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Indian Economy की रफ्तार बरकरार, दुनिया सुस्त पर भारत मस्त

by Live India
Indian Economy की रफ्तार बरकरार, दुनिया सुस्त पर भारत मस्त

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Indian Economy: भले ही दुनिया में कुछ भी चल रहा हो, लेकिन भारत को आगे बढ़ने से कोई नहीं रोक सकता. ऐसा हमारा नहीं बल्कि संयुक्त राष्ट्र का कहना है. आप भी जानें क्या है ताजा मामला.

21 अप्रैल, 2026

अगर आप भी ये सोच रहे हैं कि देश की आर्थिक सेहत कैसी है, तो आपके लिए एक अच्छी खबर है. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र यानी UN की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था की गाड़ी सही ट्रैक पर दौड़ रही है. चलिए जानते हैं कि आखिर इस रिपोर्ट में हमारे और आपके पॉकेट से जुड़ी क्या खास बातें कही गई हैं.

रफ्तार में इंडिया

यूनाइटेड नेशंस की इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड द पैसिफिक (ESCAP) की रिपोर्ट ‘इकोनॉमिक एंड सोशल सर्वे ऑफ एशिया एंड द पैसिफिक 2026’ में बताया गया है कि इस साल भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.4 प्रतिशत रहने वाली है. इतना ही नहीं, अगले साल यानी 2027 में ये स्पीड और बढ़कर 6.6 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. रिपोर्ट की मानें तो 2025 में इंडियन इकोनॉमी ने 7.4 प्रतिशत की शानदार बढ़त दिखाई थी. इसकी सबसे बड़ी वजह रही गांवों में होने वाली जबरदस्त खरीदारी और GST दरों में की गई कटौती. हालांकि, 2025 के दूसरे हिस्से में अमेरिका के साथ ट्रेड और टैरिफ की वजह से थोड़ी सुस्ती जरूर आई. लेकिन सर्विस सेक्टर ने मोर्चा संभाले रखा और भारत की ग्रोथ को गिरने नहीं दिया.

महंगाई से राहत?

आम आदमी के लिए सबसे जरूरी सवाल होता है महंगाई का. UN की रिपोर्ट में इसके भी राहत के हिंट हैं. उम्मीद है कि इस साल महंगाई दर 4.4 प्रतिशत रहेगी और अगले साल ये गिरकर 4.3 प्रतिशत पर आ सकती है. इसका मतलब है कि आने वाले टाइम में आपकी रसोई का बजट बहुत ज्यादा नहीं बिगड़ेगा.

फॉरेन इन्वेस्टर्स

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भले ही फॉरेन इन्वेस्टर्स में थोड़ी कमी देखी गई हो, लेकिन भारत अब भी निवेशकों की पहली पसंद बना हुआ है. पिछले साल भारत ने करीब 50 अरब डॉलर का ग्रीनफील्ड इन्वेस्टमेंट अपनी तरफ खींचा था. वहीं, विदेशों में काम करने वाले भारतीयों की बात करें तो वो अब भी देश की इकोनॉमी की रीढ़ बने हुए हैं. साल 2024 में भारत ने 137 अरब डॉलर की रेमिटेंस यानी विदेश से भेजा गया पैसा हासिल किया, जो दुनिया में सबसे ज्यादा है. भारत और फिलीपींस जैसे देशों में इस पैसे का 40 प्रतिशत हिस्सा जरूरी चीजों जैसे इलाज और घर के खर्चों पर खर्च किया जाता है. हालांकि, अमेरिका के जनवरी 2026 से रेमिटेंस पर लगाए गए 1 प्रतिशत टैक्स की वजह से इस आंकड़े में थोड़ी कमी आने की उम्मीद की जा रही है.

ग्रीन जॉब्स और फ्यूचर

आजकल हर जगह ग्रीन चर्चा में है. रिपोर्ट्स कहती है कि पूरी दुनिया में करीब 1.66 करोड़ ‘ग्रीन जॉब्स’ हैं. इसमें भारत का योगदान भी काफी बड़ा है. देश में करीब 13 लाख लोग इस सेक्टर में काम कर रहे हैं. सरकार की ‘प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव’ स्कीम की भी रिपोर्ट में जमकर तारीफ की गई है. सोलर पैनल, बैटरी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में भारत जिस तरह से घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दे रहा है, उससे न सिर्फ विदेश पर हमारी निर्भरता कम होगी बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे. यानी देखा जाए तो, ग्लोबल चैलेंजेस और उतार-चढ़ाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती से आगे बढ़ रही है.

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