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Who is Abhijeet Dipke: भारत में अक्सर बयानों से राजनीतिक चर्चाएं शुरू होती हैं, लेकिन इस बार सिर्फ एक बयान ने पूरी सोशल मीडिया की राजनीति बदल दी है. 15 मई, 2026 को भारत के मुख्य न्यायाधीश ने कथित तौर पर जेन-जी की आलोचना करते हुए ‘कॉकरोच’ शब्द का इस्तेमाल किया. उनका यह बयान युवाओं के दिल पर लग गया. फिर क्या था पहले सोशल मीडिया पर मीम्स की बहार आई और देखते ही देखते युवाओं की आवाज बनकर उभरी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP). खास बात यह है इंस्टाग्राम का एल्गोरिदम बदलने वाला और कॉकरोच जनता पार्टी की शुरुआत करने वाला अभिजीत दिपके खुद भारत में नहीं था. दिपके ने अमेरिका में बैठे-बैठे यह सारकास्टिक सोशल मीडिया अकाउंट शुरू कर दिया.
इंस्टाग्राम और एक्स पर ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के फॉलोवर्स रोशनी की रफ्तार से बढ़ने लगे. सिर्फ 6 दिनों में एक्स पर 2 लाख फॉलोवर्स इससे जुड़ गए और इंस्टाग्राम पर तो ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने भारतीय जनता पार्टी को भी पीछे छोड़ दिया. इसके फनी मीम्स ने जेन-जी को खुद से जुड़ने के लिए मजबूर कर दिया. अब यह सिर्फ एक आम क्रिटिक पेज नहीं रहा, बल्कि जेन-जी का नेतृत्व करने वाला संगठन बन गया है. इसी दौरान नीट का पेपर लीक हो गया और कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार से जवाबदेही मांगने का जिम्मा उठा लिया. अभिजीत दिपके अमेरिका से दिल्ली आए और आज जंतर मंतर पर उनके नेतृत्व में चल रहे आंदोलन को एक महीने से ज्यादा समय हो चुका है. इस दौरान में सीजेपी ने दिल्ली समेत देश के अलग-अलग हिस्सों में आंदोलन की आग जला दी. ऐसे में अभिजीत दिपके के बारे में जरूर जानना चाहिए. इस खबर में आपको अभिजीत दिपके की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई से लेकर करियर और परिवार के बारे में पता चलेगा.
महाराष्ट्र में बीता बचपन
अभिजीत दीपके कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के फाउंडर और एक प्रोफेशनल पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजिस्ट हैं. अभिजीत दिपके का जन्म 29 सितंबर 1995 में हुआ. वे महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर के वालुज MIDC के रहने वाले हैं. उनके पिता भगवानराव दिपके MIDC से रिटायर्ड इंजीनियर हैं और उनकी मां अनीता दिपके एक गृहिणी हैं. उन्होंने अपनी शुरुआती शिक्षा छत्रपति संभाजीनगर में पूरी की और बाद में एस.बी. कॉलेज से पढ़ाई की.
दिपके ने पुणे से पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की. उनके पिता ने शुरू में मैनेजमेंट कोटे से इंजीनियरिंग में उनका एडमिशन करवाया था, लेकिन दिपके पहले साल की परीक्षा में शामिल नहीं हुए और बाद में पत्रकारिता को चुना. इसके बाद वे अमेरिका चले गए और बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशन्स में मास्टर ऑफ साइंस की डिग्री पूरी की.

आम आदमी पार्टी के साथ किया काम
अभिजीत दिपके को मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स का भी काफी अनुभव है. 2020 और 2023 के बीच, दिपके ने आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया टीम को लीड किया. 2020 के दिल्ली विधान सभा चुनाव के दौरान, उन्होंने युवाओं को आकर्षित करने के लिए वोटर्स से जुड़े मुद्दों पर मीम बनाए. उन्होंने दिल्ली सरकार के शिक्षा विभाग के लिए संचार सलाहकार के रूप में भी काम किया. इसके बाद उन्होंने विदेश में पढ़ाई करने के लिए 2023 में AAP छोड़ दी.
कैसे शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी
15 मई, 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक केस की सुनवाई के दौरान, चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने कथित तौर पर बेरोजगार और सोशल मीडिया पर एक्टिव कुछ युवाओं की तुलना “कॉकरोच” और “समाज के पैरासाइट” से की. उन्होंने कहा कि ये युवा, जिन्हें नौकरी नहीं मिल पाती, सोशल मीडिया एक्टिविस्ट या RTI एक्टिविस्ट बन जाते हैं और फिर सिस्टम को टारगेट करते हैं. चीफ जस्टिस की इस बात से देश के युवाओं, खासकर Gen-Z में गुस्सा फैल गया. जेन-जी ने सोशल मीडिया पर सीजेआई की जमकर आलोचना की और मीम्स बनाए. अगले ही दिन 16 मई को अभिजीत दीपके ने इस बेइज्जती का जवाब देने का फैसला किया. उन्होंने ट्विटर पर पोस्ट किया, “अगर आप हमें कॉकरोच कह रहे हैं, तो ठीक है. हम सभी कॉकरोच के लिए एक नया प्लेटफॉर्म लॉन्च कर रहे हैं.”

