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फाइल करने से पहले जान लें ये जरूरी बातें

by Live India
ITR Filing

आईटीआर फाइलिंग: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल (ITR File) करने वालों के लिए 31 जुलाई 2026 तक का दिन खास है. कारण साफ है क्योंकि अभी आईटीआर फाइल करने का समय चल रहा है और अधिकतर लोगों के लिए 31 जुलाई 2026 का दिन इनकम टैक्स रिटर्न फाइल के लिए डेडलाइन है. आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, अभी तक 3 करोड़ से अधिक लोगों ने आईटीआर फाइल कर दिया है और लगातार उनकी फाइलिंग की प्रक्रिया जारी है.

22 जुलाई को इनकम टैक्स विभाग के आधिकारिक एक्स हैंडल पर जानकारी दी गई, “A.Y. (असेसमेंट ईयर) 2026-27 के लिए 3 करोड़ से ज्यादा ITR पहले ही फाइल किए जा चुके हैं, और अकेले कल (21 जुलाई) ही 15 लाख से ज्यादा ITR फाइल हुए!” इसमें आगे कहा गया, “डेडलाइन के समय होने वाली भीड़-भाड़ का इंतजार न करें! 31 जुलाई, 2026 से पहले A.Y. 2026-27 के लिए अपना ITR 1 और 2 फाइल करें.”

अब आइए जानते हैं कि आईटीआर क्या होता है, अगर आप नौकरीपेशा वाले हैं तो आपको कौन सा आईटीआर फॉर्म भरना चाहिए, आईटीआर फॉर्म 1 और फॉर्म 2 क्या है? इसके साथ ही जानेंगे कि आप आईटीआर को कैसे भर सकते हैं. आखिरी में आईटीआर से संबंधित कुछ खास सवाल और उनके जवाबों को भी जानेंगे. तो चलिए शुरू करते हैं.

आईटीआर क्या होता है?

आईटीआर का पूरा नाम इनकम टैक्स रिटर्न होता है. यह एक आधिकारिक दस्तावेज होता है, जिसे टैक्स भरने वाले लोग (टैक्सपेयर्स) अपनी वार्षिक इनकम, कटौती और चुकाए गए टैक्स की जानकारी देने के लिए इनकम टैक्स विभाग के पास भरकर जमा करते हैं.

एक तरह से हम आईटीआर को ऐसे भी परिभाषित कर सकते हैं कि यह आपकी पूरे साल भर की कमाई, निवेश और टैक्स भुगतान का एक आधिकारिक रिकॉर्ड होता है. इसे फाइल करना बहुत जरूरी माना जाता है. आईटीआर से मालूम होता है कि आपने एक वित्त वर्ष (संबंधित) में कितनी कमाई की है, उसपर आपने कितना टैक्स दिया है.

आईटीआर भरना जरूरी क्यों?

आईटीआर केवल टैक्स जमा करने का जरिया ही नहीं है बल्कि यह आपकी वित्तीय पारदर्शिता को भी दर्शाता है. अगर आपने इससे पहले टीडीएस के रूप में टैक्स दिया है, तो आईटीआर फाइल करने से यह साफ हो जाता है कि आपका कुल टैक्स देने की राशि कितनी थी और आपको कितना रिफंड मिलना चाहिए.

आईटीआर एक रिकॉर्ड दस्तावेज की भी भूमिका निभाता है. जो आपको आने वाले समय में लोन लेने, वीजा प्रोसेसिंग, टेंडर आवेदन समेत अन्य आवश्यक वित्तीय वेरिफिकेशन के लिए जरूरी होता है. आईटीआर भरना और कई मामलों में भी जरूरी होता है. टैक्स रिफंड पाने के लिए, लोन व वीजा के लिए, हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन के लिए, वित्तीय रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए, टैक्स चोरी से बचने रहने के लिए व आयकर कानून का पालन करने के लिए आदि.

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ऐसे करें इनकम टैक्स ई-फाइलिंग

इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने के लिए अधिकतर लोग ऑनलाइन सेवा का ही इस्तेमाल कर रहे हैं. इसके लिए आपको आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाना होगा. इसके लिए ये लिंक – https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ है.

