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चीन की चुनौती के बीच कितना अहम दौरा?

by Live India
चीन की चुनौती के बीच कितना अहम दौरा?

पीएम मोदी का 6 दिवसीय दौरा: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 जुलाई से 6 दिनों के लिए तीन देशों की यात्रा पर हैं. इन देशों के नाम इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड है. ये तीनों देश प्रशांत क्षेत्र के लिए काफी अहम माने जाते रहे हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत में जापान की पीएम सनाए ताकाइची का स्वागत किया था. वे तीन दिनों की अपनी पहली यात्रा पर भारत आई हुईं थीं.

प्रशांत क्षेत्र में जापान को साधने के बाद अब पीएम मोदी इस क्षेत्र के लिए खास अन्य तीन देशों यानी कि इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के आधिकारिक दौरे पर हैं. पीएम मोदी की यह यात्रा देश की हिंद प्रशांत क्षेत्र को लेकर जारी कूटनीति, आर्थिक सहयोग, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता को मजबूत करने की दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है. इन तीन देशों के साथ भारत लगातार अपने संबंधों को मजबूत करने पर जोर देता रहा है. बीते शुक्रवार को विदेश मंत्रालय ने यह खास जानकारी दी.

वहीं, प्रशांत क्षेत्र में चीन की बढ़ती चुनौतियों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह तीन देशों की यात्रा काफी अहम मानी जा रही है. 6 जुलाई से पीएम मोदी की शुरू हुई इस यात्रा का पहला फेज इंडोनेशिया दौरे का है. प्रधानमंत्री मोदी इंडोनेशिया में 6 से 8 जुलाई तक हैं. आज मंगलवार को उनके इस दौरे का दूसरा दिन है. इंडोनेशिया के बाद पीएम मोदी ऑस्ट्रेलिया जाएंगे और उसके बाद वे अपनी पहली यात्रा पर न्यूजीलैंड जाएंगे.

अब आइए जानते हैं कि प्रशांत क्षेत्र में चीन की चुनौती के बीच और अन्य पहलुओं के हिसाब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ये तीन देशों की यात्रा कितनी अहम है. शुरुआत हम प्रशांत क्षेत्र में भारत के लिए चीन की चुनौतियों से करेंगे और फिर इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के पीएम मोदी के दौरे के बारे में बात करेंगे.

हिंद प्रशांत क्षेत्र और भारत

हिंद प्रशांत क्षेत्र की बात करें तो यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है. यह क्षेत्र भारत, पाकिस्तान, म्यांमार, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया, चीन समेत अफ्रीका के पूर्वी तट से लेकर पश्चिमी अमेरिकी तट तक फैला हुआ है. अब बात इसकी भारत के नजरिये से करते हैं.

हिंद प्रशांत महासागर क्षेत्र भारत के लिए काफी अहम है. भारत ने इसके लिए साल 2019 में हिंद-प्रशांत महासागर पहल (IPOI) की भी शुरुआत की थी. यह एक सहयोगी और स्वैच्छिक पहल है, जिसका मुख्य उद्देश्य सुरक्षित समुद्र और समुद्री व्यापार, आपदा प्रबंधन और पर्यावरण संरक्षण है. यह इस क्षेत्र के सभी देशों को एक साथ मिलकर काम करने के लिए प्रेरित करता है.

भारत के लिए हिंद प्रशांत क्षेत्र भू-राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से काफी खास माना जाता रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत इस क्षेत्र से करीब 95 प्रतिशत तक का व्यापार और 85 फीसदी से अधिक का एनर्जी इंपोर्ट करता रहा है. इतना ही नहीं यह क्षेत्र भारत की सुरक्षा और संप्रभुता के लिए भी बहुत ही खास है.

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प्रशांत क्षेत्र में चीन की चुनौती और भारत

बीते कुछ वर्षों से प्रशांत क्षेत्र में चीन से भारत को चुनौती मिलती रही है. इस क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए क्वाड ग्रुप का गठन किया था. इसमें भारत के अलावा जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका जैसे देश शामिल हैं.
चीन की चुनौतियों के बीच हिंद प्रशांत क्षेत्र का महत्व काफी बढ़ गया है और यह भू-राजनीतिक मायने में बहुत की अहम हो गया है.

