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क्रिस्टोफर नोलन द ओडिसी: जब भी हॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक क्रिस्टोफर नोलन किसी फिल्म का ऐलान करते हैं, दुनिया भर के लोगों की नजरें उसी पर टिक जाती हैं. इस बार नोलन ने अपनी फिल्म ‘द ओडिसी’ के जरिए होमर के अमर महाकाव्य को बड़े पर्दे पर उतारने का फैसला किया है. मैट डेमन, टॉम हॉलैंड, ऐन हैथवे, जेंडाया और रॉबर्ट पैटिनसन जैसे सितारों से सजी ये फिल्म लोगों का दिल जीत रही है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नोलन से सदियों पहले कई चित्रकार इस महागाथा को जिंदा कर चुके थे? इन कलाकारों ने ओडीसियस की रोमांचक यात्रा, उसके संघर्ष, प्यार और जीत को इस तरह कैनवास पर उतारा कि हर पेंटिंग किसी फिल्मी सीन से कम नहीं लगता. आज आपको उन्हीं 5 शानदार पेंटिंग्स के बारे में बताएंगे.
‘यूलिसिस डिराइडिंग पॉलीफेमस’
साल 1829 में फेमस पेंटर जे. एम. डब्ल्यू. टर्नर ने एक ऐसी पेंटिंग बनाई, जिसे देखते ही लगता है मानो किसी बड़ी फिल्म का क्लाइमैक्स चल रहा हो. उनकी पेंटिंग में ओडीसियस अपनी जान बचाकर जहाज से निकल चुका है. वो एक आंख वाले राक्षस पॉलीफेमस को चिढ़ा रहा है. लाल चोगा पहने विनर की तरह खड़ा ओडीसियस और पीछे उगता सूरज इस सीन को शानदार बना देता है. हालांकि, उसका यही घमंड आगे चलकर उसके लिए नई मुसीबतों की वजह बनता है.

‘एयोलस गिविंग द विंड्स टू ओडीसियस’
फ्रांसीसी कलाकार आइजैक मोइयों ने ये शानदार पेंटिंग 1650 के दशक में बनाई गई थी. इसमें हवाओं के देवता एयोलस ओडीसियस को बैल की खाल से बना एक थैला सौंपते हैं, जिसमें दुनिया की सारी खतरनाक हवाएं कैद हैं. सिर्फ पश्चिमी हवा को खुला छोड़ा जाता है ताकि उसका जहाज सुरक्षित अपने घर इथाका पहुंच सके. लेकिन कहानी में फिल्मी ट्विस्ट तब आता है, जब ये तोहफा ही उसकी सबसे बड़ी परेशानी बन जाता है.
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‘यूलिसिस एंड द सायरन्स’
1891 में जॉन विलियम वॉटरहाउस ने इस यादगार सीन को अपनी पेंटिंग में उतारा. समुद्र के बीच ओडीसियस अपने जहाज के मस्तूल से बंधा हुआ है, जबकि उसके साथी नाविकों के कान मोम से बंद हैं. सामने हैं सायरन्स, जिनकी आवाज किसी भी इंसान को मौत की तरफ खींच सकती थी. ओडीसियस उनकी आवाज सुनना चाहता है, लेकिन खुद को बचाने के लिए पहले ही खुद को बंधवा देता है. ये सीन बताता है कि असली हीरो वही होता है, जो अपनी कमजोरियों को पहचानकर उन पर काबू पाना जानता है.
‘कैलिप्सो की विदाई’
ब्रिटिश कलाकार सैमुअल पामर की ये भावुक पेंटिंग ओडीसियस की जिंदगी के सबसे दर्दनाक पलों में से एक को दिखाती है. समुद्र में बहकर कैलिप्सो के द्वीप पर पहुंचे ओडीसियस को अप्सरा कैलिप्सो 7 साल तक अपने साथ रखती है. वो उससे प्यार करती है और अमर होने का प्रस्ताव भी देती है. लेकिन ओडीसियस के दिल में सिर्फ अपनी पत्नी पेनेलोप और अपने वतन इथाका की याद बसी रहती है. आखिरकार देवताओं के आदेश पर कैलिप्सो भारी मन से उसे विदा करती है.

‘द मीटिंग ऑफ यूलिसिस एंड पेनेलोप’
जॉन फ्लैक्समैन की ये पेंटिंग होमर की पूरी महागाथा का सबसे भावुक अध्याय मानी जाती है. बीस सालों तक युद्ध और कठिन यात्राओं के बाद ओडीसियस अपने घर लौटता है, लेकिन भेष बदलकर. वो पहले अपनी पत्नी के स्वयंवर में आए दावेदारों को हराता है और फिर अपनी पहचान बताता है. पेनेलोप एकदम से भरोसा नहीं करती. वो उनके शादी से जुड़ा एक ऐसा राज़ पूछती है, जिसे सिरफ वही दोनों जानते हैं. जवाब मिलते ही सालों का इंतजार खत्म हो जाता है.
क्यों आज भी जिंदा है ‘द ओडिसी’
होमर की ‘द ओडिसी’ सिर्फ एक महाकाव्य नहीं, बल्कि साहस, प्यार, धैर्य और घर लौटने की खूबसूरत कहानी है. यही वजह है कि सदियों पहले बनीं ये पेंटिंग्स आज भी लोगों को अपनी तरफ खींचती हैं. अब जब क्रिस्टोफर नोलन इस अमर कथा को शानदार स्टारकास्ट के साथ बड़े पर्दे पर ला चुके हैं, तब ये पेंटिंग्स और हसीन लगने लगी हैं. वैसे भी, महान कहानियां समय के साथ पुरानी नहीं होतीं, बल्कि हर दौर में दर्शकों का दिल जीत लेती हैं.
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