7
सोशल मीडिया पर प्रतिबंध: आज के इस डिजिटल के जमाने में सोशल मीडिया का काफी बोलबाला हो गया है. बच्चे से लेकर बुजुर्ग तक, हर कोई किसी न किसी प्रकार से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल जरूर करते हुए दिख रहा है. दुनिया सहित भारत में भी सोशल मीडिया के काफी अधिक यूजर्स हैं. एक रिपोर्ट के अनुसार, फेसबुक पर दुनिया भर में हर महीने करीब 3 अरब यूजर दिखते हैं. इसके अलावा इंस्टाग्राम, यूट्यूब, व्हाट्सएप, एक्स (पूर्व नाम ट्विटर), टेलीग्राम समेत अन्य कई सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का लोग धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहे हैं. एक तरह से कह सकते हैं कि आज के समय में सोशल मीडिया लोगों के जीवन का एक अभिन्न हिस्सा बन चुका है.
आपने ध्यान दिया होगा किसी तकनीकी या अन्य वजहों से जब फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म काम करने बंद हो जाते हैं या डाउन हो जाते हैं तो दुनिया में ये सुर्खियां बन जाती हैं. खबरों में इनकी बात होने लगती है. फिर जल्द ही संबंधित कंपनी को दुनिया के सामने आकर इसपर अपना स्पष्टीकरण देना पड़ता है और यह भी बताना होता है कि कब तक इसे ठीक किया जा सकेगा.
दुनिया में सोशल मीडिया का फैलता जाल लोगों के लिए कई तरह से इस्तेमाल करने वाला होता है. इन डिजिटल ठिकानों का इस्तेमाल लोग न्यूज पाने, वीडियो देखने, मनोरंजन करने, अपने विचार को दुनिया व समाज के सामने रखने, किसी प्रकार की चर्चा या बहस करने, लोगों से बातचीत करने समेत अन्य कई उद्देश्यों के लिए करते हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के कई सारे फायदे हैं. लेकिन जानकार बताते हैं कि सोशल मीडिया बच्चों पर कुछ अलग तरीके से प्रभाव डाल रहा है. एक्सपर्ट के अनुसार, वैसे सोशल मीडिया का अच्छे नजरिए और उद्देश्य से इस्तेमाल करने में कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन बच्चों को इससे शुरुआत के कुछ वर्षों के लिए दूर रखने की भी सलाह दी जाती है.
एक्सपर्ट का मानना है कि सोशल मीडिया का बच्चों में लत लगनी उनकी ग्रोथ के साथ-साथ हेल्थ और व्यवहार के लिए सही नहीं है. चूंकि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हर प्रकार के कंटेंट हैं. कुछ ऐसे भी कंटेंट हैं, जिन्हें अगर बच्चे देखते हैं तो उनपर बुरा असर पड़ सकता है. किसी की हत्या, फांसी, दुष्कर्म, चोरी, मारपीट, अभद्र भाषा का इस्तेमाल, डरावने वीडियो समेत अन्य चीजें भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर देखने को मिल जाती हैं. अगर इन्हें बच्चे देखते हैं तो उनपर कितना बुरा असर पड़ सकता है आप इसकी कल्पना कर सकते हैं.

बच्चों को खाना खिलाने के दौरान उनके हाथों में मोबाइल
देश में आपने कई घरों में देखा होगा कि कई लोग अपने बच्चों को खाना खिलाने के दौरान उनके हाथों में मोबाइल फोन थमा देते हैं ताकि वे बच्चे बिना किसी परेशानी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो देखते-देखते खाना खा ले. अधिक समय तक आंखों को मोबाइल फोन की स्क्रीन से चिपकाए रखने की वजह से बच्चों की आंखें कमजोर हो जा रही हैं और उन्हें बचपन या फिर बहुत ही कम उम्र में चश्मे की जरूरत पड़ने लग रही है. ऐसे ही कई सारे उदाहरण हैं, जो यह बताते हैं कि सोशल मीडिया से एक तय उम्र तक बच्चों को दूर रखना ही सही है.
दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जिन्होंने अपने यहां उम्र तय कर बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बैन कर दिए हैं. हाल ही में मलेशिया भी दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है, जिनके यहां बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा हुआ है. भारत में भी बच्चों के लिए ऐसे कदम उठाने को लेकर चर्चा और मांग देखी जाती रही है. अब आइए जानते हैं कि दुनिया के किन-किन देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया अकाउंट बैन कर दिए गए हैं. इसके साथ ही जानेंगे कि भारत में इस मामले में क्या कुछ चर्चाएं होती रही हैं. शुरुआत हम मलेशिया सरकार के उस फैसले से करेंगे, जिसमें हाल ही में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया अकाउंट को बैन करने का फैसला किया है.
मलेशिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन
मलेशिया ने बीते सोमवार को 16 वर्ष से कम उम्र के लाखों बच्चों को सोशल मीडिया अकाउंट रखने से प्रतिबंधित करने वाले नियमों को लागू करना शुरू कर दिया है. इससे युवा यूजर्स के लिए ऑनलाइन सुरक्षा उपायों को मजबूत करने के वैश्विक प्रयास में शामिल हो गया है. इन नियमों के तहत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को उम्र वेरिफिकेशन सिस्टम लागू करनी होगी और 16 वर्ष से कम आयु के यूजर्स को अकाउंट बनाने से रोकना होगा. ये नियम फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिकटॉक और यूट्यूब सहित कम से कम 8 मिलियन यूजर्स वाले प्लेटफॉर्म्स पर लागू होते हैं. नियमों का पालन न करने वाली कंपनियों पर 10 मिलियन रिंगिट (करीब 25 लाख अमेरिकी डॉलर) तक का जुर्माना लग सकता है. लेकिन जिन माता-पिता के बच्चे कानून का उल्लंघन करते हुए दिखते हैं, उन्हें दंडित नहीं किया जाएगा.
मलेशिया सरकार ने कहा कि इन उपायों का उद्देश्य बच्चों को हानिकारक सामग्री, साइबरबुलिंग और प्लेटफॉर्म की उन विशेषताओं से बचाना है जो अत्यधिक उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई हैं. वहीं, मलेशिया के संचार एवं मल्टीमीडिया आयोग (Communications and Multimedia Commission) ने कहा कि इन नियमों का उद्देश्य बच्चों को इंटरनेट या डिजिटल तकनीक तक पहुंचने से रोकना नहीं है. बल्कि, इसने सेवा प्रदाताओं से ऑनलाइन नुकसानों को दूर करने और आयु-उपयुक्त सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करने की अपेक्षाएं निर्धारित की हैं.
नियामक ने पिछले महीने एक बयान में कहा, “ये उपाय ऑनलाइन वातावरण में बच्चों की सुरक्षा को मजबूत करने में मदद करते हैं, साथ ही माता-पिता को तेजी से जटिल होते डिजिटल जोखिमों से निपटने में अतिरिक्त आश्वासन प्रदान करते हैं.” प्लेटफार्मों को सुरक्षा-आधारित डिजाइन सुविधाओं को लागू करना होगा, जिसमें बाध्यकारी उपयोग को प्रोत्साहित करने वाले जोड़-तोड़ वाले डिजाइन से सुरक्षा शामिल है और नाबालिग अकाउंट और हानिकारक सामग्री के खिलाफ कार्रवाई करनी होगी.

भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन की चर्चा
सबसे पहले यह बता दें कि भारत में राष्ट्रीय स्तर पर बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन करने के लिए कोई नियम नहीं बना है. बच्चों के लिए देश में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन करने और ना करने पर बीते दिनों में कई चर्चाएं देखी गई हैं. मौजूदा जो नियम है वह यह कहता है कि देश में 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों का डेटा प्रोसेस करने के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को उनके माता-पिता की सहमति लेना जरूरी है. देश में यह नियम ‘डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट’ (DPDP Act) के अधीन है.
बता दें कि भारत में कई बच्चे ऐसे हैं, जिन्हें सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए ही पहचान मिली है और वे कंटेंट या रील्स बनाकर लाखों रुपये कमा रहे हैं. हालांकि, कुछ खबरें ऐसी भी आती रही हैं कि सोशल मीडिया की लत से बच्चे बिगड़ रहे हैं. रील्स बनाने के चक्कर में कई ऐसी घटनाएं भी हो गईं हैं, जिनमें कुछ घटनाएं जानलेवा भी साबित हुई हैं. भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन करने की चर्चा के बीच हम आपको दोनों पक्षों का मत सुनाते हैं.
भारत में बैन वाला पक्ष
सबसे पहले हम यहां बात उनकी करेंगे, जो देश में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन करने की बात या मांग कर रहे हैं. कुछ समय पहले भारत के कर्नाटक राज्य ने 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगाने की बात कही थी. वहां की सरकार ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने का अपना प्रस्ताव भी दिया. इसमें बताया गया कि बच्चों के गिरते शैक्षणिक स्तर और उनके मानसिक स्वास्थ्य को देखते हुए इस बैन के कदम को उठाने का फैसला किया गया है.