प्रशांत क्षेत्र में चीन की चुनौती की बात करें तो यह देश रणनीतिक रूप से घेराबंदी की कोशिश कर रहा है. चीन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के जरिए प्रशांत क्षेत्र में पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यांमार के बंदरगाहों का विकास कर रहा है. भारत ने हमेशा इसका विरोध किया है. इससे यह भारत को एक तरह से मोतियों की माला (स्ट्रिंग ऑफ पर्ल्स) की तरह घेरते हुए दिख रहा है. इसके अलावा चीन प्रशांत क्षेत्र के देशों में निवेश करके भारत के लिए चुनौती बढ़ा रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि चीन इस क्षेत्र में अपना दबदबा बढ़ाने में लगा हुआ है. इसकी कोशिश है कि प्रशांत क्षेत्र एक तरह से इसके कब्जे या अधीन में आ जाए, ताकि यह भारत के अलावा अन्य देशों पर इस क्षेत्र को लेकर अपनी मनमानी कर सके.

हालांकि, चीन का यह सपना साकार होना, नामुमकिन सा लग रहा है क्योंकि इस क्षेत्र की सुरक्षा के लिए भारत के अलावा अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया समेत अन्य देश मुस्तैद खड़े हैं. इतना ही नहीं चीन यदि कोई भी अपनी मनमानी करना चाहेगा तो इसका हर तरीके से विरोध और जवाब दिया जा सकता है. वहीं, चीन की इन चुनौतियों के बीच पीएम मोदी की तीन देशों की यह यात्रा काफी अहम है.

पीएम मोदी के इंडोनेशिया दौरे में हिंद प्रशांत पर अहम डील

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई तक इंडोनेशिया के दौरे पर हैं. आज मंगलवार को उन्होंने राजधानी जकार्ता में इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो से खास मुलाकात की. इस दौरान पीएम मोदी को इंडोनेशिया के सर्वोच्च सम्मान ‘बिंगतांग आदिपूर्णा ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ पदक से सम्मानित किया गया. इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने पीएम मोदी को इस सम्मान से सम्मानित किया.

पीएम मोदी के इस दौरे के दौरान भारत और इंडोनेशिया के बीच करीब 20 समझौते हुए हैं. इनमें खनिज और इस्पात समझौता, रेयर अर्थ मिनरल्स सहयोग, ब्रह्मोस मिसाइल समझौता, अंतरिक्ष समझौता, कृषि समझौता, प्रम्बानन मंदिर संरक्षण और चुनाव आयोग समझौता जैसे और भी कई समझौते शामिल हैं.

बता दें कि इंडोनेशिया मलक्का जलडमरूमध्य की सुरक्षा और स्थिरता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है. यह क्षेत्र भारत के लिए सामुद्रिक संचार मार्गों में से एक सबसे महत्वपूर्ण है. इसकी उपयोगिता वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी काफी ज्यादा है. इस बीच भारत और इंडोनेशिया के बीच प्रशांत क्षेत्र से संबंधित भी एक समझौता हुआ है. जी हां, इस क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और बचाव कार्य को बेहतर करने के लिए दोनों देशों की नेवी की साझेदारी को और भी मजबूत करने के लिए समझौता हुआ है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि हमारे देशों के बीच बढ़ता विश्वास हमारी रक्षा, सुरक्षा और मैरीटाइम सहयोग को मजबूत कर रहा है. आज हमने डिफेंस एक्सचेंज, डिजास्टर मैनेजमेंट और इंडस्ट्रीयल सहयोग बढ़ाने पर सहमति बनाई. उन्होंने आगे कहा, “अब हम दोनों देशों के coast guards हिंद महासागर में मैरीटाइम सेफ्टी और सिक्योरिटी के लिए मिलकर काम करेंगे. दो करीबी मैरीटाइम देश होने के नाते, हमने ब्लू इकॉनमी, पोर्ट डेवलपमेंट और मैरीटाइम ट्रेड में आपसी सहयोग बढ़ाने का भी निर्णय लिया है.”

