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West Bengal Voting: पश्चिम बंगाल में आज सुबह से वोटिंग जारी है. लोकतंत्र के इस सेलिब्रेशन में वहां की जनता बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है. ऐसे में जल्द ये फैसला हो जाएगा कि राज्य में ममता की वापसी होगी या कमल खिलेगा?
23 अप्रैल, 2026
पश्चिम बंगाल की राजनीति का पारा हमेशा चढ़ा रहता है, और गुरुवार को जब विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए वोटिंग शुरू हुई, तो नजारा कुछ ऐसा ही था. राज्य के 16 जिलों की 152 सीटों पर सुबह 7 बजे से ही मतदान शुरू हो गया. शुरुआती 2 घंटों के आंकड़ों ने क्लियर कर दिया कि बंगाल की जनता अपनी नई सरकार चुनने के लिए कितनी बेताब है. आपको बता दें कि सुबह 9 बजे तक राज्य में 18.76 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया.
बांकुरा सबसे आगे
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, सुबह-सुबह सबसे ज्यादा जोश बांकुरा के वोटर्स में दिखा. वहां, 22.05 प्रतिशत मतदान हुआ. मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज और पश्चिम मेदिनीपुर के चंद्रकोणा में भी वोटरों ने लंबी लाइनें लगाईं. वहीं, कूचबिहार साउथ में सुबह की रफ्तार थोड़ी सुस्त रही, जहां सबसे कम 15.57 प्रतिशत वोटिंग हुई. मालदा के चंचल और हरिश्चंद्रपुर इलाकों में भी शुरुआत कुछ धीमी रही.
EVM की खराबी
वोटिंग के बीच कुछ जगहों से EVM खराब होने की खबरें भी आईं. सूरी सीट से कांग्रेस उम्मीदवार संजय अधिकारी ने आरोप लगाया कि वो सुबह 7 बजे ही बूथ पर पहुंच गए थे, लेकिन मशीन खराब होने की वजह से वोट नहीं डाल पाए. उन्होंने कहा कि सैकड़ों लोग लाइन में खड़े हैं और कोई बताने वाला नहीं है कि वोटिंग कब शुरू होगी. कांग्रेस ने मांग की है कि प्रभावित बूथों पर वोटिंग का टाइम बढ़ाया जाए या दोबारा चुनाव कराए जाएं. दूसरी तरफ, मालतीपुर से कांग्रेस उम्मीदवार मौसम नूर ने शांतिपूर्ण मतदान की उम्मीद जताते हुए अपनी जीत का दावा किया है.
दिग्गजों ने डाला वोट
इस पहले चरण में बंगाल के कई बड़े चेहरों की किस्मत दांव पर लगी है. नंदीग्राम से भाजपा उम्मीदवार और विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने सुबह-सुबह अपना वोट डाला. इसके अलावा उन्होंने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की. वहीं, खड़गपुर सदर से भाजपा के दिग्गज नेता दिलीप घोष भी बूथ पर नजर आए. वोट डालने के बाद उन्होंने बड़े ही कूल अंदाज में कहा कि सिचुएशन नॉर्मल है और लोग शांति से वोट डाल रहे हैं, इसलिए उन्हें बाहर ज्यादा घूमने की जरूरत नहीं महसूस हो रही. इस फेज में निशीथ प्रमाणिक (भाजपा), उदयन गुहा (TMC), गौतम देब (TMC) और अधीर रंजन चौधरी (कांग्रेस) जैसे कद्दावर नेताओं की साख भी दांव पर है.
चप्पे-चप्पे पर पहरा
बंगाल के चुनावी इतिहास में पहली बार सिक्योरिटी के इतने कड़े इंतजाम देखे जा रहे हैं. केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की रिकॉर्ड 2,450 कंपनियां यानी करीब 2.5 लाख जवान तैनात किए गए हैं. चुनाव आयोग ने मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे जिलों को विशेष निगरानी में रखा है. करीब 8,000 पोलिंग स्टेशनों को ‘अति संवेदनशील’ घोषित किया गया है ताकि किसी भी तरह की हिंसा को रोका जा सके. वैसे, ये पहला चरण ममता बनर्जी की टीएमसी के लिए सत्ता बचाने की बड़ी परीक्षा है. वहीं, भाजपा के लिए अपनी पैठ मजबूत करने का सुनहरा मौका भी यही है. अब देखना ये है कि 4 मई को जब रिजल्ट आएंगे, तो बंगाल की जनता किसे सत्ता की चाबी सौंपेगी.
समाचार स्रोत: पीटीआई
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