वहीं, मद्रास हाईकोर्ट ने देश की केंद्र सरकार से ऑस्ट्रेलिया जैसे कोई कानून लाने पर विचार करने की बात कही. यह नियम देश में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए लाने की बात कही जा रही है. आंध्र प्रदेश सरकार ने तो 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर रोक लगाने की बात कही थी. इनके अलावा गोवा और यूपी जैसे कई राज्यों में भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को लेकर कोई खास नियम बनाने को लेकर चर्चा देखी गई. देश के कई एक्सपर्ट और अभिभावक भी इसके पक्ष में दिखते रहे हैं.

आत्महत्या करने वालों में 73% पुरुष, सबसे ज्यादा घर की टेंशन ले रही जान, ये आंकड़े चौंका देंगे
भारत में बैन न करने वाला पक्ष
अब हम बात भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन न करने वाले पक्ष की बात करते हैं. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रहे रंजन गोगई ने भारत में बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन न करने पर अपनी राय दी थी. उन्होंने कहा था कि बच्चों को सोशल मीडिया से मिलने वाले कई फायदों से वंचित क्यों करना चाहिए? उन्होंने कहा था कि बच्चों को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस्तेमाल से रोकने के बजाय उन्हें इसके रचनात्मक उपयोग के बारे में बताना चाहिए. उन्हें इसके लिए शिक्षित करना होगा. बच्चों को सोशल मीडिया के फायदे बताने चाहिए.
कर्नाटक और आंध्र प्रदेश के द्वारा बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन करने की बात पर पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी ने कहा था कि दूरसंचार और सूचना प्रौद्योगिकी केंद्र सरकार का विषय है. इसमें राज्यों को व्यक्तिगत रूप से कानून नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने यहां तक कह दिया था कि इससे लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है. इसे केंद्र सरकार पर ही छोड़ देना चाहिए. अब देखते हैं कि आने वाले समय में भारत सरकार देश के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को यूज करने को लेकर क्या कुछ नया नियम लाती है.
आत्मनिर्भर भारत की नई उड़ान: जानिए क्या है भारत का पहला 5th जनरेशन लड़ाकू विमान AMCA
भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूजर्स
भारत में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के यूजर्स दिन प्रति दिन बढ़े हैं. विभिन्न मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, देश में सबसे अधिक यूजर्स यूट्यूब के हैं. भारत में यूट्यूब के करीब 500 मिलियन यूजर्स हैं. दूसरे स्थान पर व्हाट्सएप है और इसके करीब 485 मिलियन से अधिक यूजर्स हैं. इंस्टाग्राम पर 480 मिलियन से अधिक यूजर्स हैं. बात अगर फेसबुक की करें तो इसके यूजरों की संख्या करीब 403 मिलियन है. वहीं, स्नैपचैट पर लगभग 213 मिलियन यूजर्स हैं. एक्स पर करीब 22 मिलियन यूजर्स हैं.
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, देश में प्रति यूजर हर महीने में डेटा की खपत 24 गीगाबाइट हो गई है. ये आंकड़े 2025 के हैं. भारत में साल 2014 में यह 62 मेगाबाइट थी. संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, भारत में करीब 24 फीसदी आबादी 14 साल से कम उम्र की है. साल 2024 के एक सर्वे में पाया गया कि भारत में 14 से 16 वर्ष के करीब 90 प्रतिशत बच्चों के पास घर में स्मार्टफोन है.

स्क्रीन के गुलाम:भारत में सोशल मीडिया की गिरफ्त में बचपन, जानिए इसके घातक परिणाम और सरकार की तैयारी
दुनिया के इन देशों में बच्चों के लिए बैन
हाल ही में मलेशिया ने अपने यहां 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को बैन करने का फैसला किया है. हालांकि, वह दुनिया में ऐसा करने वाला पहला देश नहीं है. इससे पहले भी विश्व के कई देशों में यह कदम उठाया जा चुका है. जानकारी के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील और इंडोनेशिया सहित दनिया के अन्य कई देशों ने बच्चों के सोशल मीडिया तक पहुंच के लिए आयु-आधारित प्रतिबंध या आवश्यक नियम लागू किए हैं. वहीं, ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, डेनमार्क, थाईलैंड और दक्षिण कोरिया जैसे देश भी इसी तरह के उपायों का अध्ययन या विकास कर रहे हैं. अब समय बताएगा कि भारत सरकार इसके लिए क्या कुछ कदम उठाती है.
