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NCERT Book :NCERT ने जारी की 8वीं क्लास की नई किताब!

by Live India
NCERT Book :NCERT ने जारी की 8वीं क्लास की नई किताब!

एनसीईआरटी पुस्तक: सुप्रीम कोर्ट की तरफ दखल देने के बाद NCERT ने मंगलवार को 8वीं क्लास की नई सोशल साइंस की किताब जारी कर दी है. बदली हुई किताब में न्यायापालिका पर विवादित चैप्टर को हटा दिया गया है. इस किताब में से विवादित हिस्सों के साथ-साथ अदालतों में लंबित मामलों और दो बड़े अदालती फैसलों को हटाया गया है. साथ ही इस दौरान जनहित याचिका (PIL), ट्रिब्यूनल और विवाद सुलझाने के वैकल्पिक तरीकों के बारे में नई जानकारी को भी जोड़ दिया गया है.

इन सेक्शन को बुक में से हटाया गया

इसके अलावा पाठ्यक्रम की शुरुआत में दिए गए बड़े सवाल वाले सेक्शन में भी बदलाव किया गया है. पुरानी किताब में स्टूडेंट्स से पूछा गया था कि स्वतंत्र न्यायपालिका क्यों जरूरी है? अब इसकी जगह नई किताब में पूछा गया है कि ‘न्यायपूर्ण और सौहार्दपूर्ण समाज’ के लिए न्याय क्यों जरूरी है? साथ ही न्यायपालिका की व्यवस्था के सामने आने वाली चुनौतियों वाले सेक्शन को भी हटा दिया गया है. इस सेक्शन में बहुत ज्यादा बैकलॉग वाले केसों के बारे में बताया गया था और इसके लिए जजों की कमी, मुश्किल प्रोसेस और कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर को जिम्मेदार ठहराया गया था.

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बीआर गवई का था जिक्र

साथ ही ज्यूडिशियरी में करप्शन टाइटल वाला सेक्शन भी हट दिया गया है. इसमें भारत के पूर्व चीफ जस्टिस बीआर गवई का जिक्र था, जिन्होंने ज्यूडिशियल सिस्टम में करप्शन और गलत काम के मामलों को माना था. बता दें कि NCERT की 8वीं क्लास की सोशल साइंस की किताब में ज्यूडिशियरी में करप्शन को लेकर काफी विवाद हुआ था. सुप्रीम कोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया था और इसके बाद NCERT को चैप्टर के लिए माफी भी मांगनी पड़ी थी.

डिजिटल प्रसार पर भी लगा दी थी रोक

इसके बाद सर्वोच्च अदालत ने उस पाठ्यपुस्तक के और प्रकाशन, दोबारा छपाई या डिजिटल प्रसार पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई. कोर्ट का कहना है कि इसमें न्यायापालिका में भ्रष्टाचार के बारे में आपत्तिजनक सामग्री थी. संशोधित पाठ्यपुस्तक की भूमिका बताया गया है कि इस ‘स्वतः संज्ञान रिट याचिका (सिविल) नंबर 1/2026’ में ‘भारत के माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के पालन’ में की गई समीक्षा प्रक्रिया के बाद प्रकाशित किया गया है. वहीं, चैप्टर-4 को समाज में न्यायपालिका की भूमिका को केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा बनाई गई एक विशेषज्ञ समिति ने फिर से लिखा था. यह समिति सुप्रीम कोर्ट के 16 मार्च के आदेश के बाद बनाई गई थी.

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