सोशल मीडिया पर सीजेपी ने बीजेपी को पछाड़ा
खबर लिखे जाने तक, इंस्टाग्राम पर सीजेपी के 2.56 करोड़ से ज्यादा फॉलोवर्स हो गए हैं, जबकि पूरी दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी कही जाने वाली बीजेपी के केवल 90 लाख फॉलोवर्स ही हैं. वहीं एक्स पर इसके 3.6 लाख फॉलोवर्स हैं. सोशल मीडिया पर हर तरफ ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ट्रेंड कर रही है. इंस्टाग्राम पर सिर्फ कॉकरोच की रील्स देखने को मिल रही हैं. CJP जनता से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठा रही है, जिसके कारण जेन-जी उसे सपोर्ट कर रहे हैं.
जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन
सीजेपी बनने के बाद पेज ने बेरोजगारी, न्यायिक व्यवस्था और जनता से जुड़ों मुद्दों पर सरकार के खिलाफ डिजिटल विरोध शुरू किया. नीट पेपर लीक के बाद उन्होंने डिजिटल प्रदर्शन को जमीन पर उतारा. सीजेपी के तीन प्रवक्ता बनाए गए- सौरव दास, विजेता दहिया और आशुतोष रांका. अभीजीत दिपके ने सोशल मीडिया पर अपने समर्थकों से जंतर मंतर पर जुटने की अपील की. काफी लोग जंतर मंतर पर पहुंचे और अभिजीत से मुलाकात की. कुछ देर धरना देने के बाद सभी वहां से चले गए. 20 जून को कॉकरोच जनता पार्टी ने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन प्रदर्शन शुरू कर दिया. इसके बाद देशभर से लोग इस प्रदर्शन में जुड़ने लगे. छात्र, उनके अभिभावक और कई छात्र संगठन अपना समर्थन देने के लिए पहुंचे. प्रदर्शन की आग और भड़क गई, जब शिक्षा व पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने प्रदर्शन जॉइन किया. 28 जून को उन्होंने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी.
20 जुलाई का बवाल
कई दिनों तक कोई सुनवाई न होने पर सीजेपी ने 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक मार्च करने का ऐलान किया. इस दौरान सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने लगी. दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें अस्पताल में भर्ती करवा दिया. लेकिन जब सोनम वांगचुक को सुबह-सुबह उठाया गया, तो लोगों का गुस्सा और भड़क गया. 20 जुलाई को हुए मार्च में हजारों की संख्या में लोग जुटे लेकिन यह मार्च हिंसक हो गया.
जैसे ही प्रदर्शनकारी पार्लियामेंट की ओर बढ़े, दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने की कोशिश की. कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए. हालात बिगड़ने पर पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया. कई प्रदर्शनकारी घायल हो गए और कुछ को हिरासत में लिया गया. बाद में, कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया, हालांकि दिल्ली पुलिस ने इस आरोप से इनकार किया. पुलिस पर भी वर्दी के बिना लाठीचार्ज करने के आरोप लगे. सोशल मीडिया पर उस दिन की वीडियोज लगातार वायरल हो रही हैं. जनता दो गुटों में बंट गई है- एक गुट आंदोलन को समर्थन दे रहा है और दूसरा सरकार को.
अशांति के बीच, केंद्र सरकार ने सीजेपी के सामने बातचीत का प्रस्ताव रखा. 20 जुलाई को, CJP के दो प्रवक्ता पहली बार केंद्रीय मंत्री और BJP प्रेसिडेंट जे.पी. नड्डा से मिले. इस मीटिंग में उन्होंने अपनी मांगें रखीं. डेलीगेशन ने अपनी मांगों का एक मेमोरेंडम सरकार को सौंप दिया. पहली मीटिंग के बाद दोनों पक्षों के बीच कोई फाइनल सहमति नहीं हुई. सरकार ने प्रदर्शन खत्म करने और बातचीत जारी रखने की अपील की, लेकिन प्रदर्शनकारी इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे.

माता-पिता की चिंता
सीजेपी की मांगे
सबसे पहली और सबसे बड़ी मांग यह है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें. CJP का कहना है कि उन्हें परीक्षा व्यवस्था की इस बड़ी नाकामी और पेपर लीक की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे देना चाहिए.
इसके अलावा NEET पेपर लीक विवाद और मानसिक तनाव के कारण आत्महत्या करने वाले सभी प्रभावित छात्रों के परिवारों को ₹1 करोड़ का मुआवजा दिया जाना चाहिए.
20 जुलाई को ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान शांति से विरोध कर रहे छात्रों और युवाओं के खिलाफ दर्ज सभी पुलिस केस (FIR) वापस लिए जाने चाहिए और सरकार को यह गारंटी देनी चाहिए कि भविष्य में शांति से विरोध करने वालों के खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की जाएगी.
आज हुई दूसरी मुलाकात
सोनम वांगचुक ने 23 जुलाई को स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करने के बाद अपना अनशन तोड़ दिया है, लेकिन सीजेपी का आंदोलन अभी भी जारी है. वहीं प्रदर्शन को देखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों को भरोसा दिया कि पेपर लीक जैसे गंभीर अपराध को रोकने के लिए सख्त नियम बनाए जाएंगे. इसके साथ ही आज सीजेपी डेलीगेशन ने जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से फिर मुलाकात की. अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, सीजेपी ने अपनी मांगें दोहराई हैं. सरकार ने मुआवजा और छात्रों पर कानूनी कार्रवाई न करने की मांग मान ली है, लेकिन सीजेपी अभी भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर अड़ी हुई है. अब देखना होगा कि इस प्रदर्शन का अंतिम नतीजा क्या निकलता है. क्या मोदी सरकार शिक्षा मंत्री का इस्तीफा लेना होगा या सीजेपी सरकार की बात मान जाएगी.
सड़क से सत्ता तक: कभी पेपर लीक पर खुद खाई थीं लाठियां, आज कटघरे में खड़े हैं देश के शिक्षा मंत्री
समाचार स्रोत: पीटीआई