  • आईटीआर की ई फाइलिंग के लिए सबसे पहले आपको आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाना होगा.
  • उसके बाद आप आयकर ई-फाइलिंग पोर्टल https://www.incometax.gov.in/iec/foportal/ पर जाएं.
  • ई-फाइलिंग पोर्टल में लॉग इन करने के लिए यूजर आईडी (पैन) दर्ज करें, और ऊपर प्रदर्शित “कृपया अपनी सुरक्षित पहुंच की पुष्टि करें” संदेश को चेक करें, फिर पासवर्ड दर्ज करें और फिर “जारी रखें” पर क्लिक करें.
  • अब आप ‘ई-फाइल’ > ‘आयकर रिटर्न’ > ‘आयकर रिटर्न फाइल करें’ लिंक पर जाएं.
  • आयकर रिटर्न पेज पर
    ‘मूल्यांकन वर्ष’ (Assessment Year) चुनें.
    फाइलिंग मोड चुनें में ऑनलाइन विकल्प चुनें.
    फाइलिंग शुरू करें पर क्लिक करें.
    करदाता का प्रकार चुनें और “जारी रखें” पर क्लिक करें.
    “नया फाइलिंग शुरू करें” पर क्लिक करें.
    “व्यक्तियों/हिंदू अविभाजित परिवार/अन्य” में से चुनें.
    ‘आईटीआर फॉर्म’ चुनें.
    आगे बढ़ने के लिए क्लिक करें.
    “आइए शुरू करें” पर क्लिक करें.
    “क्या आप निम्नलिखित में से किसी भी कारण से आयकर रिटर्न दाखिल कर रहे हैं?” में से उपयुक्त विकल्प चुनें.
    जारी रखें बटन पर क्लिक करें.
  • अब आप निर्देशों को ध्यानपूर्वक पढ़ें और ऑनलाइन आईटीआर फॉर्म के सभी लागू और अनिवार्य फील्ड भरें.
  • सभी टैब की पुष्टि करने के बाद, “आगे बढ़ें” पर क्लिक करें.
  • “रिटर्न का पूर्वावलोकन करें” पर क्लिक करें, पहले चेकबॉक्स को चेक करें और “पूर्वावलोकन के लिए आगे बढ़ें” पर क्लिक करें.
  • आईटीआर फॉर्म डाउनलोड किया जा सकता है या प्रिंट आउट लिया जा सकता है.
  • “Proceed to Validation” पर क्लिक करें. त्रुटियों की सूची प्रदर्शित होगी, त्रुटियों को ठीक करें ताकि कोई त्रुटि न हो और फिर “Proceed to verify” पर क्लिक करें.

इसके आगे और अधिक जानकारी के लिए आप आयकर विभाग की आधिकारिक वेबसाइट से और भी जानकारी ले सकते हैं.

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आईटीआर फाइल करने के लिए जरूरी दस्तावेज

आईटीआर फाइल करने के लिए ये हैं जरूरी दस्तावेज

  • पैन कार्ड: आपकी टैक्स पहचान के लिए जरूरी
  • आधार कार्ड: ई-वेरिफिकेशन और लिंकिंग के लिए जरूरी
  • इन्वेस्टमेंट प्रूफः सेक्शन 80C, 80D आदि के तहत डिडक्शन के प्रमाण
  • TDS सर्टिफिकेटः अन्य स्रोतों से काटे गए टैक्स की जानकारी
  • फॉर्म 16: एम्प्लॉयर द्वारा जारी सैलरी और TDS की जानकारी
  • बैंक स्टेटमेंटः ब्याज आय और लेन-देन की जानकारी के लिए जरूरी

आईटीआर 1, आईटीआर 2 और आईटीआर 3 फॉर्म

आईटीआर फॉर्म एक से लेकर 7 तक होते हैं. लेकिन हम यहां मुख्यत: तीन आईटीआर फॉर्म के बारे में ही बात कर रहे हैं. इनके नाम हैं- आईटीआर 1, आईटीआर 2 और आईटीआर 3.

  • आईटीआर 1: आईटीआर फाइल करने वालों की बात करें तो वह व्यक्ति जिसकी उम्र 60 वर्ष या उससे कम है और उसकी इनकम एक फाइनेंशियल ईयर में 3 लाख या उससे अधिक है, तो वह आईटीआर भर सकता है. आईटीआर 1 वे लोग भर सकते हैं, जिनकी कुल वार्षिक आय 50 लाख या उससे कम हो. इनकी आय के स्रोत वेतन (नौकरीपेशा), पेंशन, एक मकान, संपत्ति या अन्य जैसे बैंक एफडी आदि हो सकते हैं.
  • आईटीआर 2: कैपिटल गेन या मल्टीपल प्रॉपर्टीज होने पर आप आईटीआर 2 को भर सकते हैं.
  • आईटीआर 3: बिजनेस इनकम होने पर आप आईटीआर 3 फॉर्म को भरते हैं. इनमें से किसी भी फॉर्म को आपको ध्यान और सावधानी से भरना होता है. अगर आपने गलत फॉर्म भर दिया तो आपका आईटीआर इनवैलिड या रद्द हो जाता है. बाद में आपको नोटिस भी आ सकता है. इसलिए सावधानी से और पूरी जानकारी के साथ ही फॉर्म को भरें.

