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अमेरिकी ईरान युद्ध: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में ईरान के द्वारा जहाजों को निशाना बनाए जाने के बाद से अमेरिकी सेना तेहरान के खिलाफ लगातार हमले की कार्रवाई कर रही है. होर्मुज को लेकर ईरान का कहना रहा है कि वह उसके कंट्रोल में आता है और वह जैसे चाहेगा वैसे उसका इस्तेमाल करेगा. उसने जहाजों पर हमले को लेकर यह कहा था कि होर्मुज में उसके द्वारा तय रास्ते पर जहाज नहीं चल रहे थे, इसलिए उसने उनपर गोलीबारी की.
हालांकि, अमेरिका इसे होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा को खतरा बताते रहा है. उसने फिर से ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है. जी हां, अमेरिकी आर्मी ने ईरान के कई ठिकानों पर बम बरसाए हैं. अमेरिका ने बताया कि ईरान के खिलाफ लगातार 11वीं रात उनकी यह कार्रवाई है.
ईरान के इन सैन्य ठिकानों पर बमबारी
मिली जानकारी के अनुसार, अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने बुधवार तड़के ईरान पर लगातार ग्यारहवीं रात हमले किए, क्योंकि मध्य पूर्व में हो रहे हमलों ने पाकिस्तान में अंतरिम युद्धविराम समझौते को बचाने के लिए किए जा रहे राजनयिक प्रयासों पर ग्रहण लगा दिया है, जो विफल हो चुका है. अमेरिका के द्वारा यह हमला राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हमलों को तेज करने के संकेत देने के बाद हुआ है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बताया, “21 जुलाई को रात 8:15 बजे (ET), U.S. सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने ईरान के खिलाफ लगातार 11वीं शाम हमले सफलतापूर्वक पूरे किए.” अमेरिकी सेना ने बताया, ” CENTCOM ने ईरान के मिलिट्री ऑपरेशन सेंटर, समुद्री क्षमताओं, एयरक्राफ्ट हैंगर, ड्रोन स्टोरेज सुविधाओं और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स इंफ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया, ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में कमर्शियल शिपिंग के लिए खतरा पैदा करने की ईरान की क्षमता को और कम किया जा सके.”
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– यूएस सेंट्रल कमांड (@CENTCOM) 22 जुलाई, 2026
होर्मुज में 30 से अधिक जहाजों पर हमले- अमेरिका
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने बताया, “पिछले तीन महीनों में, ईरान ने क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार के लिए महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग से गुजरने वाले 30 से अधिक कमर्शियल जहाजों पर हमले किए हैं. इन गैर-जरूरी हमलों ने सैकड़ों निर्दोष नाविकों की जान खतरे में डाली है और नेविगेशन की स्वतंत्रता को कमजोर किया है.”
अमेरिका ने कहा, ” ईरान की आक्रामकता के बावजूद, होर्मुज जलडमरूमध्य कमर्शियल जहाजों की आवाजाही के लिए खुला है. मई की शुरुआत से, CENTCOM की सेनाओं ने लगभग 900 कमर्शियल जहाजों और 450 मिलियन बैरल कच्चे तेल की आवाजाही में मदद की है.”
कच्चा तेल हुआ महंगा
अमेरिकी हमले के जवाब में ईरान भी खाड़ी देशों को निशाना बनाते रहा है. वहीं, इस तनाव के कारण एनर्जी की कीमतें बढ़ गईं हैं. मंगलवार को कच्चे तेल का अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क 91 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से ऊपर कारोबार कर रहा था और अमेरिका में सामान्य गैसोलीन की कीमत बढ़कर औसतन 4 अमेरिकी डॉलर प्रति गैलन हो गई.
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समाचार स्रोत: पीटीआई
