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अमेरिका-ईरान की तकरार ने बिगाड़ा Stock Market का मूड

by Live India
अमेरिका-ईरान की तकरार ने बिगाड़ा Stock Market का मूड, लाल निशान देख इन्वेस्टर्स के उड़े रंग

Stock Market: हफ्ते के पहले दिन ही शेयर मार्केट इन्वेस्टर्स के पोर्टफोलियो लाल निशान में डूब गए हैं. आप भी जानें आखिर इस गिरावट के पीछे कौन-कौन से कारण हैं.

13 अप्रैल, 2026

सोमवार की सुबह शेयर मार्केट इन्वेस्टर्स के लिए किसी बुरे सपने से कम नहीं रही. हफ्ते के पहले ही दिन बाजार के दोनों बड़े इंडेक्स, सेंसेक्स और निफ्टी, बुरी तरह टूट गए. बाजार में आई इस सुनामी की सबसे बड़ी वजह अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता का फेल होना है. जैसे ही इन दोनों देशों के बीच बातचीत टूटने की खबर आई, कच्चा तेल यानी क्रूड ऑयल के प्राइज सातवें आसमान पर पहुंच गए. साथ ही भारतीय शेयर बाजार धड़ाम से गिर पड़ा.

खलबली की वजह

बाजार में इस गिरावट का सबसे बड़ा विलेन कच्चा तेल है. अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान में हुई 21 घंटे की लंबी बातचीत बिना किसी नतीजे के खत्म हो गई. इतना ही नहीं, अमेरिका ने ईरान की तेल सप्लाई को रोकने के लिए नौसैनिक नाकाबंदी की अनाउंसमेंट कर दी है. इस खबर के आते ही इंटरनेशनल मार्केट में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 7 प्रतिशत से ज्यादा उछलकर 103 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं. वैसे भी, भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल इम्पोर्ट करता है, इसलिए जब भी तेल महंगा होता है, तो देश की इकोनॉमी पर प्रेशर बढ़ जाता है. इससे महंगाई बढ़ने और रुपया कमजोर होने का डर सताने लगता है. यही वजह है कि इन्वेस्टर्स ने घबराकर प्रोफिट बुकिंग शुरू कर दी.

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आज की गिरावट

सोमवार सुबह शेयर मार्केट के खुलते ही सेंसेक्स लगभग 1,600 पॉइंट से ज्यादा फिसलकर 76,000 के नीचे आ गया. वहीं, निफ्टी में भी 460 पॉइंट से ज्यादा की गिरावट देखी गई और ये 23,600 के आसपास ट्रेड करने लगा. बाजार की हालत इतनी पतली थी कि निफ्टी की सभी 50 कंपनियों के शेयर लाल निशान में ट्रेड कर रहे थे. सबसे ज्यादा मार बैंकिंग, ऑटो और पीएसयू यानी सरकारी बैंकों पर पड़ी. एसबीआई, मारुति सुजुकी, एचडीएफसी बैंक और बजाज फाइनेंस जैसे बड़े शेयर्स 3 प्रतिशत तक टूट गए. बाजार में डर का माहौल इस बात से भी पता चलता है कि इंडिया विक्स 13 प्रतिशत उछलकर 21 के ऊपर पहुंच गया.

खास हैं ये लेवल

तकनीकी नजरिए से देखें तो निफ्टी का 24,000 के लेवल से नीचे जाना अच्छा हिंट नहीं हैं. अब निफ्टी के लिए 23,500 से 23,600 का लेवल एक स्ट्रॉन्ग सपोर्ट है. अगर मार्केट इससे भी नीचे फिसलती है, तो ये 23,100 के लेवल तक भी जा सकती है. वैसे भी, ग्लोबल हालात पल-पल बदल रहे हैं. शुक्रवार को फॉरेन इन्वेस्टर्स ने कुछ खरीदारी की थी, जिससे लग रहा था कि शेयर मार्केट संभल जाएगी. हालांकि, वीकेंड पर आई इस खबर ने सारा खेल बिगाड़ दिया. फिलहाल बाजार पूरी तरह से ग्लोबल खबरों और कच्चे तेल की चाल पर टिका है. आने वाले दिनों में नजर इस बात पर रहेगी कि क्या अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कम होता है या ये लड़ाई लंबी खिंचेगी?

एक्सपर्ट्स की राय

शेयर मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब तक मिडिल ईस्ट में तनाव कम नहीं होता, बाज़ार में ऐसी ही सिचुएशन बनी रहेगी. जियोजित इन्वेस्टमेंट के चीफ स्ट्रैटेजिस्ट वी.के. विजयकुमार के मुताबिक, कच्चा तेल 103 डॉलर के पार जाना हमारी इकोनॉमी के लिए एक बड़ा खतरा है. ऐसे टाइम में समझदारी वेट एंड वॉच में ही है. जल्दबाजी में कोई भी बड़ा इन्वेस्टमेंट करना रिस्की हो सकता है.

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