Home Chhattisgarh न जाति, न भाषा- सबका है यह देश: मोहन भागवत

न जाति, न भाषा- सबका है यह देश: मोहन भागवत

by Live India
Mohan Bhagwat

RSS Chief: RSS प्रमुख मोहन भगवत ने बुधवार को कहा कि लोगों को जाति, धन या भाषा के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए. यह देश सबका है.

आरएसएस प्रमुख: RSS प्रमुख मोहन भगवत ने बुधवार को कहा कि लोगों को जाति, धन या भाषा के आधार पर नहीं आंका जाना चाहिए. यह देश सबका है. छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के सोनपैरी गांव में आयोजित हिंदू सम्मेलन को संबोधित करते हुए भगवत ने कहा कि सद्भाव की दिशा में पहला कदम है भेदभाव की भावना को दूर करना और सभी को अपना मानना. उन्होंने कहा कि पूरा देश सबका है और यही सच्ची सामाजिक सद्भाव की भावना है. भगवत ने पारिवारिक मेलजोल को पुनर्जीवित करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि परिवारों को सप्ताह में कम से कम एक दिन साथ बिताना चाहिए, अपनी आस्था के अनुसार प्रार्थना करनी चाहिए, घर का बना खाना साथ खाना चाहिए और सार्थक चर्चा करनी चाहिए. भगवत ने इन चर्चाओं को ‘मंगल संवाद’ कहा. उन्होंने कहा कि अकेलेपन की भावना से लोग अक्सर बुरी आदतों में पड़ जाते हैं. परिवारों के बीच नियमित मेलजोल और संवाद इसे रोकने में मदद कर सकता है.

देश खतरे में तो परिवार भी असुरक्षित

भागवत ने लोगों से विभाजन से ऊपर उठकर समाज और राष्ट्र के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आग्रह किया. आरएसएस प्रमुख ने कहा कि सामाजिक सद्भाव की दिशा में पहला कदम अलगाव और भेदभाव की भावनाओं को दूर करना है. उन्होंने कहा कि मंदिर, जल निकाय और श्मशान घाट सभी हिंदुओं के लिए खुले होने चाहिए. सामाजिक कार्य को संघर्ष नहीं बल्कि एकता का प्रयास बताया. उन्होंने कहा कि लोगों को जाति, धन, भाषा या क्षेत्र के आधार पर मत आंकिए. सभी को अपना समझिए. पूरा भारत मेरा है. उन्होंने इस दृष्टिकोण को सामाजिक समरसता बताया. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सुविधाएं और धार्मिक स्थल सभी के लिए खुले होने चाहिए. कहा कि अगर देश खतरे में है, तो परिवार भी खतरे में हैं.

मातृभाषा और स्वदेशी पर जोर

वैश्विक तापवृद्धि और पर्यावरण के बिगड़ने पर चिंता व्यक्त करते हुए भागवत ने लोगों से अपने घरों से ही जल संरक्षण के प्रयास शुरू करने का आग्रह किया, जिसमें जल की बचत, वर्षा जल संचयन, एकल-उपयोग प्लास्टिक का कम उपयोग और अधिक पौधरोपण शामिल है. उन्होंने घर में मातृभाषा का उपयोग करने, भारतीय पहनावे का सम्मान करने और स्वदेशी तथा आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने की भी वकालत की. उन्होंने कहा कि संविधान की प्रस्तावना, मौलिक कर्तव्य और नागरिकों के दायित्वों को नियमित रूप से पढ़ा और उनका पालन किया जाना चाहिए. साथ ही बड़ों का सम्मान करना और जरूरतमंदों की मदद करना जैसे पारंपरिक सामाजिक मूल्यों का भी पालन किया जाना चाहिए. भागवत ने कहा कि नागपुर की एक छोटी शाखा से शुरू हुआ राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का कार्य अब हर जगह फैल चुका है.

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