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राम मंदिर दान मामला: अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में दर्शन करने केवल भारत ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों के तीर्थ यात्री और श्रद्धालु आते हैं. लंबे विवाद के बाद सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राम मंदिर का निर्माण कराया गया था. इसके बाद भगवान राम की प्रतिमा का ऐतिहासिक प्राण प्रतिष्ठा हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ समेत देश के विभिन्न क्षेत्रों के दिग्गज हस्तियां, साधु-संत और अन्य गणमान्य अतिथि शामिल हुए थे.
प्राण प्रतिष्ठा के बाद श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के द्वार हमेशा के लिए खोल दिए गए. सदियों के इंतजार के बाद अयोध्या में बने राम मंदिर में दर्शन करने के लिए लाखों श्रद्धालुओं और राम भक्तों की भीड़ देखी जाती है. इस दौरान करोड़ों रुपयों के चढ़ावे भी आते हैं. देश में प्रमुख मंदिरों की देखरेख, व्यवस्था, दान, जमीन और संपत्ति समेत अन्य जरूरी चीजों की सुरक्षा व रखरखाव के लिए मंदिर ट्रस्ट बनाए जाते हैं. ये ट्रस्ट भारतीय कानून के अधीन होते हैं और मंदिर को लेकर इनके पास बड़ी जिम्मेदारी होती है.
इसी तरह अयोध्या में राम मंदिर के लिए ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट बनाया गया. यह ट्रस्ट अभी बहुत बड़े आरोपों और राम मंदिर में चढ़ावे के गबन मामले का सामना कर रहा है. बीते 7 जून को राम मंदिर में चढ़ावा गबन का मामला सामने आया था. इसमें बताया गया कि राम मंदिर के दान में बड़ी गड़बड़ी और हेरा फेरी हुई है. इसको लेकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एसआईटी गठित कर जांच के आदेश दिए हैं. आइए जानते हैं कि राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में अब तक क्या-क्या हुआ है. इसके साथ ही हम देश के 5 प्रमुख मंदिरों के ट्रस्ट के बारे में जानेंगे.
7 जून को सामने आया था मामला
अयोध्या में राम मंदिर के चढ़ावे में गबन और हेरा फेरी का मामला बीते 7 जून सो सामने आया था. तब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर लिखा था, “समस्त विश्व में भगवान राम के उपासकों के लिए ये एक बेहद संवेदनशील समाचार है कि ‘राम मंदिर’ के चढ़ावे की करोड़ों की रकम गायब पाई गई है.”
उसके बाद अयोध्या के जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी ने मीडिया को बताया था कि राम मंदिर के चढ़ावे को लेकर जो भी आरोप लगे हैं, उनके संबंध में जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं. मामले की जांच जारी है. जांच पूरी होने के बाद संबंधित तथ्यों और जानकारियों को सार्वजनिक किया जाएगा.
राम मंदिर चढ़ावा गबन का यह मामला बहुत ही जल्दी तूल पकड़ लिया. यह मामला इतना बड़ा हो गया कि प्रदेश की योगी सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन कर दिया.

