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स्वास्थ्य: भारत के युवाओं में हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) की बीमारी तेज़ी से महामारी का रूप ले रही है. नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-6) के आंकड़ों के अनुसार, देश में 15 वर्ष से अधिक उम्र के 22.1% पुरुषों और 19.4% महिलाओं का ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर पर बढ़ा हुआ है. कार्डियोलॉजिस्ट्स के मुताबिक, सुस्त जीवनशैली, मानसिक तनाव, मोटापा और दूषित खान-पान युवाओं को असमय मौत की ओर धकेल रहा है. चिंताजनक बात यह है कि इसके लक्षण तब तक सामने नहीं आते, जब तक कि मरीज हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक या किडनी फेल्योर जैसी जानलेवा बीमारियों की चपेट में न आ जाए. भारत में होने वाली कुल मौतों में सबसे बड़ा कारण दिल की बीमारियां ही हैं. भारत में हर पांचवां युवा हाई बीपी का शिकार है. डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि यदि युवा समय रहते सतर्क नहीं हुए, तो परिणाम बेहद गंभीर होंगे.
जल्द दिखाई नहीं देते हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण
NFHS-6 यानी ‘राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-6’ (National Family Health Survey) है. यह भारत सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा आयोजित एक व्यापक राष्ट्रीय सर्वेक्षण है,जिसका मुख्य उद्देश्य जनसंख्या, स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण से जुड़े सटीक आंकड़े (data) उपलब्ध कराना है. ग्रामीण इलाकों की तुलना में शहरी इलाकों में यह दर काफ़ी ज़्यादा है. विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जब तक कोई गंभीर समस्या पैदा नहीं होती, तब तक हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण शायद ही कभी दिखाई देते हैं. इंस्टीट्यूट ऑफ़ हार्ट लंग्स डिज़ीज़ेज़ रिसर्च सेंटर के चेयरमैन और AI-आधारित हेल्थकेयर टेक्नोलॉजी प्लेटफ़ॉर्म ‘iLive Connect’ के संस्थापक डॉ. राहुल चंदोला ने कहा कि ज़्यादातर युवा पूरी तरह से स्वस्थ महसूस करते हैं.
हमेशा मॉनिटर करना चाहिए बीपी
युवाओं को अक्सर रूटीन चेक-अप, सर्जरी से पहले या कार्डियक इमरजेंसी के बाद पता चलता है कि उनका ब्लड प्रेशर बढ़ा हुआ है. उन्होंने कहा कि अस्पताल में ली गई एक बार की रीडिंग सिर्फ़ एक झलक होती है. असल बात यह है कि रोज़मर्रा की ज़िंदगी में हफ़्तों और महीनों तक ब्लड प्रेशर कैसा रहता है. डॉ. चंदोला ने कहा कि घर पर इस्तेमाल होने वाले ऐसे मॉनिटरिंग डिवाइस जो सीधे डॉक्टर की टीम को रीडिंग भेजते हैं, उनकी मदद से हम ‘मास्क्ड हाइपरटेंशन’ (छिपे हुए हाई ब्लड प्रेशर) का पता लगा सकते हैं. इलाज में जल्दी बदलाव कर सकते हैं और गंभीर समस्याओं को होने से पहले ही रोक सकते हैं. उन्होंने कहा कि वयस्कों को – खासकर उन्हें जिन्हें मोटापा, डायबिटीज है या जिनके परिवार में हाई ब्लड प्रेशर या दिल की बीमारी का इतिहास रहा है – घर पर ही सही डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल करके अपना ब्लड प्रेशर मॉनिटर करना चाहिए.
हर पांचवां युवा हाई बीपी का शिकार
इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR)-INDIAB की स्टडी से पता चला है कि भारत में हर चार में से एक से ज़्यादा वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित हैं, और इनमें से बहुत से मामलों का पता ही नहीं चल पाता. स्टडी में मोटापा, डायबिटीज, शहरों में रहना, शारीरिक रूप से एक्टिव न रहना और बहुत ज़्यादा नमक खाना जैसी चीज़ों को मुख्य जोखिम कारक (रिस्क फैक्टर) बताया गया है. एम्स दिल्ली में कार्डियोलॉजी विभाग के प्रमुख डॉ. राजीव नारंग ने कहा कि 10 साल पहले रूटीन कार्डियोलॉजी प्रैक्टिस में 40 साल से कम उम्र के लोगों में हाई ब्लड प्रेशर बहुत कम देखने को मिलता था. उन्होंने कहा कि आज, यह ऐसी समस्या है जो लगभग हर दिन देखने को मिलती है. कई युवा प्रोफेशनल्स को लंबे समय तक बैठकर काम करना पड़ता है, वे ज़्यादा प्रोसेस्ड खाना खाते हैं, उनकी नींद ठीक नहीं होती और वे लगातार तनाव में रहते हैं.
जीवनशैली में बदलाव ही बचाव का तरीका
डॉ. नारंग ने कहा कि ये सभी कारक मिलकर उम्मीद से कहीं ज़्यादा तेज़ी से ब्लड वेसल्स (रक्त वाहिकाओं) की उम्र बढ़ा रहे हैं (यानी उन्हें समय से पहले बूढ़ा कर रहे हैं). डॉ. चंदोला ने बताया कि बिना इलाज वाला हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) चुपचाप दिल, दिमाग और किडनी तक खून पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान पहुंचाता है, जिससे कम उम्र में ही दिल की बीमारी का खतरा काफी बढ़ जाता है. डॉक्टरों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि जीवनशैली में बदलाव हाइपरटेंशन से बचने का सबसे अहम तरीका है, खासकर युवाओं के लिए.
डॉ. आरएमएल हॉस्पिटल और ABVIMS में कार्डियोथोरेसिक एंड वैस्कुलर सर्जरी (CTVS) विभाग के प्रमुख डॉ. नरेंद्र सिंह झाझरिया ने कहा कि हर हफ़्ते कम से कम 150 मिनट की रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, शरीर का वज़न सही रखना, खाने में नमक कम करना, फल और सब्ज़ियों का ज़्यादा सेवन, तंबाकू से परहेज़, शराब का सेवन कम करना, तनाव को मैनेज करना और पूरी नींद लेने से ब्लड प्रेशर काफी कम हो सकता है और लंबे समय में दिल की बीमारी का खतरा भी कम हो सकता है.
कम सोडियम वाले विकल्प पर विचार
उन्होंने भारत में ज़्यादा नमक खाने और हाइपरटेंशन के बीच संबंध दिखाने वाले बढ़ते सबूतों की ओर भी इशारा किया. डॉ. झाझरिया ने बताया कि ICMR की एक रिपोर्ट में पाया गया है कि शहरी और ग्रामीण दोनों आबादी में नमक का औसत सेवन विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की प्रति दिन पांच ग्राम की तय सीमा से ज़्यादा है. इसी वजह से रिसर्चर हाइपरटेंशन और दिल की बीमारी को कम करने के तरीके के तौर पर कम सोडियम वाले नमक के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं. भारत में दिल की बीमारियों से सबसे ज़्यादा मौतें होती हैं. ऐसे में जानकारों का कहना है कि अगर हाई ब्लड प्रेशर (हाइपरटेंशन) का समय रहते पता चल जाए और उसे कंट्रोल किया जाए, तो हर साल हज़ारों हार्ट अटैक, स्ट्रोक और क्रोनिक किडनी की बीमारियों को रोका जा सकता है.
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