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Women Reservation: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के सांसदों पर तीखा हमला करते हुए उनकी तुलना महाभारत के ‘द्रौपदी चीरहरण’ प्रकरण से की है.
महिला आरक्षण: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विपक्ष के सांसदों पर तीखा हमला करते हुए उनकी तुलना महाभारत के ‘द्रौपदी चीरहरण’ प्रकरण से की है. रविवार को उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण विधेयक (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) के दौरान विपक्षी दलों का व्यवहार उनकी महिला विरोधी मानसिकता को दर्शाता है. आदित्यनाथ ने कांग्रेस, सपा, टीएमसी और डीएमके का नाम लेते हुए कहा कि इन दलों के नेताओं के भाषण और आचरण ने उन्हें बेनकाब कर दिया है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी गठबंधन न केवल विकास विरोधी है, बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान के खिलाफ भी है.
महिलाओं के लिए जारी रहेगा संघर्ष
सीएम आदित्यनाथ ने कहा कि मोदी सरकार ने जोर देकर कहा कि महिलाओं को अधिकार देने के लिए संघर्ष जारी रहेगा. गृह मंत्री अमित शाह ने भी आश्वासन दिया कि 2011 की जनगणना द्वारा स्थापित ढांचे के अनुसार, दक्षिणी राज्यों के लिए प्रतिनिधित्व ठीक उसी अनुपात में बढ़ेगा जैसा कि उत्तरी और पूर्वी राज्यों के लिए है. योगी ने कहा कि केवल एक ही इच्छा थी कि पूरा सदन एकजुट होकर नारी शक्ति वंदन अधिनियम को संशोधन के साथ पारित करे.
विपक्ष का आचरण नारी सम्मान के खिलाफ
मुख्यमंत्री ने लखनऊ में संवाददाताओं से कहा कि हालांकि, सदन में जो दृश्य चला. कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी और डीएमके ने कैसा रवैया अपनाया, वह हमारा ध्यान (कौरव सभा में) द्रौपदी के ‘चीरहरण’ के दृश्य की ओर खींचता है. कहा कि विपक्ष द्वारा की गई गैरजिम्मेदाराना टिप्पणियां सभी को पता है. मुख्यमंत्री योगी ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर विपक्ष को घेरते हुए कहा कि कांग्रेस-सपा महिला विरोधी हैं. उन्होंने विपक्षी सांसदों के आचरण को नारी सम्मान के खिलाफ बताया. आधी आबादी के मन में विपक्ष के इस नारी विरोधी आचरण के बारे में भारी आक्रोश है.
महिला सशक्तिकरण विपक्ष के लिए सिर्फ एक चुनावी नारा
योगी ने कांग्रेस-सपा पर तीखा हमला बोला और उस पर प्रस्तावित संविधान संशोधन विधेयक, 2026 को रोकने का आरोप लगाया. कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने एक बार फिर अपनी महिला विरोधी मानसिकता को उजागर किया है. उनके पास महिला सशक्तिकरण का समर्थन करने का ऐतिहासिक अवसर था, लेकिन उन्होंने इसके बजाय संकीर्ण राजनीतिक हितों को चुना. मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्षी दल केवल महिलाओं के अधिकारों का समर्थन करने का दिखावा करते हैं. उन्होंने कहा कि वे महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं, लेकिन जब उन्हें अधिकार देने की बात आती है, तो वे मुद्दे को किनारे करने की कोशिश करते हैं. उनके लिए महिला सशक्तिकरण सिर्फ एक चुनावी नारा है. उन्होंने कहा कि केंद्र विधायी निकायों में महिलाओं के लिए अधिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के लिए परिसीमन विधेयक और केंद्र शासित प्रदेशों से संबंधित संशोधनों के साथ संविधान संशोधन विधेयक, 2026 लाया है.
विधेयक पारित होने पर मिलता 33% आरक्षण
उन्होंने कहा कि अगर यह विधेयक पारित हो गया होता तो हमारी माताओं और बहनों को 2029 के आम चुनावों में लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण मिलता. शुक्रवार को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक के समर्थन में जहां 298 सदस्यों ने वोट किया, वहीं 230 सांसदों ने इसके विरोध में वोट किया. विधेयक को दो-तिहाई बहुमत हासिल करने के लिए 352 वोटों की आवश्यकता थी. विधेयक के अनुसार, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन के बाद 2029 के संसदीय चुनावों से पहले महिला आरक्षण कानून को क्रियान्वित करने के लिए लोकसभा सीटों को मौजूदा 543 से बढ़ाकर 816 किया जाना था. महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण को समायोजित करने के लिए राज्य और केंद्र शासित प्रदेश विधानसभाओं में सीटें भी बढ़ाई जानी थीं.
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