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कश्मीर में सरकार ने बंद किया इंटरनेट

by Live India
Kashmir Restrictions

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Kashmir Restrictions: खामेनेई की मौत के बाद कश्मीर हो रहे प्रदर्शनों को देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने लाल चौक को सील कर दिया है और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

2 मार्च, 2026

ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के पूरी दुनिया के शिया मुस्लिम मातम मना रहे हैं। वहीं भारत के कश्मीर में मुसलमान प्रदर्शन कर रहे हैं। कल लोगों ने सड़कों पर मार्च किया, जिसको देखते हुए जम्मू-कश्मीर सरकार ने कई प्रतिबंध लागू कर दिए हैं। सोमवार को कश्मीर के कुछ हिस्सों में लोगों की आवाजाही पर कड़ी रोक लगा दी गई है, जहां खामेनेई की हत्या के विरोध में सड़कों पर बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुआ था। इसके साथ घाटी में इंटरनेट सेवा भी बंद कर दी गई है।

लाल चौक सील

अधिकारियों ने बताया कि लाल चौक पर मशहूर घंटा घर को चारों ओर बैरिकेड लगाकर सील कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों को इकट्ठा होने से रोकने के लिए शहर भर में बड़ी संख्या में पुलिस और पैरामिलिट्री CRPF के जवानों को तैनात किया गया है। एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर में लगभग 15 लाख शिया मुसलमान रहते हैं. उन्होंने लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा में बड़े विरोध प्रदर्शन किए थे। प्रदर्शनकारी अपनी छाती पीटते हुए US और इजराइल विरोधी नारे लगाते देखे गए। अधिकारियों ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर ये पाबंदियां लगाई गई हैं। उन्होंने कहा कि शहर में आने वाले जरूरी चौराहों पर गाढ़े तार और बैरिकेड लगाए गए हैं।

इंटरनेट सेवा ठप, स्कूल बंद

अधिकारियों ने बताया कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के खिलाफ अचानक हुए विरोध प्रदर्शनों के बाद सोमवार को पूरे कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट बंद कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर यह कदम उठाया गया। इस बीच, पुलिस ने एक एडवाइजरी जारी कर सभी मीडिया ऑर्गनाइजेशन और न्यूज प्लेटफॉर्म को अपनी रिपोर्टिंग में पूरी जिम्मेदारी और प्रोफेशनलिज्म दिखाने की अपील की है। अधिकारियों ने स्टूडेंट्स की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए एहतियात के तौर पर प्राइवेट स्कूलों समेत सभी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन भी दो दिनों के लिए बंद कर दिए हैं।

शांति बनाए रखने की अपील

घाटी के दूसरे जिलों में शिया-बहुल इलाकों में भी इसी तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। ये पाबंदियां मुताहिदा मजलिस-ए-उलेमा (MMU) के चेयरमैन मीरवाइज उमर फारूक की एक दिन की हड़ताल की कॉल के बाद लगाई गई हैं। मीरवाइज ने कहा, “हम लोगों से इसे एकता, सम्मान और पूरी शांति के साथ मनाने की अपील करते हैं।” MMU की हड़ताल की कॉल को विपक्षी PDP प्रेसिडेंट महबूबा मुफ़्ती समेत कई राजनीतिक पार्टियों ने सपोर्ट किया।

मुफ्ती ने कहा, “ईरान के सुप्रीम लीडर की शहादत पर मीरवाइज उमर फारूक की बंद की कॉल के साथ हम अपना पूरा सपोर्ट और एकजुटता दिखाते हैं। यह दुनिया को यह याद दिलाने के लिए शोक का दिन है कि कहीं भी अन्याय पूरी मुस्लिम उम्मा और सच के लिए खड़े होने वाले सभी लोगों को चोट पहुंचाता है।”

समाचार स्रोत: पीटीआई

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