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सौर कोच: पर्यावरण संरक्षण और ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने की दिशा में उत्तर मध्य रेलवे (NCR) ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. रेलवे ने पहली बार सोलर पैनल से लैस विशेष रेल कोच तैयार किया है, जिसमें सौर ऊर्जा के माध्यम से लाइट, पंखे और मोबाइल चार्जिंग प्वाइंट संचालित होंगे. फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में विकसित किया गया है और जल्द ही यात्री सेवा में शामिल किए जाने की तैयारी है.
झांसी में पायलट कोच तैयार
उत्तर मध्य रेलवे के झांसी स्थित कोच कारखाने में तैयार किए गए इस आधुनिक कोच की छत पर करीब 7 किलोवॉट पीक क्षमता का सोलर फोटोवोल्टिक सिस्टम लगाया गया है. यह सिस्टम सूर्य की रोशनी से बिजली उत्पन्न करेगा और बैटरी बैंक को चार्ज करेगा. इसके बाद उसी ऊर्जा से कोच के अंदर यात्रियों के उपयोग के लिए उपलब्ध लाइट, पंखे और चार्जिंग प्वाइंट संचालित होंगे. इस तकनीक से पारंपरिक बिजली की खपत कम होगी और ऊर्जा की बचत भी सुनिश्चित होगी. उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी डॉ. शिवम शर्मा ने बताया कि यह पहल भारतीय रेलवे को पर्यावरण के अनुकूल और ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक अहम कदम है.
बिजली की होगी भारी बचत
उन्होंने कहा कि प्रत्येक सोलर कोच सालाना लगभग 13,500 यूनिट बिजली का उत्पादन करेगा, जिससे करीब 3 लाख रुपये तक की बिजली बचत होने का अनुमान है. साथ ही इससे कार्बन उत्सर्जन में भी कमी आएगी, जो पर्यावरण संरक्षण के लिए सकारात्मक परिणाम देगा. उन्होंने बताया कि पायलट प्रोजेक्ट के सफल होने के बाद झांसी कारखाने में हर महीने दो सोलर कोच तैयार किए जाएंगे. इन कोचों को चरणबद्ध तरीके से विभिन्न यात्री ट्रेनों में शामिल किया जाएगा. भविष्य में आवश्यकता के अनुसार ऐसे कोचों की संख्या बढ़ाने की योजना भी बनाई गई है, ताकि रेलवे के ऊर्जा संरक्षण अभियान को और गति मिल सके.
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी मजबूती
रेलवे एनसीआर के चीफ इंजीनियर पुलकित श्रीवास्तव का कहना है कि सौर ऊर्जा आधारित यह तकनीक परिचालन लागत कम करने के साथ-साथ स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देगी. इससे रेलवे की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा होगा और जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटेगी. उत्तर मध्य रेलवे की यह पहल हरित परिवहन की दिशा में एक प्रभावी कदम मानी जा रही है. यदि यह प्रयोग सफल रहता है, तो आने वाले समय में अन्य रेलवे जोनों में भी इस तकनीक को अपनाया जा सकता है. इससे यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण के राष्ट्रीय लक्ष्य को भी मजबूती मिलेगी.
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- प्रयागराज से विकास मिश्रा की रिपोर्ट
