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India-Uzbekistan Relation : DUSTLIK 2026 का सातवां संस्करण 12 से 25 अप्रैल 2026 तक उज़्बेकिस्तान के नामंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया जा रहा है.
भारत-उज्बेकिस्तान संबंध: भारत और उज्बेकिस्तान के बीच 7वां संयुक्त सैन्य अभ्यास, डस्टलिक उज्बेकिस्तान के नामंगन में चल रहा है. इसका उद्देश्य अर्ध-पर्वतीय इलाकों में संचालन क्षमता को मजबूत करना है तथा गैर-कानूनी सशस्त्र गुटों के खिलाफ विशेष सशस्त्र कौशल और विशेष अभियान पर ध्यान केंद्रित करना है. अभ्यास के दौरान दोनों देशों की सैन्य टुकड़ियों ने तकनीक, यूएवी एप्लिकेशन और संचालन तत्परता पर काम किया है.
फील्ड ट्रेनिंग एरिया किया गया आयोजित
DUSTLIK 2026 का सातवां संस्करण 12 से 25 अप्रैल 2026 तक उज़्बेकिस्तान के नामंगन स्थित गुरुमसराय फील्ड ट्रेनिंग एरिया में आयोजित किया जा रहा है. यह अभ्यास अर्ध-पर्वतीय क्षेत्र में संयुक्त योजना, सामरिक ड्रिल, विशेष हथियार कौशल तथा अवैध सशस्त्र समूहों के विरुद्ध विशेष अभियानों पर ध्यान केंद्रित करते हुए पारस्परिक संचालन क्षमता और संयुक्त अभियान क्षमता को बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है.
भारतीय दल में 60 कर्मी शामिल हैं, जिसमें भारतीय सेना के 45 कर्मी मुख्य रूप से महार रेजिमेंट की एक बटालियन से और भारतीय वायु सेना के 15 कर्मी शामिल हैं. उज्बेकिस्तान दल में भी लगभग 60 कर्मी उज्बेकिस्तान सेना और उसकी वायु सेना से शामिल हैं.
विभिन्न स्तरों पर किया अभ्यास
अभ्यास के दौरान दोनों देशों के सैनिकों ने एरिया फेमिलियराइज़ेशन, रणनीति, तकनीक और प्रक्रियाओं का आदान-प्रदान किया. इसके अलावा दोनों हाथों से पिस्टल फायरिंग, रिफ्लेक्स शूटिंग, आरपीजी फायरिंग, निहत्था युद्ध, बेयोनेट लड़ाई, यूएवी का उपयोग, शहरी क्षेत्र में फायर एंड मूव ड्रिल, कॉम्बैट कैज़ुअल्टी एवैक्यूएशन, टोही और निगरानी, घरों में हस्तक्षेप ड्रिल, पर्वतारोहण, रैपलिंग, स्नाइपर प्रशिक्षण तथा नेविगेशन अभ्यास जैसे विभिन्न प्रशिक्षण किए हैं. इससे सामरिक समन्वय और संचालन क्षमता को सुदृढ़ किया जा सकता है. इसके अतिरिक्त दौड़, कैलिस्थेनिक्स, योग और अन्य आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियों के माध्यम से शारीरिक सहनशक्ति और टीम भावना को भी मजबूत किया गया है.
आने वाले दिनों में होंगे और प्रयास
उज़्बेकिस्तान मध्य एशिया में सामरिक महत्त्व रखता है. इसमें कराकल्पकस्तान का स्वायत्त क्षेत्र शामिल है और यह क्षेत्रीय भू-राजनीति तथा मध्य एशिया के साथ भारत के जुड़ाव में एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. आने वाले दिनों में यह अभ्यास और अधिक जटिल संयुक्त अभियानों की ओर बढ़ने की अपेक्षा है, जिसमें अर्ध-पर्वतीय क्षेत्र में शत्रुतापूर्ण लक्ष्यों पर स्ट्राइक ऑपरेशन, निर्धारित लक्ष्यों पर कब्जा, हेलिबोर्न संचालन, संयुक्त कमांड एवं नियंत्रण संरचना की स्थापना तथा एकीकृत विशेष अभियानों की प्रक्रियाओं का परीक्षण शामिल होगा. इससे भारतीय सेना और उज़्बेकिस्तान की सेना के बीच समन्वय और पारस्परिक संचालन क्षमता और अधिक सुदृढ़ होगी. यह पूरा मिशन संयुक्त सामरिक अभ्यासों, हमले से जुड़े मिशन और भूमि नेविगेशन अभ्यासों के माध्यम से एक यूनिफाइड कमांड-एंड-कंट्रोल फ्रेमवर्क को विकसित करने पर केंद्रित है.
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