आईटीआर फाइल करने संबंधित कुछ सवाल और उनके जवाब

यदि मैं आईटीआर 1 में नई कर व्यवस्था को ऑप्ट इन या ऑप्ट आउट करना चाहता हूं तो क्या मुझे कोई फॉर्म दाखिल करना होगा?

नहीं, आपको आईटीआर 1 में नई कर व्यवस्था को ऑप्ट इन या ऑप्ट आउट करने के लिए कोई फॉर्म भरने की आवश्यकता नहीं है. आप बिना कोई फॉर्म दाखिल किए ही आईटीआर फॉर्म में “नई व्यवस्था से बाहर निकलना” पर टिक कर सकते हैं. फॉर्म 10-IEA केवल उन करदाताओं को जमा करना होगा जो आईटीआर 3, आईटीआर 4 या आईटीआर 5 दाखिल करते हैं, यदि उनकी व्यावसायिक आय है. फॉर्म आईटीआर 1 या 2 में अपनी विवरणी फाइल करने वाले व्यक्तियों और एचयूएफ को फॉर्म 10-IEA जमा करने की आवश्यकता नहीं है.

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आईटीआर-1 दाखिल करने के लिए मुझे कौन से दस्तावेज चाहिए होंगे?

आपको एआईएस डाउनलोड करना होगा और फॉर्म 16, मकान के किराए की रसीद (यदि लागू हो), निवेश भुगतान, प्रीमियम रसीदें (यदि लागू हो) की प्रतियां रखनी होंगी. हालांकि, आईटीआर अनुबंध-रहित फॉर्म हैं, इसलिए आपको अपनी विवरणी (चाहे मैन्युअल रूप से या इलेक्ट्रॉनिक रूप से दाखिल किया गया हो) के साथ कोई भी दस्तावेज (जैसे निवेश का प्रमाण, टीडीएस प्रमाणपत्र) संलग्न करने की आवश्यकता नहीं है. हालांकि, आपको इन दस्तावेजों को उन परिस्थितियों के लिए रखना होगा जब उन्हें कर अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत करने की आवश्यकता हो, जैसे कि मूल्यांकन, पूछताछ, आदि.

नई कर व्यवस्था (डिफॉल्ट) और पुरानी कर व्यवस्था के अनुसार धारा 87A के तहत छूट क्या है?

वर्तमान में, धारा 87A व्यक्तियों को पुरानी कर व्यवस्था के तहत 12,500 रुपये और नई कर व्यवस्था के तहत 25000 रुपये की छूट का दावा करने की अनुमति देती है.

क्या ई-फाइलिंग और ई-भुगतान एक ही बात है?

नहीं. ई-फाइलिंग, ई-फाइलिंग पोर्टल पर आपकी आयकर विवरणी को इलेक्ट्रॉनिक रूप से जमा करने की प्रक्रिया है. वहीं, ई-भुगतान, कर का इलेक्ट्रॉनिक रूप से भुगतान करने की प्रक्रिया है.

क्या मैं अब पिछले 4 निर्धारण वर्षों के लिए आईटीआर दाखिल कर सकता हूं?

हां, यदि आप अपने पिछले चार वर्षों का आईटीआर दाखिल नहीं कर पाए हैं तो आप आईटीआर-यू दाखिल कर सकते हैं. चालू वर्ष के लिए आप अपना नियमित आईटीआर दाखिल कर सकते हैं.

यदि मैंने अधिक कर का भुगतान किया है तो क्या मुझे रिफंड मिलेगा?

हां, आपके द्वारा भुगतान किए गए किसी भी अधिक कर को आपकी आयकर विवरणी फाइल करके रिफंड के रूप में दावा किया जा सकता है. आपकी विवरणी प्रसंस्कृत होने के बाद, आईटीडी जांच करता है और तदनुसार आपके प्रतिदाय (रिफंड) दावे को स्वीकार करता है और फिर राशि आपके बैंक खाते में जमा की जाती है. आपको ई-फाइलिंग पोर्टल पर पंजीकृत आपकी ईमेल आईडी पर एक संदेश भी मिलेगा.

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