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रूस का यूक्रेन पर हमला: अमेरिका और ईरान की जंग के साथ अब रूस और यूक्रेन की जंग भी तेज होती जा रही है. रूस लगातार यूक्रेन की राजधानी पर हमले कर रहा है. अधिकारियों ने बताया कि रूस ने रविवार रात को कीव पर मिसाइलों और ड्रोन से कई हमले किए, जिसमें कम से कम तीन लोग मारे गए. यह हमला तुर्की में होने वाली NATO की बैठक से ठीक एक दिन पहले हुआ है. तीन दिन पहले भी रूस ने कीव पर हमले कर भीषण तबाही मचाई, जिसमें 31 लोगों की मौत हो गई.
धमाकों से दहला कीव
कीव के मेयर विटाली क्लिट्स्को ने कहा कि शहर के कम से कम दो इलाकों में आग लगने या मलबे गिरने से नुकसान की खबरें हैं. धमाकों से कुछ देर पहले राजधानी में एयर रेड सायरन बजने लगे थे. डार्नित्सिया जिले में कई मल्टी-स्टोरी इमारतों को नुकसान पहुंचा और लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है. राजधानी पर हमले सोमवार सुबह तक जारी रहे, जिसमें बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों के साथ-साथ ड्रोन से कीव को निशाना बनाया गया. हमलों से पूरे शहर में धमाकों की आवाज गूंज रही थी और सभी लोग मेट्रो स्टेशनों में पनाह ले रहे थे.
जेलेंस्की ने दी थी चेतावनी
यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लादिमीर जेलेंस्की ने कुछ घंटे पहले शहर पर रूस के एक और बड़े हमले की चेतावनी दी थी. उन्होंने कहा था- खुफिया जानकारी एक बार फिर संकेत दे रही है कि रूसी एक और बड़े हमले की तैयारी कर रहे हैं. यह पुतिन का आम तरीका है- अमेरिका के स्वतंत्रता दिवस के ठीक बाद और अंकारा में NATO समिट से पहले. रूस और ज्यादा तबाही मचाना और लोगों की जान लेना चाहता है.
पुतिन की US को चेतावनी
रविवार देर रात टेलीग्राम पर एक पोस्ट में जेलेंस्की ने पश्चिमी पार्टनर्स से यूक्रेन के एयर डिफेंस को मजबूत करने की अपील की, खासकर ज्यादा पैट्रियट मिसाइलें सप्लाई करके. उन्होंने कहा कि मिसाइलें न देने से रूस को अपने चार साल के युद्ध को और लंबा खींचने का हौसला मिलेगा. NATO मीटिंग से ठीक पहले कीव पर रूस का हमला अमेरिका और पश्चिमी देशों के लिए एक स्ट्रेटेजिक चेतावनी है. पुतिन इससे ट्रंप को संदेश देना चाहते हैं कि मॉस्को NATO मिलिट्री अलायंस द्वारा यूक्रेन को एयर डिफेंस सिस्टम और सपोर्ट देने को सीधे चुनौती दे रहा है. साथ ही यूक्रेन की मदद करने से पहले रूस के हमलों की गंभीरता को समझा जाए.
11 घंटे तक कीव पर बरपा कहर! रूस ने मिसाइल-ड्रोन से मचाई तबाही, यूक्रेन में 21 मौतें, 90 घायल
समाचार स्रोत: पीटीआई