जांच से पूर्ण सत्य सामने आएगा- सीएम योगी
चंदा गबन के मामला सामने आने के बाद यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ अयोध्या पहुंचे. 19 जून दिन शुक्रवार को उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या और मंदिर को “बदनाम” करने और श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कामकाज पर संदेह पैदा करने के प्रयास किए जा रहे हैं, और कहा कि लोगों को ऐसी “षड्यंत्रों” के झांसे में नहीं आना चाहिए.
सीएम योगी ने कहा, “ट्रस्ट के अनुरोध पर हमने एसआईटी जांच का आदेश दिया है. मैं आपको विश्वास दिलाता हूं कि इस जांच से पूर्ण सत्य सामने आएगा. इसमें कोई संदेह नहीं है. ” अयोध्या के रुदौली में एक सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा, “मैं सभी भक्तों से निवेदन करता हूं कि वे याद रखें कि भगवान राम ने हमें ‘मर्यादा’ का पाठ पढ़ाया है.”
उन्होंने आगे कहा, “भगवान राम के पवित्र स्थल को पुनः प्राप्त करने के लिए हमारे पूर्वजों को 500 वर्षों का संघर्ष करना पड़ा. आइए हम केवल 15 दिन और प्रतीक्षा करें. हालांकि, हमें उन लोगों के बहकावे में नहीं आना चाहिए जो अयोध्या को बदनाम करना चाहते हैं या राम जन्मभूमि मंदिर का अपमान करना चाहते हैं.”
सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि दोहरे इंजन वाली सरकार देश और सनातन धर्म के हित में काम करेगी और यह धार्मिक परंपराओं की रक्षा करने और राम जन्मभूमि आंदोलन के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले संतों के बलिदानों का सम्मान करने के लिए प्रतिबद्ध है.
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एसआईटी जांच में चुनौतियों का सामना
बता दें कि 7 जून को मामला सामने आने के बाद श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 13 जून को गठित तीन सदस्यीय एसआईटी मंदिर के दान की चोरी के आरोपों की जांच कर रही है. एसआईटी में लखनऊ संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं.

ट्रस्ट पदाधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश
एसआईटी ने मंदिर के ट्रस्ट और मंदिर के पदाधिकारियों को अयोध्या न छोड़ने का निर्देश दिया है. जांचकर्ताओं को सोने, चांदी और कीमती पत्थरों जैसी भेंटों के दस्तावेजों में अनियमितताएं मिली हैं. बता दें कि तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) ने रविवार को लखनऊ रवाना होने से पहले यह निर्देश जारी किया था.
एसआईटी के जांच के दायरे में ये भी मामले
न्यूज एजेंसी पीटीआई के अनुसार, मंदिर सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट के अधिकारियों और जांच से जुड़े अन्य व्यक्तियों से पूछताछ से संबंधित हर रोज की जांच रिपोर्टों को डिजिटल रूप में सहेज लिया गया है और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ को प्रस्तुत करने से पहले रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाएगा.
सूत्रों ने बताया कि एसआईटी की जांच केवल कथित धन गबन की जांच तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें मंदिर ट्रस्ट द्वारा विभिन्न चरणों में जमीन की खरीद और मंदिर के लिए निर्माण सामग्री की खरीद को भी शामिल किया गया है. आरोप है कि मंदिर ट्रस्ट ने बाजार दर से कई गुना अधिक कीमत पर जमीन खरीदी थी.
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सीएम योगी को सौंपी जाएगी रिपोर्ट
मिली जानकारी के अनुसार, राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले में गठित एसआईटी की जांच तेजी के साथ आगे बढ़ रही है. जांच अधिकारियों को इस दौरान कई बातों का पता चला है. बताया जा रहा है कि प्रारंभिक जांच लगभग पूरी की जा चुकी है. जांच के दौरान कुछ पैसों की रिकवरी की भी बात सामने आई है. हालांकि, सार्वजनिक रूप से एसआईटी ने अपना कोई बयान अभी जारी नहीं किया है.
जानकारी के अनुसार, एसआईटी ने करीब 150 पन्नों की अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है. तय समय के साथ इसे प्रदेश के सीएम योगी के समक्ष पेश किया जाएगा. बताया गया कि एसआईटी ने पहले राउंड की जांच पूरी कर ली है. जांच के बाद यह बात और तथ्य सामने आ जाएगा कि क्या ट्रस्ट ने लोगों के ट्रस्ट को बनाए रखा है या फिर तोड़ा है.
आइए अब जानते हैं देश के प्रमुख मंदिरों के लिए बनाए गए 5 खास ट्रस्ट के बारे में. इसकी शुरुआत हम अयोध्या राम मंदिर के लिए बनाए गए ट्रस्ट ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ से करते हैं.
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र
अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि पर श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए भारत सरकार ने ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी 2020 को लोकसभा में इस ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी. इसके 15 सदस्यों में से 12 सदस्यों को भारत सरकार ने नामित किया था और पहली बैठक के दौरान 3 और सदस्यों को चुना गया था. ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ का पंजीकरण हो चुका है और इसका रजिस्टर्ड ऑफिस R-20, ग्रेटर कैलाश पार्ट-1, नई दिल्ली, 110048 में है.