पीएम मोदी ने कहा, “वैश्विक मुद्दों पर भी भारत और इंडोनेशिया का सहयोग निरंतर बढ़ रहा है. हिंद प्रशांत के प्रति हमारे outlook में भी सिनर्जी (तालमेल)है. भारत ने हमेशा “आसियान centrality” को विशेष महत्व दिया है. वैश्विक उथल-पुथल के इस दौर में भारत का मानना है कि डायलॉग और डिप्लोमेसी की भूमिका, पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है.”

पीएम मोदी का इंडोनेशिया दौरे का शेड्यूल

प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, इंडोनेशिया गणराज्य के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 6 से 8 जुलाई, 2026 तक इंडोनेशिया की यात्रा पर हैं. यह प्रधानमंत्री की इंडोनेशिया की चौथी यात्रा है और मई 2018 में भारत-इंडोनेशिया संबंधों को व्यापक रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक उन्नत किए जाने के बाद उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा है.

इस यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ द्विपक्षीय चर्चा किए हैं और साझेदारी में हुई प्रगति की समीक्षा भी की है. जकार्ता में प्रधानमंत्री भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को संबोधित करेंगे. भारत और इंडोनेशिया के बीच ऐतिहासिक और सौहार्दपूर्ण संबंध हैं. इन विशेष संबंधों को ध्यान में रखते हुए प्रधानमंत्री इंडोनेशिया के एक प्रमुख यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल, योग्याकार्ता स्थित प्रंबानन मंदिर परिसर का भी दौरा करेंगे.

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8 से 10 जुलाई तक पीएम का ऑस्ट्रेलिया दौरा

इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी 8 से 10 जुलाई, 2026 तक ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बानीज के निमंत्रण पर मेलबर्न की यात्रा करेंगे. मेलबर्न में प्रधानमंत्री अल्बानीज के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे. वे ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर जनरल सैम मोस्टिन से भी मुलाकात करेंगे. अपनी यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री मोदी भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम में भी भाग लेंगे जहां वे दोनों देशों के शीर्ष व्यापारिक नेताओं की सभा को संबोधित करेंगे. प्रधानमंत्री भारतीय प्रवासी समुदाय की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे जो भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों का एक मजबूत स्तंभ है.

40 वर्षों में भारतीय पीएम का पहला न्यूजीलैंड दौरा

ऑस्ट्रेलिया के बाद पीएम मोदी न्यूजीलैंड के दौरे पर जाएंगे. प्रधानमंत्री कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के निमंत्रण पर प्रधानमंत्री मोदी मेलबर्न से 10-11 जुलाई, 2026 को ऑकलैंड की राजकीय यात्रा पर जाएंगे. यह चार दशकों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की न्यूजीलैंड की पहली राजकीय यात्रा होगी.

ऑकलैंड में, प्रधानमंत्री लक्सन के साथ द्विपक्षीय चर्चा करेंगे और द्विपक्षीय संबंधों के सभी पहलुओं की समीक्षा करेंगे, जिनमें पिछले दो वर्षों में विशेष रूप से व्यापार, वाणिज्य और रक्षा क्षेत्रों में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है. ऑकलैंड में प्रधानमंत्री प्रमुख व्यापार और खेल जगत की हस्तियों से भी बातचीत करेंगे. भारत और न्यूजीलैंड के बीच मजबूत जन-संबंधों को दर्शाते हुए प्रधानमंत्री इस यात्रा के दौरान भारतीय प्रवासी की एक विशाल सभा को भी संबोधित करेंगे.

प्रधानमंत्री मोदी के द्वारा प्रशांत क्षेत्र के इन 3 देशों की यात्रा को काफी अहम बताया गया है. चीन की चुनौती के बीच भी यह यात्रा खास है. जानकार बताते हैं कि पीएम मोदी की इस यात्रा पर चीन और पाकिस्तान की भी निगाहें हैं. इंडोनेशिया के साथ प्रशांत क्षेत्र में शांति और व्यापार संबंधित सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए डील हो गई है. अब बारी ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड की है. अब देखने वाली बात यह होगी कि पीएम मोदी इन दोनों देशों के साथ प्रशांत क्षेत्र को लेकर क्या कुछ चर्चा और डील करते हैं.

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