आयोजित हुआ है. इस खास मौके पर सोमवार को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच मुलाकात हुई. इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे के “मुख्य चिंता के मुद्दों” के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की आवश्यकता से अवगत कराया.

दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़ाने पर जोर- विदेश मंत्रालय

इस मुलाकात पर विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार डोभाल ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिर, पूर्वानुमानित और रचनात्मक द्विपक्षीय संबंध दोनों पक्षों के बीच विश्वास बढ़ाने और गहरी समझ विकसित करने में योगदान देंगे. उन्होंने कहा, “एनएसए ने एक-दूसरे की मुख्य चिंताओं के मुद्दों के प्रति लगातार संवेदनशीलता प्रदर्शित करने के महत्व पर भी जोर दिया.”

LAC पर पूरी स्थिति की समीक्षा

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आगे कहा कि यह आपसी संवेदनशीलता, आपसी हितों और आपसी सम्मान के हमारे समग्र दृष्टिकोण के अनुरूप होगा. बैठक में दोनों पक्षों ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर पूरी स्थिति की समीक्षा की. यह बैठक पूर्वी लद्दाख में चार साल से अधिक समय तक चले सैन्य गतिरोध के बाद दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण हो चुके संबंधों को फिर से मजबूत करने के प्रयासों के बीच हुई.

दोनों देशों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा

वहीं, इस बैठक को लेकर चीनी राजदूत जू फीहोंग ने बताया कि वांग ने बैठक में कहा कि सबसे बड़ी आबादी वाली दो अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, चीन और भारत को न केवल द्विपक्षीय संबंधों को लंबे समय के नजरिये से देखना चाहिए, बल्कि ग्लोबल नजरिये से दोनों देशों के बीच सहयोग को भी बढ़ावा देना चाहिए.

उन्होंने कहा, “दोनों पक्षों को दोनों देशों के नेताओं द्वारा हासिल की गई महत्वपूर्ण सहमति को लागू करने, सहयोग के माध्यम से अपने-अपने विकास और पुनरुद्धार को बढ़ावा देने और वैश्विक दक्षिण के आधुनिकीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए.”

चीन-भारत सीमा को उचित स्थान पर रखना अनिवार्य

जू ने सोशल मीडिया पर कहा, “एक-दूसरे के मूल हितों का सम्मान करना, संवेदनशील मुद्दों को ठीक से संभालना और चीन-भारत सीमा मुद्दे को उचित स्थान पर रखना अनिवार्य है, ताकि यह द्विपक्षीय संबंधों की समग्र स्थिति को प्रभावित न करे.” चीन ने यह भी बताया कि वह ब्रिक्स अध्यक्ष के रूप में भारत की जिम्मेदारियों को पूरा करने में उसका समर्थन करता है और ब्रिक्स तंत्र के विकास और वृद्धि को बढ़ावा देने में भारत के साथ मिलकर काम करने को तैयार है.

PM मोदी ने नौसेना को सौंपे 3 स्वदेशी युद्धपोत, कहा- हमारी क्षमता आत्मनिर्भर बनने की है, जानें इनकी खासियत

समाचार स्रोत: पीटीआई

Related Articles