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तिरूपति तिरुमला देवस्थानम
तिरुपति तिरुमला देवस्थानम की बात करें तो यह आंध्र प्रदेश में स्थित विश्व प्रसिद्ध भगवान वेंकटेश्वर (बालाजी) मंदिर का ट्रस्ट है. जानकारी के अनुसार, इस मंदिर को देश के सबसे अमीर मंदिरों में से एक माना जाता है. यहां साल भर में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का रिकॉर्ड भी दिखता है. इस मंदिर के प्रबंधन के लिए तिरुपति तिरुमला देवस्थानम को बनाया गया है, जो एक सरकारी ट्रस्ट है. यह ट्रस्ट मंदिर की व्यवस्था, सुरक्षा, दान में मिले पैसों का प्रबंधन और अन्य जिम्मेदारियों को संभालता है.

श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट
मथुरा में भगवान कृष्ण की पवित्र जन्मभूमि को संरक्षित और प्रचारित करने के लिए श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति ट्रस्ट का निर्माण कराया गया है. इसकी आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, ” हमारा (श्री कृष्ण जन्मभूमि मुक्ति निर्माण ट्रस्ट) मिशन इस दिव्य स्थल की रक्षा करना, इसकी समृद्ध आध्यात्मिक विरासत का जश्न मनाना और सांस्कृतिक, शैक्षिक व धर्मार्थ पहलों के माध्यम से समुदाय की सेवा करना है. भगवान कृष्ण की विरासत को बनाए रखने और उनके प्रेम, शांति और भक्ति के संदेश को फैलाने में हमारे साथ जुड़ें.”

श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास
अब बात श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास की करते हैं. इसकी आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक, “श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में होने वाले दैनिक कार्यक्रमों, जैसे, दर्शन, चारो पहर की आरती, रुद्राभिषेक इत्यादि के सफल एवं सुचारू रूप से संचालन हेतु दिनांक 28 जनवरी 1983 को उत्तर प्रदेश सरकार की अध्यादेश संख्या 2899(2)-XVII-V-(ka)-8-1983 के अंतर्गत श्री काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास का गठन किया था.”
इसमें आगे बताया गया कि न्यास अध्यक्ष समेत इसमें सदस्यों की कुल संख्या 15 है जिनमें से 6 सदस्य राज्य सरकार द्वारा नामित हैं और शेष नौ सदस्य पदेन होते हैं.

श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड
जम्मू-कश्मीर के त्रिकुट पर्वत पर स्थित विश्व प्रसिद्ध माता वैष्णों देवी मंदिर के लिए श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड को बनाया गया है. ट्रस्ट की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, यात्रा का प्रबंधन और मंदिर का संचालन श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा किया जाता है, जिसे आमतौर पर श्राइन बोर्ड कहा जाता है.
इस बोर्ड की स्थापना अगस्त 1986 में जम्मू और कश्मीर श्री माता वैष्णो देवी श्राइन अधिनियम, 1988 के प्रावधानों के तहत की गई थी. अधिनियम का मुख्य उद्देश्य श्री माता वैष्णो देवी जी के पवित्र मंदिर और उससे जुड़ी भूमि और भवनों सहित उसकी संपत्तियों का बेहतर प्रबंधन और संचालन करना था. अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, श्री माता वैष्णो देवी मंदिर और श्राइन फंड का प्रशासन, प्रबंधन और संचालन एक बोर्ड के पास निहित है, जिसमें अध्यक्ष और अधिकतम दस सदस्य होंगे.
जानकारी के अनुसार, जब से श्राइन बोर्ड ने कार्यभार संभाला है, तब से वह माता वैष्णो देवी जी के पवित्र गुफा मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं को हर संभव सुविधा प्रदान करने के लिए निरंतर प्रयासरत है. परिणामस्वरूप, माता वैष्णो देवी जी के पवित्र मंदिर की यात्रा में अभूतपूर्व वृद्धि हुई है.
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